
लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) सतर्क हो गई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ नेताओं ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन की मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
बिहार में कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 6 सीटें ही जीत सकीं। 2020 के मुकाबले यह 13 सीटों की गिरावट है। सपा के एक बड़े धड़े का मानना है कि कांग्रेस को मिली अधिकांश सीटें गठबंधन की हार का प्रमुख कारण बनीं। इसलिए 2027 में ऐसा दोहराव न हो, इसके लिए दो सख्त शर्तें रखी जा रही हैं। पहली शर्त सीट बंटवारा 2026 के पहले छह महीनों में ही अंतिम निर्णय कर लिया जाए।
दूसरी शर्त ये है कि कांग्रेस को केवल वही सीटें दी जाएं, जहां उसकी जमीनी पकड़ मजबूत हो और जीत की वास्तविक संभावना हो। सपा नेताओं ने पार्टी आलाकमान को साफ संदेश दिया है कि बिहार की तरह अंतिम समय तक खींचतान और कमजोर सीटें देने से बचना होगा। सूत्रों के मुताबिक, सपा अपने कोटे से ऐसी सीटें कांग्रेस को देने से बचना चाहती है, जहां उसका प्रदर्शन लंबे समय से खराब रहा हो। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से कई बार दोहराया है कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह बरकरार है और 2027 में भी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जाएगा, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही इस बहस ने साफ कर दिया है कि गठबंधन तो रहेगा, पर शर्तों और अनुपात में बदलाव तय है।





