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कोल माइंस कारोबारी बने बैंक डकैतों को पकडऩे करीब 1 साल से बिहार में था जबलपुर पुलिस का डेरा

बिहार के गया, झारखंड के धनबाद और आसपास के जिलों में छुपता फिर रहा था मुख्य आरोपी पासवान, परिवार वालों को दिलाया ट्रक और लक्जरी वाहन

परितोष वर्मा

जबलपुर (जय लोक)। जिन लोगों ने फिल्म अभिनेता अरशद वारसी की फिल्म ‘सहर’ देखी है वह इस बात का सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि सिहोरा के खितौला बैंक डकैती के किसी आरोपी को पकडऩे के लिए जबलपुर पुलिस द्वारा 11 महीने और 15 दिन यानी करीब 1 साल तक लगातार उसका पीछा करना और अंतत उसे दबोचना आसान काम नहीं था। निश्चित रूप से यह जबलपुर पुलिस के खाते में बड़ी सफलता दर्ज हुई है। 11 अगस्त 2025 को खितौला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में हुई 14 किलो 800 ग्राम सोने और ?5 लाख नगद की डकैती कांड के मुख्य सरगना को पुलिस ने 340 दिन मतलब 11 महीने 15 दिनों की निरंतर कोशिशों के बाद आखिरकार बिहार के गया जिले से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस पूरे अभियान में जबलपुर पुलिस को बिहार एसटीएफ का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ और इसी बेहतर तालमेल के कारण एक खतरनाक और कुख्यात बैंक डकैत आज सलाखों के पीछे पहुंचा है।

सुनील पासवान को पकडऩे के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने घटना के बाद से ही क्राइम ब्रांच और थाने स्तर पर चयनित किए गए कुछ खास लोगों की एक टीम गठित कर दी थी जो लगातार बैंक डकैती के मुख्य आरोपी को पकडऩे में लगी हुई थी।

बेहद शातिर है सुनील पासवान

लगभग 1 साल से पुलिस इस बैंक डकैती के मास्टरमाइंड सुनील पासवान के पीछे लगी हुई थी। उक्त आरोपी को पकडऩे के लिए जबलपुर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनाई गई टीमों में से एक न एक टीम इस आरोपी के पीछे बिहार में डेरा जमाये हुई थी। कभी यह टीम बिहार के गया जिले में छापेमारी करती तो कभी झारखंड के धनबाद,चारघाट,हजारीबाग आदि क्षेत्रों में डकैत की लोकेशन के आधार पर दबिश दे रही थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार जिस दिन आरोपी सुनील पासवान पकड़ा गया उस दिन भी 2 घंटे बाद वह अपनी जगह और सिम दोनों बदलने वाला था लेकिन इससे पूर्व ही पुलिस ने उसे अर्धनग्न स्थिति में गिरफ्तार किया। एसटीएफ पुलिस बिहार ने जबलपुर से गई पुलिस टीमों को सहयोग प्रदान किया।

नक्सली प्रभावित  क्षेत्र में छिपता था

आरोपी सुनील पासवान पुलिस से बचने के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपना ठिकाना बनाता था। यहां से भी कुछ समय में वह अपनी जगह बदल देता था। पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के निर्देश में एएसपी जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित की गई क्राइम ब्रांच की टीम लगातार आरोपी पर नजर रखी हुई थी और यह आरोपी  तेलिया गांव के बांके बाजार के क्षेत्र में छिपा हुआ था।
आरोपी ने लूटे गए सोने में से अपने हिस्से में आए लूट के माल में से कुछ सोना 45 लाख रुपए में बेच दिया था। जिस व्यक्ति चंचल पासवान ने उक्त सोना खरीदा था उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चंचल ने उक्त सोना मनोज सोनी के पास रखा था जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया।

छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश में कर चुका है बैंक डकैती

आरोपी सुनील पासवान कुख्यात बैंक लुटेरा है। आरोपी ने न केवल मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बल्कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में भी 19 सितंबर 2023 को एक्सिस बैंक में करीब 5. 50 करोड रुपए की लूट की थी जिसमें लगभग पौने दो करोड रुपए का सोना शामिल था। इसके अलावा आरोपी ने बिहार और झारखंड में भी बैंक डकैतियां की हैं और फायरिंग की घटना में भी शामिल रहा है। कुछ मामलों में यह अभी तक फरार था पुलिस अब इसकी गिरफ्तार की जानकारी अन्य वारदात वाले थाना क्षेत्र से भी साझा करेगी।

कल तक 12 लोग हो चुके हैं गिरफ्तार

जबलपुर में हुई इस बैंक डकैती के मामले में अब तक कुल 12 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सुनील पासवान को इनमें पूरे घटनाक्रम का सरगना बताया जा रहा है। वहीं इसके अलावा बिहार के जहांगीर, असलम, हरिप्रसाद सोनी, रविकांत पासवान, इंद्रजीत दास, बच्चू पासवान, राजेश दास शामिल हैं । वहीं समीपी जिले दमोह का रहने वाला विकास उर्फ विक्की, जबलपुर के पाटन का रहने वाला बाबू उर्फ बल्लू हेमराज सिंह, सोनू बर्मन, रईस लोधी को गिरफ्तार किया जा चुका है।

उड़ीसा की जेल में बनी थी  बैंक डकैती की योजना

बैंक डकैती की घटना के तीन-चार दिन बाद ही पुलिस ने चार आरोपियों को दमोह के पास से पकड़ा था। इनमें से एक आरोपी रहीस सिंह घटना के कुछ महीने पहले ही उड़ीसा की एक जेल से छूट कर जमानत पर आया था। उसी ने इस योजना को जन्म दिया था और किसी का शक ना हो इसलिए बिहार से बदमाशों को इस घटना को अंजाम देने के लिए शामिल किया गया था। बैंक डकैती की इस घटना में हेमराज उर्फ बबलू विकास और सोनू भी सहयोगी बने थे।
ईसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक एक भारतीय लघु वित्त बैंक गैर सरकारी कंपनी है जो बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों को बैंकिंग सेवाएं और छोटे ऋण उपलब्ध कराती है। इसकी स्थापना 2017 में हुई थी यह एक सार्वजनिक कंपनी है। बैंक की तरफ से यह बड़ी चूक सामने आई थी कि इस बैंक में इतनी अधिक राशि और सोना होने के बावजूद भी यहां सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था इसलिए लुटेरों को घटना को अंजाम देने में और आसानी हुई।

3 किलो 700 ग्राम सोना  हो चुका है बरामद

बैंक डकैती को अंजाम देने वाले सभी 12 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इनके कब्जे से पुलिस साढे तीन  किलो से अधिक सोना बरामद कर चुकी है। लूटा गया सोना 14 किलो 800 ग्राम था बाकी का सोना इन लुटेरों ने कहां बेचा है या कहां छुपाया है इस बारे में पुलिस आगे की जांच कर रही है।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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