
नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से एक महत्वपूर्ण छह-देशीय कूटनीतिक यात्रा पर रवाना होंगे, जिसमें कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। आज से 10 जुलाई तक चलने वाली उनकी चार खाड़ी देशों की यात्रा ऐसे महत्वपूर्ण समय में हो रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। यह यात्रा भारत के लिए इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के साथ संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का एक बड़ा अवसर है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, जयशंकर अपनी खाड़ी यात्रा के दौरान इन देशों के नेताओं और अपने समकक्षों से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सशक्त बनाना है। इसके साथ ही, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी हित के विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श भी होगा, जिससे भारत की पश्चिम एशिया नीति को नई दिशा मिल सकती है।खाड़ी देशों का दौरा पूरा करने के बाद, विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क के लिए प्रस्थान करेंगे, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। यह कदम वैश्विक शासन में भारत की बढ़ती आकांक्षाओं और भूमिका को दर्शाता है, जहाँ भारत स्थायी सदस्यता के लिए भी प्रयासरत है।
अपनी यात्रा के अंतिम चरण में, जयशंकर 14 और 15 जुलाई को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स जाएंगे। यहाँ वे तीसरी भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की बैठक में भाग लेंगे और अपने यूरोपीय संघ तथा बेल्जियम के समकक्षों के साथ महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे। टीटीसी की शुरुआत 2022 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से की गई थी। यह परिषद भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक तकनीकी सहयोग को गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे दोनों पक्षों को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और साझाकरण में लाभ मिल सके।
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Author: Jai Lok






