
पर्व पर दिख रहा है महँगाई का असर, प्रतिमाएँ भी महँगी
जबलपुर (जयलोक)। हिंदू पर्व के मुख्य त्यौहारों में शामिल गणेश चतुर्थी को लेकर बाजारों में रौनक लगातार बढ़ती जा रही है। शहरभर में गणेश प्रतिमाओं की बिक्री के लिए बहुत दिनों पहले से दुकानें लग चुकी हैं। मूर्तिकारों के पास दो हजार रूपये से लेकर 15 हजार रूपये तक की कीमत की गणेश प्रतिमाएं मिल रही हैं।
मूर्तिकारों से लेकर समितियों और घरों में भी इसकी जोर शोर से तैयारियाँ की जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में गणेश चतुर्थी की तैयारियों में भव्यता नजर आ रही है। नवरात्र की तरह गणेश चतुर्थी में भी जगह-जगह पंडाल लगाकर भगवान गणेश की स्थापना की जाती है और दस दिनों तक भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सच्चे मन से उनकी आराधना की जाती है। समय के साथ इस धार्मिक कार्यक्रम में भी बदलाव देखने को मिले हैं। जहां शहर में गणेश चतुर्थी पर पंडाल की साज सजावट के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है इसके साथ ही भगवान गणेश की मनमोहक और आकर्षक मूर्ति को विराजमान करने के लिए होड़ सी लगी है।

जनवरी से ही शुरू हुआ प्रतिमा बनाने का कार्य

मूर्तिकारों का कहना है कि गणेश प्रतिमा निर्माण समय पर पूरा करने के लिए कई दिनों पूर्व से ही तैयारियाँ शुरू कर दी गई थीं। जनवरी माह से मूर्तिकार इस कार्य में जुट गए थे। मूर्तिकारों का कहना है कि गणेश प्रतिमा के लिए सिर्फ शहर से ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य जिलों में भी शहर में बनी मूर्ति की मांग रहती है। इस मांग को समय पर पूरा करने का दबाव रहता है इस दबाव को कम करने के लिए जनवरी माह से ही गणेश प्रतिमा बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया था। मूर्तिकारों का कहना है कि एक प्रतिमा को बनाने में 20 से 25 दिनों का समय लग जाता है।
आर्थिक बोझ का भार ग्राहकों की जेबों पर
मूर्तिकारों का कहना है कि प्रतिमा निर्माण में लगने वाली सामग्री के बढ़ते दामों का असर प्रतिमा पर पड़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में गणेश प्रतिमा के दामों में काफी अंतर देखने को मिला है। पहले जहां तीन फुट प्रतिमा दो हजार रूपये में मिलती थी तो वहीं अब 5 से 6 हजार रूपये में मिल रही हैं। निर्माण सामग्री में लगने वाली अतिरिक्त लागत का भार ग्राहकों के वसूल करना मूर्तिकारों की मजबूरी बन गया है।
इको फ्रेंडली प्रतिमाओं की है माँग
व्यापारी मुकेश कुमार से बात करने पर उन्होंने बताया की पिछले सालों में मिट्टी के गणेश की प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है, लेकिन वहीं कुछ ग्राहक मिट्टी की मूर्ति के दाम सुनकर पीओपी की मूर्ति को प्राथमिकता दे रहे हैं। मिट्टी की मूर्ति हैंडमेड होने के कारण पीओपी की तुलना में महंगी मिलती है। वहीं जागरुकता के कारण अब इको फें्रडली प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। घरों से लेकर पंडालों में भी इको फ्रेंडली प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है।





