
डेढ़ करोड़ लोग रोजाना लग रहे हैं दांव
नई दिल्ली (जयलोक)। भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी और रियल-मनी गेमिंग पर कानूनी रोक होने के बावजूद इसका कारोबार रुक नहीं पाया है। सरकार ने 2025 के प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट और 2026 के नियमों के तहत ऑनलाइन मनी गेम्स, उनके विज्ञापन तथा उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर पूर्ण प्रतिबंध भारत में हैं।
इसके बावजूद विदेशी सर्वरों और नए-नए वेब पतों के जरिए भारतीय सट्टेबाज सट्टा खिलाने वाले प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहे है। मार्च 2026 की एक जांच में पाया गया कि कई ऑफशोर बेटिंग साइटों तक बिना वीपीएन के भी पहुंच संभव है. यह प्लेटफॉर्म हिंदी, मराठी, तमिल और बंगाली भारतीय भाषाओं में सेवाएं दे रहे हैं। भारतीय कंपनियों से जुड़े कारोबार का विदेशों में विस्तार प्रतिबंध होने के बाद भी ऑनलाइन गेमिंग को रोक पाना सरकार के लिए नई चुनौती बन गई है।
कुछ ऑनलाइन मनी-गेमिंग कंपनियां, विदेशी बाजारों और विदेशी साझेदारों के साथ कारोबार कर रहे हैं.
सरकारी जांच में करीब 700 ऑफशोर ऑनलाइन मनी गेमिंग की गतिविधियां निगरानी में होने की जानकारी सामने आई है। डीजीजीआई ने 357 वेबसाइट/यूआरएल ब्लॉक किए. करीब 2,400 बैंक खातों पर कार्रवाई की है। कुछ प्लेटफॉर्म म्यूल खातों के जरिए धन का लेनदेन करने का मामला भी उजागर हुआ है।
गेमिंग कारोबार को रोकने के लिए केवल ऐप या वेबसाइट बंद करना पर्याप्त नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय निगरानी, बैंक-पेमेंट नेटवर्क की सख्त जांच, सोशल मीडिया के विज्ञापन, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने,डोमेन को तत्काल ब्लॉक करने की व्यवस्था जरूरी है। सरकार पहले ही सोशल मीडिया और मध्यस्थ प्लेटफॉर्मों को अवैध गेमिंग सामग्री पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दे चुकी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपयुक्त कार्यवाही नहीं होने से ऑनलाइन गेमिंग का कारोबार तेजी के साथ चल रहा है।





