
भोपाल (जयलोक)। देश की राजनीति में सोशल मीडिया आधारित अभियानों का असर लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच अचानक उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मप्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। देश के न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से सक्रिय हुई इस डिजिटल मुहिम ने महज आठ-दस दिनों में करोड़ों फॉलोअर्स जुटाने का दावा किया, जिसके बाद प्रदेश के दोनों बड़े राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस ने भी इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।
हालांकि भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिलहाल इसे केवल सोशल मीडिया का ट्रेंड मान रहे हैं, लेकिन उनके बयान यह संकेत दे रहे हैं कि वे इस उभरती डिजिटल राजनीति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रदेश में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रशिक्षण शिविरों और सार्वजनिक सभाओं में भी अब कॉकरोच जनता पार्टी का जिक्र होने लगा है। खासकर युवाओं के बीच इसकी चर्चा तेजी से बढ़ी है। बंगलादेश, श्रीलंका और नेपाल में जेन जी का सत्ता-पलट जलजला देख चुके राजनीति दिग्गज भले ही कॉकरोच जनता पार्टी को उतना गंभीर नहीं मान रहे। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में सोशल मीडिया आधारित युवा आंदोलनों ने सत्ता परिवर्तन तक की स्थिति पैदा की थी। इसी वजह से भारतीय राजनीति में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उभर रहे नए समूहों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा रहा।
राजनीति में नजर आने लगा कॉकरोच का असर
इसे अभी भी मात्र सोशल मीडिया पर चल रही गतिविधि ही माना जा रहा है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में कॉकरोच का असर नजर आने लगा है। खासकर नेताओं के भाषण बिना कॉकरोच के पूरे नहीं हो रहे। शिवपुरी में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से जब इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया और वास्तविक राजनीति के अंतर को रेखांकित किया। सिंधिया ने कहा कि किसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज होना सामान्य बात है, लेकिन भाजपा का फोकस केवल विकास और जनता की सेवा पर है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी किसी डिजिटल ट्रेंड से विचलित होने वाली नहीं है। वहीं हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होना और जमीनी राजनीति में प्रभाव पैदा करना दो अलग-अलग बातें हैं।
Author: Jai Lok






