
पुलिस लाइन में वर्षों से जमें रहने का कई लोगों ने बना लिया है रिकॉर्ड
जबलपुर (जय लोक)। कुछ दिन पहले ही पुलिस अधीक्षक जबलपुर संपत उपाध्याय के आदेश पर 63 आरक्षक और 42 प्रधान आरक्षकों की तबादला सूची जारी हुई है। अब अगली सूची की बेसब्री से प्रतीक्षा हो रही है। इससे अधिक इस बात की प्रतीक्षा हो रही है कि जो लोग पुलिस लाइन में 10-12 साल से अधिक समय अवधि से जमे हुए हैं क्या उनको भी इस बार थानों में पद स्थापना मिलेगी।

पुलिस लाइन की अपनी अलग दुनिया है यहाँ के विभिन्न विभागों का कार्य भार संभालने का अपना अलग अलग आनंद है। इस ही आनंद से दूरी ना बनाते हुए कई लोगों ने रिकॉर्ड बना लिया है और वे 10-12 सालों से थानों में जाने के बजाय यहीं पर नौकरी पूरी करने जुटें हुए हैं।

अन्य जिलों से आए लोग सीधे क्राइम ब्रांच में
पुलिस विभाग में पदस्थापना को लेकर कितनी उठा पटक और कितनी जुगाड़ बाजी चल रही है एक उदाहरण इस जानकारी से भी सामने आता है। कुछ समय पूर्व अन्य जिलों से ट्रांसफर होकर जबलपुर में अपनी आमद दर्ज कराने वाले लोगों को सीधे क्राइम ब्रांच का हिस्सा बनाया गया। अब बड़ा सवाल यह है कि इन्हें ना तो जबलपुर शहर का अनुभव है ना जबलपुर के अपराधियों और अपराध जगत की गतिविधियों के बारे में उस स्तर की जानकारी है जो क्राइम ब्रांच में होने के लिए आवश्यक होती है।


क्राइम ब्रांच का अर्थ भी यही माना जाता है कि जो अपराध या फिर ऐसे अपराधी जो सामान्य थाने स्तर की पुलिस द्वारा काबू में नहीं आते हैं उन पर लगाम कसने के लिए क्राइम ब्रांच को मैदान में उतरने का जिम्मा दिया जाता है।
बड़ी विडंबना की बात यह भी की है ऐसे कई अनुभवी लोग जिन्हें 10 साल का अच्छा अनुभव है वे लूप लाइन में पड़े हुए हैं। क्राइम ब्रांच में काम करने के लिए नए ऊर्जावान लोगों को इन लोगों के कारण अवसर नहीं मिल पा रहा है। एक उदाहरण जो पिछले दिनों यह भी सामने आया था सीधे एक कर्मी की ड्यूटी क्राइम ब्रांच में लगा दी गई। जबकि उसे थाने की पदस्थापना का भी अनुभव नहीं था। यह सब बातें अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों के संज्ञान में आ चुकी हैं। आगे अब अगली सूची में परिणाम नजर आने की बात कही जा रही है।
जबलपुर (जयलोक)। युवा अवस्था में एक 45 वर्षीय व्यक्ति को आये हार्ट अटैक के एक मामले में दो निजी अस्पतालों के द्वारा केस की विषमता को देखते हुए मरीज को नागपुर ले जाने के लिए कह दिया गया। एक निजी अस्पताल ने तो मरीज को नागपुर के निजी अस्पताल में भर्ती करने की जिद्द ही पकड़ ली थी। लेकिन फिर परिजनों ने विचार विमर्श करने के बाद उन्हें अपोलो जबलपुर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। इसके पूर्व मरीज के परिजनों ने बताया कि जब उनके मन में असमंजस की स्थिति थी तो सबसे पहले वह मरीज की रिपोर्ट लेकर अपोलो हॉस्पिटिल के कार्डियक यूनिट में पहुंचे। यहां पर उनकी मुलाकात अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ गुंजन घोड़ेश्वर से हुई। डॉ गुंजन जबलपुर के उन चुनिंदा अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट में शामिल हैं जो की विषम परिस्थितियों वाले हार्ट अटैक के समय एडवांस और क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट में महारत रखते हैं। वे एम्स हॉस्पिटल नागपुर में भी सेवाएं दे चुके हैं और आधुनिक मशीनों के उपयोग से हार्ट अटैक के समय उसके उपचार के बेहतर विकल्पों पर लगातार काम कर रहे हैं। डॉ. गुंजन ने मरीज के परिजनों को बताया कि मरीज का हार्ट वर्तमान में 40 प्रतिशत कार्य कर रहा है। और बीपी-शुगर जैसी समस्याएं भी मरीज को है। मरीज का नाम न उजागर करने के साथ शर्मा परिवार ने बताया कि उनके सामने अब बड़ी चुनौती थी। डॉ गुंजन ने परिवार को यह भी बताया कि एंडोस्कोपी की रिपोर्ट में दो बड़े ब्लॉकेज नजर आ रहे हैं जो 80 से 90 प्रतिशत तक है और यह सामान्य ब्लॉकेज नहीं है बल्कि बड़े ब्लॉकेज हैं। इनके निराकरण का तरीका यही है कि इसमें 24 एमएम की साइज वाले बड़े स्टंट डाले जाएं। इसके लिए अपोलो जबलपुर हॉस्पिटल में वह तकनीक और वह आधुनिक मशीन उपलब्ध है जिसके माध्यम से हार्ट की अल्ट्रासाउंड कर यह पता लगाया जा सकता है कि जो स्टंट डालने हैं वह कितने मोटे होंगे, किस पदार्थ के होंगे, और किस साइज के होंगे। इतनी अधिक बारीक से महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में सक्षम आधुनिक मशीन इस प्रकार के जटिल हार्ट के ऑपरेशन में बहुत कारगर साबित होती है। अभी तक यह पद्धति जबलपुर में विकसित नहीं थी। इसलिए सीधे मरीजों को नागपुर का रास्ता दिखा दिया जाता था।
लेकिन जबलपुर में अपोलो अस्पताल में अब आईलेक्स तकनीक के माध्यम से यह संभव हो रहा है।
नसों के माध्यम से दिल का अल्ट्रा साउंड कर अब जटिल हार्ट के ऑपरेशन को भी सफलतापूर्वक और बिना जीवन के अधिक रिस्क के किया जा सकता है। ऑपरेशन के 2 दिन बाद मरीज को घर जाने की अनुमति भी मिली साथ में उन्हें इस बात का परामर्श भी दिया गया उन्हें आगे अपने स्वस्थ जीवन के लिए क्या-क्या कदम उठाने हैं। यह केवल एक मामला नहीं है बल्कि जबलपुर में बढ़ते चिकित्सा के दायरे और दूसरे शहरों पर आधुनिक इलाज के लिए हमारी निर्भरता को कम होने का मामला भी है।
Author: Jai Lok






