
आगामी चुनाव में दावेदारी से जोडक़र देखा जा रहा धार्मिक आयोजन में भीड़ जुटाने के प्रयास
जबलपुर (जय लोक)। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के अवसर पर शहर भर में विभिन्न हिस्सों में बड़े-छोटे स्तर पर आयोजित हो रही मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं मुख्य रूप से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का माध्यम अधिक बनती नजर आई हंै। आयोजकों में इस बात की अधिक होड़ नजर आई कि वह किस प्रकार से खुद को राजनीतिक पहुँच से सक्षम और युवाओं को एकत्रित करने की क्षमता होने की बात अधिक प्रभावी ढंग से पेश कर सकें।
अगले वर्ष से नगरी निकाय चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव होने की तारीख तारीख आने लगेगी। इन धार्मिक आयोजनों के शक्ति प्रदर्शनों को इन्हीं चुनाव में दावेदारी की तैयारी से जोडक़र देखा जा रहा है।
बहुत सारे समीकरण इन आयोजनों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं और यही चर्चाएं सामाजिक रूप से प्रयासों का कारण बन रहीं हंै। विगत कुछ सालों से शहर के मध्य में होने वाले एक वृहद स्तर के मटकी फोड़ आयोजन के संबंध में यह चर्चा भी आम हुई की पिछले दो वर्षों से इस आयोजन की प्रशासनिक स्वीकृति को लेकर भी सत्ताधारी लोगों की तरफ से अड़चनें उत्पन्न करने का कार्य किया गया। हालांकि यह सभी प्रयास पर्दे के पीछे से थे और प्रमाणित तौर पर किसी ने भी इस प्रकार के आरोप सार्वजनिक नहीं किए हैं। लेकिन बीच का बंदर बन प्रशासनिक अधिकारी के नाराज स्वर और भिन्न-भिन्न प्रकार के दबाव को सार्वजनिक किया है। सीधी सी बात है अपने क्षेत्र में नया नेता उत्पन्न होने देने की इजाजत और प्रोत्साहन मौजूदा नेता आसानी से नहीं देते हैं।
इन मटकी फोड़ प्रतियोगिता के आयोजनों के माध्यम से आयोजकों ने बड़ी राजनीतिक हस्तियों को अपने कार्यक्रम में आमंत्रित कर एक प्रकार से अपनी राजनीतिक पहुंच और सक्रियता तथा समर्पण को भी दर्शाने का प्रयास किया।
किसी ने मंत्री महोदय को आमंत्रित किया तो किसी ने अपने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए सांसद महोदय को मंचासीन करवाया। हालांकि बड़े जनप्रतिनिधियों के लिए धार्मिक आयोजनों में संस्कारधानी के निवासियों से मेलजोल का यह बेहतर अवसर होता है और वह भी सनातन परंपरा के इन बड़े आयोजनों में बढ़-चढक़र हिस्सा लेते नजर आए। बड़े नेताओं ने इन आयोजनों को प्रोत्साहित करने की मंशा से इन आयोजनों में शिरकत कर सभी का उत्साह वर्धन किया।

परंपराओं से अलग हटकर हो रहे आयोजन
इस नए प्रचलन और चलन के कारण हिंदू संस्कृति और सनातन धर्म के साधु संत एवं वरिष्ठजनों का कहना है कि संस्कृति के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी पर मटकीफोड़ प्रतियोगिता का आयोजन श्री कृष्ण की बाल लीला का एक स्वरूप प्रदर्शित करने का माध्यम है और यह एक निश्चित समय अवधि में संपन्न किए जाने वाला धार्मिक कार्यक्रम है। लेकिन अब राजनीतिक स्वार्थ और अपनी सुविधाओं के अनुरूप इन आयोजनों को परंपरा के विपरीत कई दिनों बाद तक आयोजित किया जाता रहता है।

मटकी फोड़ प्रतियोगिता को लेकर बनी विवाद की स्थिति
शहर के मध्य में हाल ही में आयोजित हुई एक मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान दो शहर के नामचीन अखाड़े की टोलियों के द्वारा किए गए प्रयास के दौरान मटकी फोड़े जाने को लेकर बुद्ध गौंड़ अखाड़ा घमापुर के खलीफा और उनकी टोली की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर इस बात की आपत्ति व्यक्त की गई की मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान उनके साथ पक्षपात किया गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल भी हुआ। हालांकि आयोजकों की ओर से यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी प्रकार की पक्षपात पूर्ण स्थिति नहीं बनी उनके मटकी फोडऩे के दावे को वीडियो के माध्यम से स्पष्ट कर दिया गया था कि उनके प्रयास में मटकी नहीं फूटी है लेकिन वह मानने तैयार नहीं थे।

Author: Jai Lok






