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Home » जबलपुर » गीता भवन के लोकार्पण के साथ आज संस्कारधानी में होगा वैचारिक क्रांति का शंखनाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज करेंगे नगर निगम के गीता भवन वैचारिक अध्ययन केंद्र’ का शुभांरभ

गीता भवन के लोकार्पण के साथ आज संस्कारधानी में होगा वैचारिक क्रांति का शंखनाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज करेंगे नगर निगम के गीता भवन वैचारिक अध्ययन केंद्र’ का शुभांरभ

गीता भवन और   सरदार पटेल की प्रतिमा की नगर को महापौर ने दिलाई सौगात

परितोष वर्मा
जबलपुर (जयलोक)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा प्रदेश भर में गीता भवनों के निर्माण कराने का संकल्प लिया गया है। मुख्यमंत्री का यह संकल्प एक गीता भवन निर्माण की मात्र योजना नहीं अपितु भारतीय जीवन दर्शन, सनातन संस्कृति और नैतिक मूल्यों को जन जन तक पहुंचाने का दूरदर्शी प्रयास है। मुख्यमंत्री की गहन सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक दृष्टि को दर्शाती है। मुख्यमंत्री की इसी मंशा और सोच के अनुरूप नगर निगम जबलपुर द्वारा शहर में एक आधुनिक सुविधायुक्त गीता भवन, वैचारिक अध्ययन केंद्र को नेताजी सुभाष चंद्र बोस कन्वेशन सेंटर में निर्मित किया गया है। महापौर श्री अन्नू ने कहा कि यह वैचारिक केंद्र धार्मिक, आध्यात्मिक, साहित्य एवं सामाजिक समरसता को साकार करने वाला केंद्र होगा। जहां ज्ञान, अध्ययन विचार मंथन, संवाद और आध्यात्मिक विचारों का समन्वय देखने को मिलेगा। गीता भवन के माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी जबलपुर के मुकुट में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुडऩे जा रहा है। भारतीय जीवन दर्शन, सनातन संस्कृति और नैतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने के ध्येय के साथ, नगर निगम जबलपुर द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस कन्वेंशन सेंटर में विकसित ‘गीता भवन वैचारिक अध्ययन केंद्र’ का भव्य शुभारंभ आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा। जबलपुर की सांस्कृतिक राजधानी में रहने वाले नागरिकों को अत्याधुनिक और सर्वसुविधायुक्त गीता भवन की सौगात आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देंगे।

गीता भवन की अवधारणा

भारतीय दर्शन में ज्ञान को केवल सूचना का संकलन नहीं बल्कि मानव चेतना के परिष्कार का माध्यम माना गया है। इसी शाश्वत दृष्टि से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की प्रेरणा से मध्य प्रदेश सरकार द्वारा परिकल्पित गीता भवन की अवधारणा विकसित की गई है। यह अवधारणा आधुनिक समाज की आवश्यकताओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना तथा समाज में नैतिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता तीनों का समन्वित उत्तर प्रस्तुत करती है। गीता भवन केवल शैक्षणिक या सांस्कृतिक संरचना नहीं है बल्कि यह एक वैचारिक आंदोलन का केंद्र है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को मूल्य आधारित, जीवनोपयोगी और समाजोन्मुखी बनाना है।

 गीता भवन का दृष्टिपत्र

गीता भवन का दृष्टिपत्र एक ऐसे समाज की परिकल्पना करता है जहां शिक्षा संस्कृति और नैतिकता परस्पर पूरक हों। यह दृष्टि पत्र विश्वास पर आधारित है कि भविष्य का भारत केवल तकनीकी रूप से नहीं बल्कि नैतिक रूप से भी सशक्त होना चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण और प्रसार, युवाओं में आत्मानुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास संवाद चिंतन और विवेक आधारित समाज की स्थापना, गीता भवन का दृष्टिपत्र व्यक्ति से समाज और समाज से आज तक के नैतिक उत्थान की परिकल्पना करता है। गीता का यह श्लोक इस दृष्टि पत्र को और स्पष्ट करता है ‘स्वधर्मे निधनं श्रेय: परमधर्मो भयावह:’
‘केवल भवन नहीं, एक वैचारिक अध्ययन’ का केन्द्र है गीता भवन
नगर निगम द्वारा स्थापित यह केंद्र मात्र एक भवन की संरचना नहीं, बल्कि एक जीवंत वैचारिक अध्ययन का केंद्र है। इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक चेतना के माध्यम से सामाजिक समरसता स्थापित करना है। इस गीता भवन से आधुनिकता और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के इस अनूठे संगम में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुडऩे का अवसर मिलेगा।

अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है नगर निगम का गीता भवन

गीता भवन वैचारिक अध्ययन केंद्र को नगर निगम जबलपुर द्वारा उत्तम और उच्च मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जहाँ अध्ययन और विमशज़् के लिए व्यापक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

सर्व सुविधायुक्त वाचनालय

नगर निगम द्वारा तैयार गीता भवन में एक साथ 300 बच्चों को पढऩे की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सर्वसुविधायुक्त वाचनालय विकसित किया गया है।

गीता भवन में ई लायब्रेरी

गीता भवन में ई-लायब्रेरी भी पृथक से तैयार की गई है। इसमें 25 कम्प्यूटर लगाये गये हैं। ई-लायब्रेरी में भी लायसेंस प्राप्त कर पुस्तकें मंगवाई गई हैं ताकि पाठकों को प्रमाणित अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सके।
5000 से अधिक धार्मिक, ऐतिहासिक, साहित्यिक एवं  सामाजिक पुस्ताकों का संग्रह
गीता भवन वैचारिक अध्ययन केन्द्र में धार्मिक, पौराणिक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने वाली, साहित्यिक, प्रेरणादायी, जीवनियाँ, प्रतियोगी परीक्षाओं आदि की 5000 से ज्यादा पुस्तकें हिन्दी, अंग्रेजी एवं संस्कृत में उपलब्ध हैं।

900 व्यक्तियों की क्षमता का वातानुकूलित ऑडिटोरियम

इस गीता भवन में 900 व्यक्तियों की क्षमता वाला अत्याधुनिक सभागार, जो बड़े सम्मेलनों और संवादों का साक्षी बनेगा। यहॉं पर एक बड़ा मंच और बगल में सर्वसुविधायुक्त ग्रीन रूम और प्रसाधन केन्द्र की भी उत्तम सुविधाएं उपलब्ध है।

सुसज्जित कैफेटेरिया

गीता भवन में एक सुसज्जित कैफेटेरिया निर्मित किया गया है। जहां पर एक साथ एक समय में 100 से अधिक लोग बैठकर चाय, कॉफी का आनंद लेने के साथ-साथ कैफेटेरिया में संधारित पत्र-पत्रिकाए और पुस्तकों का अध्ययन कर सकेगें।

विचार मंथन कक्ष

गीता भवन वैचारिक अध्ययन केन्द्र में महत्वपूर्ण विषयों पर विद्वानों से ऑन लाइन संवाद के साथ बैठकर विचार विमर्श करने की भी सुविधा है।

‘रामायण कक्ष-गीता कक्ष’

पाठकों के लिए अलग से रामायण कक्ष, गीता कक्ष, सर्वधर्म पुस्त कक्ष भी पृथक-पृथक बनाये गये हैं।

रजिस्ट्रेशन कक्ष

रजिस्ट्रेशन के लिए पृथक से रजिस्ट्रेशन कक्ष भी बनाया गया है।

हेल्प डेस्क

गीता भवन में व्यक्तियों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क भी बनाया गया है।

गीता भवन की विशेषताएँ

गीता भवन में प्रतियोगी परीक्षा हेतु अध्ययन सामग्री, साहित्यिक पुस्तकों का संकलन, ई-लायब्रेरी की पृथक व्यवस्था, दैनिक समाचार पत्रों व मासिक पत्रिकाओं की उपलब्धता के साथ साथ सी.सी.टी.व्ही. सर्विलांस, पेयजल, लिफ्ट आदि सुविधा भी उपलब्ध है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की परिकल्पना के अनुरूप नगर निगम जबलपुर की ओर से भाव गीता अध्ययन केंद्र की स्थापना के लिए महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने तथा नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार द्वारा निरंतर प्रयास किए गए हैं। इस उपलब्धि के लिए बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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