
जबलपुर (जयलोक)। संस्कारधानी के पास स्थित बरगी बांध में जलस्तर काफी कम हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप बांध के कैचमेंट एरिया में डूबे प्राचीन शिव मंदिर का ढांचा दिखाई देने लगा है। 1990 में बने इस बांध के निर्माण के बाद 162 गांव जलमग्न हो गए थे, और यह मंदिर हर साल लगभग 8 महीने पानी में डूबा रहता है।जलाशय का जलस्तर कम होने पर मंदिर का ढांचा बाहर आ जाता है, जो स्थानीय लोगों के लिए एक रहस्यमयी और आस्था का केंद्र बन जाता है।

गर्मी के कारण जलस्तर घटने से जलमग्न हुए पुरह्म्ह्मने गांव के अवशेष भी दिखाई देने लगते हैं।बरगी बांध, जो मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर स्थित है, का निर्माण 1974 में शुरू हुआ था। इस बांध के निर्माण के कारण 162 गांव डूब क्षेत्र में आ गए थे, जिससे जबलपुर, मंडला और सिवनी जिलों के एक लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। बरगी बांध का पूर्ण जल भराव स्तर 422.76 मीटर है।

बरगी बांध के सामने स्थित नंदीकेश्वर महादेव का शिव मंदिर, जिसे डूब क्षेत्र से हटा कर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थापित किया गया है, स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि यह शिवलिंग नर्मदा नदी में नंदी की तपस्या के बाद प्रकट हुआ था। जब गंगा और नर्मदा ने भगवान शिव से प्रार्थना की, तब भगवान शिव ने नर्मदा तट पर स्थापित होने का निर्णय लिया। जब बांध में पानी भरना शुरू हुआ, तब नंदकेश्वर घाट से शिवजी की पिंडी लाकर बरगी बांध के सामने वाली पहाड़ी पर संगमरमर से बने भव्य मंदिर में स्थापित कर दिया गया।श्री नंदिकेश्वर महादेव मंदिर, जो जबलपुर से लगभग 40 किमी दूर स्थित है, एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल है।


यहां नंदी और शिव परिवार की पूजा की जाती है। यह स्थान अपने शांत वातावरण और मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की स्थापना 1994 में हुई थी। बारिश और सर्दी में यहां आना सबसे अच्छा यहां पहुंचने के लिए निजी वाहन या टैक्सी का उपयोग किया जा सकता है। बारिश और सर्दी में यहां आना सबसे अच्छा रहता है। बरगी बांध के आसपास रहने वाले शिव भक्तों का मानना है कि नंदकेश्वर महादेव उनकी रक्षा करते हैं और उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है।
Author: Jai Lok






