
एमपी ट्रांसफर पॉलिटिक्स अधिकार मंत्रियों को, फैसले किसके?
तबादला नीति पर सवाल, सत्ता से लेकर सचिवालय तक चर्चा तेज
भोपाल (जयलोक)। मध्य प्रदेश में तबादला नीति 2026 के तहत स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इसकी पारदर्शिता और प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सरकार ने विभागीय मंत्रियों को सीमित अवधि के लिए तबादलों की अनुमति दी थी, लेकिन कई मामलों में मंत्रियों की अनुशंसाओं और अंतिम जारी आदेशों में अंतर सामने आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार कई विभागों में तबादला सूची तैयार होने के बाद अंतिम समय में बदलाव किए गए। इससे सत्ता के गलियारों में यह बहस शुरू हो गई है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में वास्तविक प्रभाव मंत्रियों का रहा या फिर अधिकारियों और कथित ‘सेटिंग सिस्टम’ का कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले राजनीतिक सिफारिशों के बजाय अन्य प्रभावों के आधार पर किए गए। वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी अनौपचारिक रूप से असंतोष जताया है कि उनकी अनुशंसाओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। हालांकि सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर संपन्न की गई है। सरकार का दावा है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और आवश्यकतानुसार मानव संसाधन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना था।
इस बीच विपक्ष ने भी मामले को लेकर सरकार को घेरा है। विपक्ष का आरोप है कि तबादला नीति पारदर्शी नहीं रही और कई फैसलों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं सरकार इन आरोपों को निराधार बता रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तबादला प्रक्रिया में मंत्रियों की अनुशंसा निर्णायक रही या फिर पर्दे के पीछे काम करने वाला कथित ‘सेटिंग सिस्टम’ ज्यादा प्रभावशाली साबित हुआ। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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Author: Jai Lok






