
चैतन्य भट्ट
(जय लोक)। कहा जाता है कि प्रार्थना में बड़ी ताकत है। आप सच्चे हृदय से जो भी ईश्वर से मांगते हो वही प्राप्त हो जाता है। अखबार के विज्ञापनों में भी कभी कभी दिख जाता है कि कुछ ज्योतिषी और तांत्रिक ‘जो मांगोगे वही मिलेगा’ की गारंटी के साथ जादुई अंगूठियाँ बेच रहे हैं। इन अंगूठियों की गारंटी का तो कोई भरोसा नहीं लेकिन भारत में पैसा खर्च करके कोई भी फर्जी दस्तावेज हासिल करने की पूरी गारंटी है। जमीनों के पट्टे, जाति प्रमाणपत्र, मूल निवासी प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, बीपीएल राशन कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, नियुक्ति पत्र, त्यागपत्र, मार्कशीट, डिग्री, पासपोर्ट जैसे कई तरह के पहचान और योग्यता के दस्तावेज नकली पाये जाने की खबरें आम हो गई हैं।
ऐसे ही फर्जी दस्तावेजों की खबरें आजकल मीडिया की सुर्खियों में हैं। चुनाव आयोग द्वारा फर्जी वोटर कार्ड के सुधार अभियान एसआईआर पर तो भीषण राजनीतिक उठापटक चल ही रही है लेकिन इसके अलावा भी बहुत सी खबरें हैं जहां फर्जी दस्तावेजों के मामले उजागर हुए हैं। ग्वालियर के निकट स्थित डबरा के बौद्ध विहार मठ और भोपाल के अन्नानगर स्थित मठ के पतों से बहुत से फर्जी पासपोर्ट जारी होने का मामला गर्म है। सन्देह है कि एक ही पते का इस्तेमाल करके अवैध रूप से भारत में रह रहे कई बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनाए गए हैं। नीट यूजी में एक छात्र दो राज्यों का मूल निवासी पाया गया है। फर्जी जाति प्रमाणपत्र और फर्जी डिग्री पर बहुत से लोग नौकरी कर रहे हैं और कई तो पूरी नौकरी करके रिटायर हो चुके हैं। जमीनों के फर्जी पट्टों से निकले हजारों मुकदमें अदालतों में चल रहे हैं।
मजेदार बात यह है कि इन दस्तावेजों को पूरी तरह से फर्जी नहीं कहा जा सकता क्योंकि अधिकांश तो अधिकारियों की मु_ी गरम करके बाकायदा सील सिक्के के साथ हासिल किये जाते हैं। प्रसिद्ध उपन्यासकार श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास ‘राग दरबारी’ के लंगड़ की तरह सही आदमी भले ही सरकारी दस्तावेज के लिये कचहरी के चक्कर लगाते रहें लेकिन होशियार लोग नकद नारायण के दम पर जो चाहे हासिल कर लेते हैं क्योंकि सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार पैसों के जरिये सारा फर्जी काम आसान कर देता है। सरकार को भी सब पता है लेकिन उसकी मजबूरी है। नीचे का भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा तो ऊपर पैसा कैसे पहुंचेगा?
