
श्रेय लूटने की होड़ : नहीं पहुंचे कोई वरिष्ठ नेता, ना ही जैन समाज के वरिष्ठजन : कांग्रेसी ही उठा रहे सवाल
जबलपुर (जयलोक)। शहर में काँग्रेस का कोई माईबाप नहीं है अब ये बात कांग्रेसजनों में ही प्रचलित और चर्चित हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में घटित दो कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद ये सब बातें कांग्रेस खेमे में चर्चा में आई है। सोशल मीडिया पर भी इस बात के सवाल उठाए जा रहे हैं।
जहां नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा अपनी निगम संबंधी जिम्मेदारी छोडक़र नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा के कार्य क्षेत्र में सेंधमारी कर रहे है। संदेश यह जा रहा है कि युवक कांग्रेस को भी नेता प्रतिपक्ष ही चला रहे है। जबकि युवक कांग्रेस के पदाधिकारी अपने आप में सक्षम है। लेकिन श्रेय लूट की होड़ में हर प्रदर्शन अपने नाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
वही कांग्रेस के नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा नगर निगम से जुड़े मुद्दों पर जनता के हित की बात करने और नगर निगम प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का कार्य कर रहे हैं। जो वास्तव में मजबूत नेता प्रतिपक्ष का काम है और यह काम नगर कांग्रेस अध्यक्ष को करना पड़ रहा है।
नगर अध्यक्ष दिन रात मेहनत कर कांग्रेस में एकता और मजबूती लाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि इस प्रकार के प्रयासों में वरिष्ठ और कनिष्ठ कांग्रेसी ही साथ नहीं दे रहे हैं। कांग्रेस में संगठन नाम की व्यवस्था विलुप्त होती जा रही है। संगठन मजबूत नहीं है कोई नियम कानून नहीं है इसलिए जिसे जो समझ में आ रहा है वह कर रहा है। पार्षद का चुनाव जीते व्यक्ति भी संगठन की व्यवस्था और नगर अध्यक्ष को चुनौती देने से पीछे नहीं हट रहे हैं। संगठन मजबूत नहीं है इसलिए अनुशासनात्मक कार्यवाही होने सवाल पूछे जाने का तो सवाल उठाता ही नहीं है।
भविष्य की संभावनाओं को अपने हित में करने के प्रयास में और अपने संभावित प्रतिद्वंदियों को दूसरे पायदान में खड़ा करने की होड़ इसके पीछे मुख्य वजह माना जा रहा है। जिसके कारण कांग्रेस की व्यवस्था और बिगड़ती जा रही है। इसके विरोधाभासी परिणाम जैन समाज के युवाओं पर हुई लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन की जल्दबाजी में नजऱ आये। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष ने बिना कांग्रेस के नगर अध्यक्ष को शामिल किये युवा कांग्रेस के बैनर तले पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करने का कार्य किया। इस प्रदर्शन के दौरान ना तो कांग्रेस का कोई वरिष्ठ नेता नजर आए और ना ही जैन समाज के प्रमुख और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि। इस बात की खुलेआम चर्चा सोशल मीडिया पर भी हुई और सभी का ध्यान आकर्षित हुआ।

अब इस बात से कांग्रेसियों के बीच में दो संदेश गए एक तो नेता प्रतिपक्ष नगर निगम से जुड़े मुद्दे को छोडक़र कांग्रेस के नगर अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र के विषयों पर सेंधमारी कर खुद को कद से ऊपर साबित करने में तुले हुए हैं। दूसरा यह कि क्या नेता प्रतिपक्ष यूथ कांग्रेस को चला रहे हैं क्योंकि इस आंदोनल में यूथ कांग्रेस के पाधिकारियों पर नेता प्रतिपक्ष हावी नजऱ आये और इस प्रदर्शन को नेता प्रतिपक्ष ने अपने खाते में दर्ज करने का पूरा प्रयास किया। यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी स्वयं अपने बैनर तले ऐसे और इससे बड़े आंदोलन करने में सक्षम हैं। लेकिन श्रेय लूटने की नेता प्रतिपक्ष की यह गतिविधि अब कांग्रेस जनों के बीच में चर्चा का बड़ा विषय बनीं हुई है।
नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने युवक कांग्रेस के बैनर तले एसपी कार्यालय में घेराव और प्रदर्शन की घोषणा कर दी। नगर कांग्रेस इसमें शामिल नहीं थी इस बात का प्रमाण नगर कांग्रेस के अध्यक्ष की अनुपस्थित स्वयं देती है। अब सफाई में चाहे जो कुछ कह ले लेकिन चर्चा इस बात की ही है कि पूरा मामला सिर्फ श्रेय की राजनीति और खुद को सर्वपरि सक्षम बताने से जुड़ा है तभी तो जैन समाज से जुड़े वरिष्ठ कांग्रेसियों को भी आगे नहीं आने दिया गया।

नेता प्रतिपक्ष को आईना दिखाने, नलों की पानी की जाँच करने घरों में पहुँचे कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा
दूरी ओर पूरी प्रदेश कांग्रेस दूषित पेय जल से इंदौर में हो चुकी 17 मौतों और सैकड़ों लोगों के प्रभावित होने के मुद्दे को प्रदेश भर में उठाने का काम कर रही हैं। यह मुद्दा सीधे तौर पर नगर निगमों से जुड़ा हुआ हैं। इस मुद्दे पर नपा तुला विरोध करने के बजाए निगम के विपक्षी नेता को खुलकर खामियों को उजागर कर उन्हें दूर करवाने के लिए मैदान में उतारना चाहिए था। लेकिन नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा के बजाए प्रदेश कांग्रेस के इस निर्णय का परिपालन कांग्रेस के नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा करते नजऱ आ रहे हैं।
पेयजल के मामले में जो त्रुटि है उसे सुधार कर ही इस कार्य को सुनिश्चित किया जा सकता है। विगत दिनों सौरभ शर्मा सीधे वार्डों में जाकर कुछ घरों में पानी का सैंपल टेस्ट करते नजऱ आये। इस कार्य को जनता के समक्ष पेय जल की गुणवत्ता की सच्चाई सामने लाने के कार्य के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष को आईना दिखाने का कार्य निरूपित किया जा रहा है। खुद कांग्रेसी नेता भी यह बात कह रहे हैं कि यह कायज़् तो नेता प्रतिपक्ष को करना चाहिए, लेकिन प्रदेश कांग्रेस की कदमताल के साथ नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा ये कार्य कर रहे है। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष के रूप में लाख अडंगो के बाद भी सौरभ शर्मा अपनी सक्रियता बनाये रखने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस में चली आ रही हाथ खींचने के बजाए पैर खींचने की परम्परा का वो भी शिकार माने जाते हैं।
कहने को कुछ भी कहा जाए लेकिन नगर संगठन और इससे जुड़ी अनुशासन की नियमावली को कोई भी मानने तैयार नहीं है। दर्जनों दर्द दिल में रखकर नगर अध्यक्ष कांग्रेस की साख बचाने एकता और संगठन की बात जरूर करते हैं लेकिन संगठन की जगह सब ठन ठन की स्थित बनी हुई है।
कांग्रेस को जनता के बीच जीवित रखने और नगर निगम में मजबूत विपक्ष भूमिका बनाये रखने के लिए नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा वो काम कर रहे हैं जो असल में नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष को करना चाहिए। कांग्रेसजन अब प्रदेश नेतृत्व को भी इन मुद्दों को संज्ञान में लेने की उम्मीद कर रहे हैं। कांग्रेस पार्षदों के मनों में पनप रही टीस उपेक्षा और पीड़ा को समझने प्रदेश कांग्रेस को कम से कम अपने एक-एक पार्षद को व्यक्तिगत फोन कर उनके हाल और मजबूरी से भरी पीड़ा को सुनकर मजबूत विपक्ष के बारे में निर्णय लेना चाहिए ऐसी अपेक्षा भी कांग्रेसजन कर रहे हैं। क्योंकि मनों में बढ़ती जा रही इसी टीस और उपेक्षा की पीड़ा के कारण कांग्रेस के पार्षदों ने मनमाफिक आंदोलनों और प्रदर्शनों से दूरी बना ली है। इसके कई प्रमाण पिछले प्रदर्शनों में देखे जा चुके हैं।
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