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खत्म हुआ हाईकोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश, कल से फिर सुनाई देगी वकीलों की आवाजें

जबलपुर (जयलोक)।हाईकोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश एक माह बात कल शनिवार को खत्म हो गया है। जिसके बाद कल से अब हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलुपर सहित इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में सामान्य रूप से अदालती कार्य शुरू हो जाएगा।
कल से नव नियुक्त एक्टिंग चीफ  जस्टिस विवेक रूसिया के नेतृत्व में सभी नियमित बेंचें मुकदमों की सुनवाई करेंगी। बीते 16 मई से 14 जून तक चले अवकाश के दौरान केवल बेहद जरूरी मामलों की हुई सुनवाई की जा रही थी। लेकिन अब अब छुट्टियां खत्म होने के बाद लंबित प्रकरणों पर रोजाना सुनवाई होगी। हालांकि इस बार अवकाश के दिनों में भी विशेष व्यवस्था के तहत सुनवाई हुई ताकि जरूरी मामलों का जल्द निपटारा किया जा सके और कोर्ट पर काम का बोझ थोड़ा कम हो सके।

हफ्ते में तीन दिन हुई सुनवाई

हाईकोर्ट में इस साल समर वेकेशन के दौरान न्यायिक काम को गति देने के लिए पुरानी परंपरा में बदलाव किया गया था। अमूमन छुट्टियों के दिनों में वेकेशन बेंच हफ्ते में सिर्फ  2 दिन यानी सोमवार और गुरुवार को ही बैठती थीं। लेकिन इस बार मुकदमों की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए विशेष बेंचों ने हफ्ते में 3 दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मामलों की सुनवाई की। इस नई व्यवस्था से आपातकालीन मामलों को जल्द सुलझाने में बड़ी मदद मिली।

प्रशासनिक नेतृत्व में परिवर्तन संभव

न्यायिक गलियारों से मिल रहे संकेतों के मुताबिक आने वाले दिनों में हाईकोर्ट के भीतर प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला 27 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनकी सेवानिवृत्ति से पहले ही जिम्मेदारियों में बदलाव की तैयारी है। इसके तहत जबलपुर मुख्यपीठ से जस्टिस विवेक अग्रवाल को इंदौर भेजा जा सकता है या फिर जस्टिस सुबोध अभ्यंकर को इंदौर बेंच का नया प्रशासनिक न्यायाधीश नियुक्त किया जा सकता है।

रिक्त पद और बढ़ जाएंगे

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला के रिटायर होने के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में काम कर रहे जजों की संख्या कम होकर 37 रह जाएगी। वर्तमान में हाईकोर्ट के लिए कुल 53 जजों के पद मंजूर हैं। इस लिहाज से आने वाले दिनों में अदालत में 16 जजों के पद खाली हो जाएंगे। जजों की कमी होने के कारण अदालतों में पहले से लंबित पड़े लाखों मुकदमों के समय पर निपटारे को लेकर प्रशासनिक चुनौतियां और अधिक बढ़ सकती हैं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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