इस गड़बड़झाले से निबटने का एक ही तरीका है कि जैसे सरकारी तन्त्र में सारे फर्जी दस्तावेज चल जाते हैं वैसे ही फर्जी नोटों को भी चलाने की परमीशन दे देना चाहिये। ऐसा होने से सभी खुश हो जायेंगे। आदमी घर में ही नोट छापेगा और सरकारी दफ्तरों में जो चाहे काम करवा लेगा। उद्योग धंधों के लिये भी अच्छा है कि एक से एक बढिय़ा नोट छापने की मशीनें बनने और बिकने लगेंगी। बस हमारी वित्त मंत्री को इस बात के लिये तैयार करना ही एक मुश्किल काम है। इस पर विचार करना होगा।
तलाक कम हो गए
लोग बाग जब चाहे तब बढ़ती मंहगाई का रोना रोते रहते है आरोप लगाते हैं कि सरकार महंगाई रोकने में नाकाम हो रही है, लेकिन महंगाई बढऩा भी कई बार बेहद ‘यूजफुल’ हो जाता हैं अब देखो ना एक खबर अखबारों के माध्यम से पता चली कि ब्रिटेन में जब से मंहगाई बढ़ी है तब से तलाक के मामलों में भारी कमी आ गई है और इसके पीछे ये कारण है कि यदि पति पत्नी एक दूसरे को तलाक दे देते हैं तो दोनों को अलग अलग मकान लेना पड़ेगा जिसके हक में बच्चे आ जायेंगे उनके लालन पोषण की जिम्मेदारी उठाना पड़ेगी इसमें भी काफी पैसा लगेगा इसी के चलते अब तलाक लेने वाले दंपत्ति
सोचने लगे हैं कि भले ही एक दूसरे से ना पट रही हो, रोज बहस होती हो, नौबत मारपीट तक पहुंच चुकी हो, उसके बाद भी एक छत के नीचे रहने में ही भलाई है। किसी ने सच ही कहा है कि हर बुराई के पीछे एक सच्चाई छिपी रहती है और इस बात को मंहगाई ने साबित कर दिया है। तलाक से कितने नुकसान होते हैं समाज में भी गलत संदेश जाता है लेकिन इस बढ़ी हुई मंहगाई ने तलाक की बढ़ती संख्या को रोक दिया है। अपना मानना तो ये है कि ब्रिटेन ही क्यों और भी पाश्चात्य सभ्यता वाले देशों में भी मंहगाई और बढऩा चाहिए ताकि उधर होने वाले तलाकों की भी संख्या कम हो जाए क्योंकि यही वो देश हैं जिधर झटपट ब्याह और उससे भी झटपट तलाक हो जाते हैं।
नरोत्तम भैया का क्या होगा
कहते हैं कि जब सितारे गर्दिश में आते हैं तो मान, सम्मान, जलवा, शानो शौकत सब एक झटके में न जाने किधर गायब हो जाते हैं। इसलिए इंसान हमेशा इसी कोशिश में रहता ही कि सब कुछ हो जाए लेकिन जलवे में कमी ना आने पाये। लेकिन सितारे किसी के कहने पर थोड़ी न चलते हैं। एक जमाना था अपने नरोत्तम भैया की पूरी प्रदेश में तूती बोलती थी सारा पुलिस डिपार्टमेंट उनके आगे सर झुकाता था मुख्यमंत्री के बाद यदि किसी की बखत थी तो अपने नरोत्तम भैया ही थे। लेकिन समय ने ऐसा पलटा खाया कि बेचारे चुनाव हार गए फिर उपचुनाव हुआ तो पूरा भरोसा था कि पार्टी उन्हें ही टिकट देगी लेकिन पार्टी ने ऐन वक्त पर झटका दे दिया टिकिट नहीं मिली सो नाराज हो गए अपने समर्थकों से कहकर खूब ऊधम मचवाया, सोचा हाई कमान भपके में आ जायेगा लेकिन भूल गए कि ये बीजेपी है इधर ये सब नाटक नौटंकी नहीं चलती। हुआ ये कि अब पार्टी उन्हें पंजी के लिए भी नहीं पूछ रही और तो और हाल ही में प्रभारियों की बैठक की सूचना तक नहीं दी। अपने को तो बड़ी चिंता है अपने नरोत्तम भैया की कि अब उनका क्या होगा। फिर भी हम उन्हें ढाढ़स बंधाते हुए यही कह रहे हैं कि भैया जी चिंता मत करो जब अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे दिन भी नहीं रहेंगे पर ऊधम मचाने की बजाय धीरज रखो उसी में आपका भला है।
सुपर हिट ऑफ द वीक
श्रीमान और श्रीमती जी रेलवे स्टेशन पर खड़े ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।
तभी एक गाड़ी आई जिस पर लिखा था…
‘बॉम्बे मेल’ श्रीमान जी भाग कर गाड़ी में चढ़ गए और श्रीमती जी से बोले
‘जब बॉम्बे फीमेल’ आये तो तू भी चढ़ जाना।

शिक्षक भर्ती पर राहुल ने सीएम मोहन को लिखा पत्र, कहा एक लाख पद खाली तो इतनी कम भर्ती क्यों?
Author: Jai Lok






