Download Our App

Home » Uncategorized » कहो तो कह दूँ : ऐसा न हो कि ‘कुलियों’ से गुजरने में भी ‘फास्टैग’ लगने लगे

कहो तो कह दूँ : ऐसा न हो कि ‘कुलियों’ से गुजरने में भी ‘फास्टैग’ लगने लगे

चैतन्य भट्ट
(जय लोक)। इस समय सारी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला शब्द है : ‘होर्मुज’ तेल भंडारों के दम पर दौलत के बादशाह बने खाड़ी देशों को अरब सागर और फिर हिंद महासागर से जोडऩे वाला एक संकरा समुद्री मार्ग जिससे दुनिया का तीस प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोलियम व्यवसाय और अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।

अंग्रेजी में स्ट्रेट कहे जाने वाले इस संकरे समुद्री मार्ग का हिंदी नाम कठिन सा है ‘जलडमरूमध्य’ जितनी जीभ तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण नहीं ऐंठती उतनी तो इसके उच्चारण में ऐंठ जाती है। गली मोहल्लों की भाषा में इसके लिए एक बेहद सस्ता सुंदर और टिकाऊ शब्द है ‘कुलिया’ कुलीन अंग्रेजीदानों और कालोनी वासियों को शायद ये शब्द अशोभनीय लगे मगर जो गली मोहल्लों में रहे हैं वे कुलिया का क्या माहात्म्य होता है जानते है। कैसे यह संकरा सा जमीन का टुकड़ा कई सौ मीटर की दूरी को चंद मीटर में बदल देता है।

होर्मूज नामी इस ‘समुद्री कुलिया’ बनाम जलडमरूमध्य ने इन दिनों पूरी दुनिया की डमरू बजा रखी है। परमाणु निशस्त्रीकरण के नाम पर ईरान के खिलाफ जंग छेडऩे वाले वैश्विक थानेदार अमेरिका का एकमात्र उद्देश्य अब इस संकरे रास्ते को खोलने तक सिमट कर रह गया है और ईरान है कि मानता नहीं। टोल टैक्स लगाकर पैसा कमाने का नया रास्ता जो मिल गया है और इन दोनों के झगड़ों के चलते हाथियों की लड़ाई में घास की तर्ज पर सारी दुनिया पिस रही है। अमेरिका लाबी को शायद अच्छा न लगे मगर ईरान ने युद्ध को लंबा खींचकर अपने आपको छोटा-मोटा हाथी तो साबित कर ही दिया है।

इस समस्या ने नए रास्ते भी खोल दिए हैं। समुद्री जलमार्ग होर्मुज जैसी कुलियों से भरे पड़े हैं। मलक्का, जिब्राल्टर, बेरिंग, बाब अल मंडेब, डोवर , सुंडा ऐसी ही अन्य समुद्री कुलियाएं हैं जिनसे गुजरकर जहाज करोड़ों का ईंधन और समय बचाते हैं। अब ईरान की तर्ज पर अन्य देश भी अपने आस-पास की कुलियाओं से माल बटोरने के चक्कर में लग गए हैं।
अपन को तो डर इस बात का है कि कहीं टोल कमाने के लिए कुलियों पर कब्जे की यह बीमारी शहर के मोहल्लों के स्तर तक न फैल जाए वरना वह दिन दूर नहीं जब शार्टकट यानी कुलियों के रास्ते एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले में जाने के लिए भी ‘फास्टैग’ जरूरी हो जाएगा।

