
जबलपुर (जयलोक)। विगत दिवस कलेक्ट्रेट में एक मार्मिक दृश्य उभरा था जिसमें एक माँ अपनी दो बेटियों के साथ कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के पैरों पर गिरकर उनके साथ पड़ोसियों द्वारा की गई गुंडागर्दी पर कार्रवाही की गुहार लगाते नजर आईं थीं। इनमें एक लडक़ी नाबालिग दिव्यांग भी थी।

इस मामले को कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह पूरी संजीदगी के साथ गंभीरता से ले रहे हैं। पुलिस से ली गई जानकारी में यह बात सामने आई है कि दोनों पक्षों के बीच में पूर्व से विभिन्न मुद्दों पर कई बार विवाद हुआ है जिस पर 6-7 एफआईआर पहले से दर्ज हैं। सूत्रों के अनुसार मामले में छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया लेकिन जाँच में अन्य बातें भी सामने आईं।

शिकायतकर्ता पूजा दुबे उसके पति रामचरण और दो बेटियों के साथ भगवती बैन और उसके लडक़ों ने मारपीट की थी। तत्कालीन मामला क्रिकेट विवाद से जोड़ा गया।


कलेक्टर श्री सिंह अब यह प्रयास भी कर रहे हैं कि पैरा लीगल वालेंटियर के माध्यम से दोनों परिवारों के बीच मध्यस्थता करवाते हुए इनकी काउंसलिंग की जाए ताकि इनके बीच के विवादित विषयों को जड़ से विराम मिले और पीडि़त परिवार को स्थाई राहत प्राप्त हो।
जबलपुर (जयलोक)। युवा अवस्था में एक 45 वर्षीय व्यक्ति को आये हार्ट अटैक के एक मामले में दो निजी अस्पतालों के द्वारा केस की विषमता को देखते हुए मरीज को नागपुर ले जाने के लिए कह दिया गया। एक निजी अस्पताल ने तो मरीज को नागपुर के निजी अस्पताल में भर्ती करने की जिद्द ही पकड़ ली थी। लेकिन फिर परिजनों ने विचार विमर्श करने के बाद उन्हें अपोलो जबलपुर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। इसके पूर्व मरीज के परिजनों ने बताया कि जब उनके मन में असमंजस की स्थिति थी तो सबसे पहले वह मरीज की रिपोर्ट लेकर अपोलो हॉस्पिटिल के कार्डियक यूनिट में पहुंचे। यहां पर उनकी मुलाकात अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ गुंजन घोड़ेश्वर से हुई। डॉ गुंजन जबलपुर के उन चुनिंदा अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट में शामिल हैं जो की विषम परिस्थितियों वाले हार्ट अटैक के समय एडवांस और क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट में महारत रखते हैं। वे एम्स हॉस्पिटल नागपुर में भी सेवाएं दे चुके हैं और आधुनिक मशीनों के उपयोग से हार्ट अटैक के समय उसके उपचार के बेहतर विकल्पों पर लगातार काम कर रहे हैं। डॉ. गुंजन ने मरीज के परिजनों को बताया कि मरीज का हार्ट वर्तमान में 40 प्रतिशत कार्य कर रहा है। और बीपी-शुगर जैसी समस्याएं भी मरीज को है। मरीज का नाम न उजागर करने के साथ शर्मा परिवार ने बताया कि उनके सामने अब बड़ी चुनौती थी। डॉ गुंजन ने परिवार को यह भी बताया कि एंडोस्कोपी की रिपोर्ट में दो बड़े ब्लॉकेज नजर आ रहे हैं जो 80 से 90 प्रतिशत तक है और यह सामान्य ब्लॉकेज नहीं है बल्कि बड़े ब्लॉकेज हैं। इनके निराकरण का तरीका यही है कि इसमें 24 एमएम की साइज वाले बड़े स्टंट डाले जाएं। इसके लिए अपोलो जबलपुर हॉस्पिटल में वह तकनीक और वह आधुनिक मशीन उपलब्ध है जिसके माध्यम से हार्ट की अल्ट्रासाउंड कर यह पता लगाया जा सकता है कि जो स्टंट डालने हैं वह कितने मोटे होंगे, किस पदार्थ के होंगे, और किस साइज के होंगे। इतनी अधिक बारीक से महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में सक्षम आधुनिक मशीन इस प्रकार के जटिल हार्ट के ऑपरेशन में बहुत कारगर साबित होती है। अभी तक यह पद्धति जबलपुर में विकसित नहीं थी। इसलिए सीधे मरीजों को नागपुर का रास्ता दिखा दिया जाता था।
लेकिन जबलपुर में अपोलो अस्पताल में अब आईलेक्स तकनीक के माध्यम से यह संभव हो रहा है।
नसों के माध्यम से दिल का अल्ट्रा साउंड कर अब जटिल हार्ट के ऑपरेशन को भी सफलतापूर्वक और बिना जीवन के अधिक रिस्क के किया जा सकता है। ऑपरेशन के 2 दिन बाद मरीज को घर जाने की अनुमति भी मिली साथ में उन्हें इस बात का परामर्श भी दिया गया उन्हें आगे अपने स्वस्थ जीवन के लिए क्या-क्या कदम उठाने हैं। यह केवल एक मामला नहीं है बल्कि जबलपुर में बढ़ते चिकित्सा के दायरे और दूसरे शहरों पर आधुनिक इलाज के लिए हमारी निर्भरता को कम होने का मामला भी है।

खर्च में भी कमी
अपोलो में जिस मरीज के हार्ट का ऑपरेशन किया गया उस मरीज के ऑपरेशन के लिए नागपुर के अस्पताल ने ने जो पेकैज दिया था वह 1 लाख रूपए अधिक था परिजनों ने कहा की इस मामले में उन्हें अच्छे इलाज के साथ कम राशि लगी।
Author: Jai Lok






