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जबलपुर की फिजाओं में आज भी जीवित हैं विनोद खन्ना की यादें

जबलपुर (जय लोक)।भारतीय हिंदी फिल्म जगत के हैंडसम और दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना का मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से एक बेहद गहरा, आत्मीय और आध्यात्मिक नाता रहा है। लेखक और जानकार विष्णु विनोदिया बताते हैं सुपरस्टार विनोद खन्ना पहले पर्दे के चमकते सितारे का आज जन्मदिन है। जबलपुर शहर संस्कारधानी से जुड़ी उनकी यादें मुख्य रूप से उनके आध्यात्मिक सफर और उनके गुरु आचार्य रजनीश (ओशो) से जुड़ी हुई हैं।
विनोद खन्ना की जबलपुर से जुड़ी प्रमुख यादें और बातें हैं ओशो और संन्यास का सफर जबलपुर से जुड़ाव है। जब विनोद खन्ना अपने करियर के चरम पर थे, तब उनका झुकाव अध्यात्म की ओर हुआ। वे ओशो के विचारों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 1975 में ओशो से संन्यास की दीक्षा ले ली। ओशो के जबलपुर से गहरे नाते के कारण, विनोद खन्ना का नाम भी अक्सर जबलपुर के ओशो प्रेमियों और वहां के इतिहास से जोड़ा जाता है।
करियर का त्याग
ओशो के सानिध्य में जाने के लिए विनोद खन्ना ने 1982 में अपनी चमक-दमक वाली फिल्मी दुनिया को अचानक अलविदा कह दिया था और ओशो के जबलपुर देवताल आश्रम एवं (रजनीशपुरम) चले गए थे, जहाँ उन्होंने कई वर्षों तक एक माली के रूप में भी काम किया। जबलपुर के स्थानीय लोगों की यादें जब विनोद खन्ना ओशो के शिष्य बने, तो वे अक्सर ओशो से जुड़े कार्यक्रमों, ध्यान शिविरों और उनसे मिलने वाले लोगों के संपर्क में रहते थे।
जबलपुर देवताल आश्रम में ओशो आश्रमों और रजनीश (ओशो) के पुराने अनुयायियों के पास आज भी विनोद खन्ना की सादगी से जुड़ी कई यादें हैं। लोग बताते हैं कि एक सुपरस्टार होने के बावजूद, जब वे अध्यात्म से जुड़े, तो उनमें अहंकार का नामोनिशान नहीं था।
राजनीति और संस्कृति मंत्री के रूप में यादें केंद्रीय मंत्री के रूप में दौरा
विनोद खन्ना बाद में राजनीति में आए और भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गुरदासपुर से सांसद बने। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वे केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री भी रहे।
पर्यटन को बढ़ावा
मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों (जैसे भेड़ाघाट, कान्हा किसली) और जबलपुर के आस-पास के क्षेत्रों के विकास को लेकर कई बार योजनाएं बनाईं और राजनीतिक दौरों के सिलसिले में भी वे इस क्षेत्र के संपर्क में रहे। विनोद खन्ना भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी जबलपुर में ओशो, अध्यात्म या 70-80 के दशक के सिनेमा के सुनहरे दौर की बात होती है, तो विनोद खन्ना का नाम बड़े आदर और आत्मीयता से लिया जाता है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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