Download Our App

Home » News » ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत के समर्थन में आया चीन

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत के समर्थन में आया चीन

शी जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा पर बढ़ी वैश्विक नजर
नई दिल्ली (जयलोक)। 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है और सम्मेलन की मेजबानी भी भारत ही करेगा। यह चौथा अवसर होगा जब भारत इस प्रमुख बहुपक्षीय संगठन के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लगभग सात वर्षों बाद भारत आने की संभावना है। उनकी प्रस्तावित यात्रा से पहले चीन ने सार्वजनिक रूप से भारत की अध्यक्षता और मेजबानी का समर्थन जताया है, जिसे दोनों देशों के संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारत स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से ब्रिक्स सहयोग को महत्व देता रहा है और इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का पूरा समर्थन करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाला शिखर सम्मेलन सफल रहेगा और सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान केवल औपचारिक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का संकेत भी है। वर्ष 2019 में शी जिनपिंग की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव बढऩे के बाद रिश्तों में गंभीर खटास आ गई।
इसके बावजूद चीन का भारत की भूमिका की खुलकर सराहना करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देश सीमा विवाद के बावजूद वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं बनाए रखना चाहते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच भारत का बढ़ता प्रभाव और सक्रिय कूटनीतिक भूमिका भी चीन के इस रुख का एक महत्वपूर्ण कारण है। अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता ने ब्रिक्स के भीतर उसकी स्थिति को और मजबूत किया है। ऐसे में चीन भारत के नेतृत्व को पूरी तरह नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं है। ब्रिक्स सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण एजेंडा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्पों पर भी केंद्रित रहने की संभावना है। चीन और रूस लंबे समय से स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं।

 

 

शराब तस्कर पति-पत्नी का ड्रामा, पुलिस से बचने के लिए पति ने लगाई छत से छलांग, पत्नी ने कमरे में किया खुद को कैद

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » News » ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत के समर्थन में आया चीन

Top Headlines

Live Cricket