
जबलपुर (जय लोक)। प्रदेश में ओबीसी को आरक्षण देने के मामले में लंबे समय से हाईकोर्ट में सुनवाई की प्रतिक्षा की जा रही थी। अब मप्र हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष डिविजन बेंच गठित करने का आदेश जारी किया है। अब यह विशेष डिविजन बेंच ओबीसी आरक्षण के मामले में 15 जुलाई से नियमित सुनवाई करेगी। मप्र उच्च न्यायालय में 2019 से ओबीसी आरक्षण के मामले में 91 याचिकाओं पर सुनवाई का मामला लंबित चला आ रहा है।

अब इन सभी मामलों की यह खंडपीठ सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े इन मामलों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंठपीठ में विस्तृत सुनवाई शुरू हो गई थी। याचिकाकर्ताओं की बहस पूरी होने के बाद 16 जून से राज्य सरकार का पक्ष सुना जाना था। लेकिन इसी बीच हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हो गए और जस्टिस विनय सराफ का स्थानांतरण इंदौर खंडपीठ में हो गया। इस कारण से ओबीसी आरक्षण के मामले में सुनवाई नहीं हो सकी।

बाद में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस वीपी शर्मा की बेंच ने 16 और 24 जून को सुनवाई करते हुए नियमित सुनवाई का कार्यक्रम तय किया था। लेकिन समस्या यह आ रही थी कि दोनों पूर्व जजों के ना होने के कारण मामले की पूरी सुनवाई दोबारा से शुरू हो रही थी। अब जस्टिस विनय सराफ के डिविजन बेंच में होने के कारण इस बड़ी समस्या से राहत मिलेगी। ओबसी वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि चूकिं जस्टिस विनय सराफ इस मामले में पहले से विस्तृत सुनवाई कर चुके हैं इसलिए सुनवाई की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से उन्हें फिर से विशेष बेंच में शामिल किया गया है। 8 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश के बाद अब ओबीसी आरक्षण से संबंधित सभी 91 याचिकाओं की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच 15 जुलाई से नियमित सुनवाई करेगी। सुनवाई प्रतिदिन निर्धारित समय पर होगी जिससे वर्षों से लंबित इस विवाद के शीघ्र निराकरण की उम्मीदें बढ़ गई हैं।


ओबीसी वर्ग के प्रदेश भर के हजारों अभ्यार्थियों और उम्मीदवारों की निगाहें अब हाईकोर्ट में होने वाली नियमिति सुनवाई पर लगी हैं। इसी सुनवाई से 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण कानूनी विवाद का अब अंतिम रूप से निराकरण हो जाएगा। यह संभावना व्यक्त की जा रही है।
Author: Jai Lok