हंसे तो हंसे कैसे
लो भैया घूमफिर कर फिर ‘विश्व हास्य दिवस’ आ गया अखबारों में इस दिवस पर डाक्टरों के बड़े-बड़े आर्टिकल छपे जिनमें ये बताया गया कि जीवन में हंसना कितना जरूरी है यदि इंसान हंसता रहेगा तो न केवल स्वस्थ रहेगा, बल्कि उसका मोटापा दूर होगा, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और एक शानदार जीवन जिएगा। हंसने से कई हार्मोन विकसित होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं अब इन चिकित्सकों ने तो बता दिया कि हंसना बहुत जरूरी है लेकिन आज की तारीख में लोग हंसे तो हंसे कैसे? हंसते हुए बाजार जाते हैं और जब चीजों के दाम देखते हैं तो सारी हंसी रफू चक्कर हो जाती है आंखों से आंसुओं की धार लग जाती है। पेट्रोल पंप जाते हैं तो खबर मिलती है कि बस दाम बढऩे ही वाले हैं, गैस का संकट हंसी पर भारी पड़ रहा है उधर अमेरिका और ईरान एक दूसरे की लाई लूटे पड़े हैं और इधर पूरी दुनिया की हंसी आंसू में तब्दील होती जा रही है। चुनाव लड़ते वक्त नेता जो वादे करते हैं उससे हर वोटर का चेहरा हंसी से प्रफुल्लित हो जाता है लेकिन जैसे ही नेताजी चुनाव जीतते हैं वोटरों की हंसी न जाने कहां गायब हो जाती है। घर से हंसते हुए निकलकर व्यक्ति अपने ऑफिस दुकान तक पहुंचने की खुशी महसूस करता है लेकिन तपती धूप में जब उसे एक-एक घंटे जाम में फंसा रहना पड़ता है तो उसकी सारी हंसी गायब हो जाती है। चारों तरफ मारा मारी मची हुई है ऐसे में इंसान हंसे तो हंस कैसे? शायद यही कारण है कि हर शहर में ‘लाफ्टर क्लब’ खुल गए हैं जहां 10-20 लोग इक_े होकर नकली हंसी-हंसते हैं वे सोचते हैं कि शायद इस हंसी से उनका स्वास्थ्य ठीक हो जाएगा लेकिन उनको नहीं मालूम कि नकली माल तो नकली ही होता है असली हंसी तो भीतर से निकलती है जो अब नामुमकिन सी हो गई है।
देसी तोता पर पाबंदी
एक खबर आई है जिसमें बताया गया है कि अब घरों में जो तोता पाले जाते थे वो गैर कानूनी हो जाएंगे लेकिन यह शर्त सिर्फ  देसी तोता पर लागू है यदि आप में दम है, पैसे हैं तो आप विदेशी तोता ले आएं और छाती ठोक कर पालें  लेकिन खबरदार जो देसी तोता पाला। एक जमाना था जब लगभग हर चौथे पांचवें घर में एक छोटे से पिंजरे में तोता हुआ करता था तोता बड़ी जल्दी भाषा सीख जाता है कोई मेहमान जब आता था तो तोते का मालिक उसे  ‘आपका स्वागत है’ सिखा देता था और जब वह तोता उस मेहमान को देखता था तो अपनी आवाज से आपका स्वागत है कह देता था, कोई जय श्री राम सिखा देता था तो कोई सीटी बजाना। पिंजरे से उसको आजाद भी कर दो तो भागने की कोशिश नहीं करता था घर में ही चक्कर लगाता रहता था और थकहार कर खुद-ब-खुद अपने पिंजरे में समा जाता था। पहले लोग अपने घरों के कुओं में कछुआ पाल लेते थे जो बैक्टीरिया खत्म कर देता था लेकिन सरकार ने उस पर भी बैन लगा दिया, पहले सपेरे सांप पालते थे उनसे उनकी रोजी-रोटी चलती थी लेकिन सरकार को यह भी सहन नहीं हुआ तो उस पर भी प्रतिबंध लग गया। बेचारे सपेरे नाग पंचमी तक में लोगों को सांप के दर्शन नहीं करवा पा रहे हैं छुप-छुपकर एकाध सपेरा सांप के दर्शन करवा देता है लेकिन उस पर भी उसको डर लगता है कि कहीं पुलिस उसको गिरफ्तार न कर ले अभी घोड़े पर, कुत्तों पर प्रतिबंध नहीं लगा है इसलिए उनको पाला जा रहा है। घोड़ा दूल्हे के लिए जरूरी है और कुत्ता घर की रखवाली के लिए, शायद यही कारण है कि इन दोनों को पालने पर अभी रोक नहीं है लेकिन पता चला है कि इन पर भी रोक लगाने के बारे में सरकार विचार विमर्श कर रही है  अपने को लगता है कि वो दिन दूर नहीं जब इंसान कुत्ता, बिल्ली, कबूतर, घोड़ा, गधा, बंदर देखने के लिए भी मोहताज हो जाएगा।
सुपरहिट ऑफ  द वीक
‘यदि तुम्हारी बजाय मेरी शादी किसी राक्षस से हो जाती तो मैं ज्यादा सुखी रहती’ श्रीमती जी ने श्रीमान जी से गुस्से में कहा
‘पगली हो तुम खून के रिश्ते में भी कभी शादी होती है क्या?’ श्रीमान जी ने जवाब दिया।

जेडीए अध्यक्ष बनने पर संदीप जैन को कांग्रेसियों से मिल रही बधाइयाँ चर्चा में, समरसता के आयोजनों के जनक संदीप जैन को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मिल रहा समर्थन

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » Uncategorized » कहो तो कह दूँ : ऐसा न हो कि ‘कुलियों’ से गुजरने में भी ‘फास्टैग’ लगने लगे

Top Headlines

‘ऑडिटरों का ऑडिट’ क्या भगवान करेगा?

(जयलोक)।। मध्यप्रदेश शासन की ट्रेजरी में ‘इफमिस यानी इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इन्फॉर्मशन सिस्टम’ के जरिए 600 करोड़ का घोटाला पकड़ा

Live Cricket

error: Content is protected !!