
जबलपुर, (जयलोक)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय द्वारा प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ के चुनाव इसी सितम्बर माह में कराने के आदेश पूर्व में ही दिए जा चुके हैं। छात्रसंघ के चुनावों के लिए छात्र संगठन विशेषकर भाजपा समर्थक विद्यार्थी परिषद और कांगे्रस समर्थक भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन दोनों ही छात्र संघ के चुनाव लडऩे की तैयारियाँ कर रहे हैं। अभी छात्रसंघ के चुनाव का कार्यक्रम घोषित नहंी हो सका है।
लेकिन 9 साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रशासनिक कवायद शुरु हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में सितंबर माह में गठन का प्रावधान शामिल करने के बाद 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बना दी है। सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज को इसका संयोजक नियुक्त किया गया है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र कुमार कुररिया, मानसरोवर विश्वविद्यालय भोपाल के कुलगुरु प्रो. ए.एस. यादव, उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल के संचालक प्रो. प्रजेश कुमार अग्रवाल और शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय जबलपुर के प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुवेर्दी सदस्य बने हैं। उच्च शिक्षा संचालनालय के ओएसडी प्रो. दिनेश दुबे इसके सचिव बनाए गए हैं।

तलाशा जाएगा चुनाव का रास्ता
उच्च शिक्षा विभाग ने इस नवगठित दल को परिसरों में चुनावी प्रक्रिया सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह पैनल सभी हितधारकों से विचार-विमर्श करके मौजूदा जमीनी परिस्थितियों का निष्पक्ष आकलन करेगा। इसके साथ ही छात्र प्रतिनिधित्व की पूरी रुपरेखा निर्धारित की जाएगी। वोटिंग की तकनीक, प्रत्याशियों की पात्रता और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के पालन को लेकर भी यह दल अपनी दृष्टि साफ करेगा। विभाग का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्षों बाद शुरु होने वाले इस लोकतांत्रिक कदम से शैक्षणिक कार्य में कोई रुकावट न आए।

पखवाड़े भर में पूरी रिपोर्ट सौंपेगा पैनल
संबंधित समिति को अपनी पूरी अध्ययन रिपोर्ट और ठोस अनुशंसाएं ठीक 15 दिनों के भीतर शासन को प्रेषित करनी हैं। निर्धारित समयावधि में दस्तावेज मिलने के बाद विभाग चुनावी तारीखों और मतदान के तौर-तरीकों की अंतिम घोषणा करेगा। विस्तृत गाइडलाइन जारी होते ही प्रदेश भर के युवाओं को लंबे ठहराव के बाद अपने कैंपस का नेतृत्व चुनने का सीधा अधिकार मिल जाएगा।
संतुलन बनाए रखना जरूरी
कॉलेज परिसरों में नियमित अध्यापन कार्य और परीक्षाओं की गरिमा को बरकरार रखना शासन की पहली प्राथमिकता में शामिल है। लंबे समय बाद राजनीति की सक्रियता लौटने से परिसरों में गुटबाजी, अशांति या किसी प्रकार के विवाद की आशंकाएं भी बनी रहती हैं। इसीलिए पैनल को यह निर्देश दिया गया है कि वह चुनावी आचार संहिता का कड़ा मसौदा तैयार करे। विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा, कक्षाओं की समयबद्धता और कैंपस में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त सुनिश्चित करना इस योजना का बेहद अहम हिस्सा रखा गया है।





