
नई दिल्ली (जयलोक)। गैंगस्टर अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर भारत की जेल से रिहाई की मांग की थी। उसका कहना था कि वह भारत में 25 साल जेल में रह चुका है और पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण के समय भारत ने जो शर्तें मानी थीं, उनके मुताबिक उसकी जेल की अवधि 25 साल से ज्यादा नहीं हो सकती। इसी आधार पर सलेम ने तत्काल रिहाई की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गुरुवार को सलेम की याचिका पर फैसला सुनाया। पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल में दिए आदेश को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने सलेम की तत्काल रिहाई की मांग को ‘समय से पहले’ और ‘गलत आधार पर’ दायर याचिका माना था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आदेश को चुनौती देने वाली सलेम की याचिका को खारिज कर दिया।
क्या प्रत्यर्पण के समय 25 साल की शर्त तय हुई थी?
भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण की शर्तों में अबू सलेम को लेकर दो अहम बातें थीं। पहली, उसे भारत में मौत की सजा नहीं दी जा सकती थी। दूसरी, उसकी जेल की अवधि 25 साल से ज्यादा नहीं हो सकती थी। सलेम ने अपनी रिहाई की मांग के लिए इन्हीं शर्तों को आधार बनाया था और दावा किया था कि 25 साल पूरे होने के बाद उसे जेल से बाहर कर दिया जाना चाहिए।





