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कहीं दावेदारों की साजिश का शिकार तो नहीं बन रहे मुख्यमंत्री डॉ यादव!

मंत्रिमंडल विस्तार के पूर्व समय की नजाकत देखकर किया गया आरोपों का धमाका
भोपाल/जबलपुर (जयलोक)। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनके परिवार की संपत्ति आड़ को लेकर खड़ा हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। संपत्ति की बढ़ोतरी को लेकर जो आरोप प्रत्यारोप लगाए गए हैं वह अपनी जगह है। लेकिन इस बात की चर्चा भी अब खड़ी हो गई है कि आखिर अचानक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को लक्ष्य बनाकर यह राजनीतिक बवाल क्यों,किसकी मंशा पर खड़ा किया गया। चर्चा सर्वाधिक इस बात की है कि डॉ मोहन यादव आखिर मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की साजिश का शिकार तो नहीं हो गए हैं। लगातार कुछ समय से मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें चल रही थी। आए दिन इस बात की खबरें प्रचारित हो जाती थी कि कुछ दिनों के अंदर मंत्रिमंडल का विस्तार होना है। कुछ मंत्रियों को बाहर किया जाना है। कुछ नए चेहरों को शामिल किया जाना है। इसी बीच कुछ समय पूर्व एक राजनीतिक बड़ा घटनाक्रम हुआ जिसमें संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी और मुख्यमंत्री को प्रदेश में कार्य कर रहे विभिन्न मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के लिए कहां गया। किसी रिपोर्ट कार्ड और उनके कार्यों की समीक्षा के आधार पर जो रिपोर्ट तैयार होनी थी उसी को आधार बनाकर मंत्रिमंडल के विस्तार से संबंधित निर्णय लिए जाने की बात कही गई थी।
इसके कुछ दिनों बाद ही अचानक प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। मुख्यमंत्री को निशाना बनाते हुए उनके मंत्री आगे चलकर मुख्यमंत्री बनने तक के सपने देखने लगे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान उनकी और उनके परिजनों की संपत्ति में हुए इजाफा के आंकड़े बाहर आ गए और करोड़ों की अतिरिक्त कमाई, पूर्व निर्धारित मास्टर प्लान शहरी क्षेत्र के आसपास माटी मोल जमीन खरीदी के आरोप चर्चाओं में आ गए। हालांकि सत्ता पक्ष के सभी मंत्री और संगठन के लोग मुख्यमंत्री पर लगे इन आरोपों को निराधार बताते हुए मैदान में उतरे और अपने अपने तर्कों के माध्यम से बचाव में बयान जारी किए। यह पूरा कार्य पार्टी लाइन के आधार पर किया गया।
इसी बीच खबर आई की मुख्यमंत्री मोहन यादव को दिल्ली तलब किया गया। उसके पीछे भी चर्चाएं दो प्रकार की थीं कि एक जो आरोप लगे हैं उनसे संबंधित सवाल जवाब और सत्यता जानने के लिए उन्हें बुलाया गया है। दूसरा इस बात की भी चर्चा अधिक थी कि डॉक्टर मोहन यादव पर लगाए गए आरोपी को लेकर हो रही राजनीति और विपक्ष की रणनीति के तहत किए गए हमले का जवाब देने का खाका तैयार किया जाए और उसके अनुरूप आगे की रणनीति बनाई जाए।
निर्णय किस बात पर हुआ है यह आने वाले समय में पता चल सकेगा। आगे की रणनीति और संपादित होने वाली कार्यवाही भी स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल मध्य प्रदेश में सत्ता पक्ष के अंदर मची उठा पटक विभिन्न बिंदुओं से जोडक़र देखा जा रहा है।एक खेमे में चर्चा इस बात की है कि डॉ मोहन यादव के संबंध में विगत दिनों जो भी घटनाक्रम हुए हैं वह दिल्ली से बैठे कुछ लोगों की मंशा के अनुसार हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा बहुत लंबे समय से लिखी जा रही थी। आरोपों की गोली चलाने वाले हाथ किसी और के हैं, कंधा किसी और का है, बंदूक किसी और की है, और इस पूरे घटनाक्रम का निर्देशन करने वाले कोई और है। उद्देश्य सबके अपने स्वार्थ के हो सकते हैं, लेकिन चर्चा इस बात की है की सबसे अधिक प्रबल स्वार्थ किसका माना जाए ।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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