
जबलपुर (जय लोक)। घटना में जान गवांने वाले जबलपुर के थे, हत्या करने वाले सभी आरोपी जबलपुर के थे लेकिन वारदात का स्थान जबलपुर नरसिंहपुर जिले की सीमा पर स्थित सुआतला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। राजेन्द्र पटेल और उसके साथी हाथीनाला वॉटर फॉल से पिकनिक मनाकर लौट रहे थे। घटना के मुख्य आरोपी आनंद सिंह, स्मार्ट सिटी अस्पताल का संचालक डॉक्टर अमित खरे सहित अन्य 11 आरोपी जबलपुर के ही निवासी हैं। इस कांड के प्रमुख योजना निर्माताओं में अमित खरे भी शामिल है। शातिर अमित खरे ने ही आनंद सिंह की रैकी कराकर राजेन्द्र पटेल, वीरेन्द्र लोधी, नीरज लोधी, राजपाल लोधी, जयपाल लोधी आदि को हाईवा से कुचलकर मार डालने और पूरे मामले को एक्सीडेंट दिखाने का षडयंत्र रचा था।
अब डॉ. अमित खरे जिसकी डिग्री को भी शिकायतों में फर्जी बताया गया है और एसडीएम गोरखपुर इन सभी शिकायतों की जाँच कर रहे हैं। शातिर अमित खरे को राजनैतिक संरक्षण के हल्ले के बीच में उसकी भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में एवं दिग्गज नेताओं के साथ फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अब सवाल यह उठने लगा है कि क्या भाजपा और भाजपा नेताओं का संरक्षण मानकर ही शातिर अमित खरे का दिमाग आपराधिक गतिविधियों के लिए इतना हौसला जुटा पाया? क्या उसे खुले संरक्षण प्राप्त होने का वरदान मिला था?
कई बार जेल जा चुका है सजायाफ्ता अमित खरे
शातिर डॉ. अमित खरे पूर्व में भी कई अपराधिक गतिविधियों से संलिप्त रह चुका है। उसे दो साल की सजा भी हो चुकी है और कई बार विभिन्न अपराधिक मामलों में जेल की रोटी भी तोड़ चुका है। यह सभी बातें समाज से लेकर हर किसी राजनैतिक व्यक्ति, बड़े अधिकारियों सभी की जानकारी में हैं। इसके बावजूद भी अमित खरे को भारतीय जनता पार्टी ने इतने अंदर तक घुसने की इजाजत क्यों दी यह सवाल पूछा जा रहा है।

भोपाल दिल्ली तक पहुँची फोटो
सुआतला में हुआ 5 लोगों की हत्या का कांड राष्ट्रीय सुर्खियों में भी आया है। अब इसको लेकर राजनैतिक संरक्षण का हल्ला मचा है और लोग सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच शातिर डॉ. अमित खरे के अपराधिक रिकार्ड के साथ भाजपा के दिग्गज नेताओं के करीबी होने को दर्शाती हुई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने से नया बवाल खड़ा हो गया है। इन फोटो और अन्य सभी बातों को दिल्ली, भोपाल में बैठे वरिष्ठ नेताओं तक पहुँचाया जा रहा है।
हालांकि इन तस्वीरों के संबंध में किसी भी भाजपा के वरिष्ठ नेता या संगठन के पदाधिकारी का कोई भी जवाब सामने नहीं आया है। शातिर डॉ. अमित खरे खुद भी अक्सर गले में भाजपा का गमछा बाँधकर अपने आप को भाजपा नेता होने का दावा कर लोगों और अधिकारियों पर धौंस जमाता था। सूत्रों का कहना है कि शातिर अमित खरे के द्वारा अवैध रूप से खनन का कार्य भी किया गया है जिसकी शिकायतें सामने आई हैं। वहीं इसके द्वारा अवैध रूप से किए जा रहे रेत के कारोबार में भी हिस्सेदारी की गई थी। इन सभी बातों को प्रशासन ने जाँच में लिया है और जल्द ही बिंदुवार इनकी जाँच पड़ताल शुरू हो जाएगी।

Author: Jai Lok





