
जबलपुर (जय लोक)।

प्रशासन की नीतियों और प्रशासन के हित के परिपालन में कम रुचि दिखाकर ठेकेदारों की मंशा पर पीछे-पीछे दुम हिलाकर काम करने की शैली के लिए बदनाम हो चुका जबलपुर का आबकारी विभाग एक बार फिर बदनामी की सुर्खियों से घिरता जा रहा है। कल रात अधारताल मुख्य मार्ग पर स्थित बिनको बार शराब दुकान का कब्जा नए शराब ठेकेदार को जबरदस्ती दिलाने के लिए आबकारी विभाग के दर्जनों लोगों ने गुंडागर्दी का ऐसा प्रदर्शन किया जैसे ठेकेदार के हित में ज्यादा काम कर रहे हो। नियम विरुद्ध तरीके से किया जा रहे इस कार्य का विरोध करने क्षेत्रीय विधायक लखन घनघोरिया को मौके पर पहुँचकर मामले में मध्यस्थता करनी पड़ी। नियम कानून को समझते हुए उन्होंने आबकारी विभाग के अधिकारियों को नियम सम्मत कार्य करने की नसीहत दी। इसके बाद बड़े अधिकारियों ने दुकान को सील करवाया और उसमें रखे माल को गिनती करने के लिए गोदाम में रखवाया

आज भी आबकारी विभाग की हरकतों के कारण आम जनता का विरोध सडक़ों पर फूट पड़ा। चौधरी मोहल्ले के सामने दुर्गा जी के मंदिर के बाजू में शराब दूकान का बोर्ड दो तीन दिन पहले लगा दिया गया था, आज वहाँ पर व्यापार प्रारंभ किया गया। इसकी खबर लगते ही बड़ी संख्या में महिलाएँ और पुरुष इसका विरोध करने सडक़ों पर उतर आए और शराब दुकान के सामने जमकर प्रदर्शन किया। सूचना मिलने पर पुलिस बल और आबकारी के लोग मौके पर पहुंच गए। इसके पूर्व में भी यहाँ पर शराब दुकान खोली गई थी जिसके साथ ही अवैध रूप से अहाता भी संचालित किया जाता था और मास मुर्गे की दुकान भी खोल दी गई थी। लोगों ने जब इसका तीव्र विरोध किया था तब दुकान को गोहलपुर नाले के पास स्थानांतरित कर दिया गया था। शराब ठेकेदार ने एक बार फिर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए अपनी मनमानी करने का प्रयास किया है।

दुकान पर जबरदस्ती कब्जा दिलवाने का कल का घटनाक्रम तीन चार घंटे तक चला। सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष उक्त दुकान का ठेका शराब ठेकेदार शिवम् पहाडिय़ा को मिला था इस वर्ष की नीलामी में अब तो दुकान शराब ठेकेदार अरुण प्रताप बब्बा ठाकुर समूह के पास चली गई। बताया जाता है कि दुकान पूर्व के ठेकदार की निजी संपत्ति है और इसको वे नए ठेकदार को देना नहीं चाहते है। इस विवाद पर कल घंटों कहा सुनी का दौर विधायक लखन घनघोरिया की मौजूदगी आबकारी और शराब व्यापारियों के बीच चलता रहा और आबकारी विभाग की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह उठते रहे।
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Author: Jai Lok







