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पचमढ़ी में मोहन कैबिनेट की बैठक, 33 करोड़ के विकास कार्यों का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण

भोपाल (जयलोक)। मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक पचमढ़ी के राजभवन में शुरू हो चुकी हैं। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह शामिल नहीं हो रहे हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने के बाद ये लगातार तीसरी कैबिनेट बैठक है, जिसमें शाह नहीं है। सीएम डॉ. मोहन यादव मंगलवार दोपहर को पचमढ़ी पहुंचे। उन्होंने यहां के आम उत्पादक किसानों से मुलाकात की। इसके बाद कैबिनेट बैठक शुरू हो गई है। पचमढ़ी के जागीरदार राजा भभूत सिंह की स्मृति में होने वाली इस बैठक में अंग्रेजों के साथ हुए गोरिल्ला युद्ध और अन्य वीर कथाओं पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भभूत सिंह की स्मृति में प्रतिमा स्थापित करने और उनके नाम पर संस्थानों और पार्कों के नामकरण का निर्णय लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने 33 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।
आधे मंत्री रात में ही पहुँच गए थे पचमढ़ी
कैबिनेट बैठक के लिए मोहन मंत्रिमंडल के आधे मंत्री रात में ही पचमढ़ी पहुंच गए थे। इनमें डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, मंत्री गोविंद राजपूत समेत अन्य मंत्री शामिल हैं। वहीं, कुछ मंत्री आज सुबह पचमढ़ी पहुंचे हैं। लोक निर्माण विभाग मंत्री और नर्मदापुरम के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह सोमवार को दोपहर में ही पचमढ़ी पहुंचकर कैबिनेट बैठक की तैयारियों का जायजा लेकर व्यवस्था दुरुस्त कराते रहे। पचमढ़ी में कैबिनेट की बैठक के साथ मुख्यमंत्री पर्यटन और अन्य विभागों से जुड़े 33.88 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे।
राजा भभूत सिंह का इतिहास वीरता भरा रहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजा भभूत सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के समय महान स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे की मदद की थी। तात्या टोपे के आह्वान पर उन्होंने सतपुड़ा की वादियों में आजादी की मशाल जलाई। राजा भभूत सिंह ने अंग्रेजों की आंख में धूल झोंकते हुए अक्टूबर 1858 के अंतिम सप्ताह में तात्या टोपे के साथ ऋषि शांडिल्य की पौराणिक तपोभूमि सांडिया के पास नर्मदा नदी पार की। सीएम ने कहा- भभूत सिंह और तात्या टोपे ने नर्मदांचल में आजादी के आंदोलन की योजना बनाई। पचमढ़ी में सतपुड़ा की गोद में तात्या टोपे ने अपनी फौज के साथ भभूत सिंह से मिलकर 8 दिन तक पड़ाव डाला और आगे की तैयारी करते रहे। हर्राकोट के जागीरदार भभूत सिंह का जनजातीय समाज पर बहुत अधिक प्रभाव था। उन्होंने जनजातीय समाज को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए तैयार किया। उनके वीरता भरे इतिहास को याद किया जाएगा।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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