
जबलपुर (जयलोक)
जिले में सिहोरा तहसील इन दिनों अवैध उत्खनन के लिए सर्वाधिक बदनाम है। शासन की संपत्ति पर खनन माफिया द्वारा की जा रही लूट खसोट अब खून से भी रंग चुकी है। 5 सालों से संचालित हो रही अवैध रेत खदान में दबकर मारे गए तीन लोगों की मौत चीख-चीख कर बड़े सवाल उठा रही है। मृतकों के परिजन प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर इन तीन मौतों का जिम्मेदार किसे मानिएगा। तीन लोगों की जान चली गई, तीन परिवार बर्बाद हो गए आखिर कोई तो इसका दोषी होगा, यह कोई सामान्य प्राकृतिक घटना नहीं है पैसे की लालच में सरकारी संपत्ति का दोहन हुआ है वह रेत खदान मौत के मुंह में तब्दील हो गई थी इसके बावजूद भी मात्र 300 रुपयों की मजदूरी का लालच देकर मजदूरों की जान से खिलवाड़ करवाया जा रहा था। अब दोषियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ है। लेकिन इन अवैध खनिज माफिया को इतनी छूट किसकी शह पर मिली, यह सवाल उठ रहा है।
खनिज विभाग ने खदान स्वीकृत नहीं की, लेकिन शासकीय संपत्ति विशेष कर खदान और उत्खनन पर नजर रखने के लिए ही खनिज विभाग को बनाया गया है तो इसके जिम्मेदार इतने सालों से आंखे बंदकर क्यों बैठे थे? सिहोरा अनु विभाग के एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी ने आखिर क्यों शासकीय संपत्ति का खुले आम दोहन होने दिया और इसे लूटने दिया? क्यों अवैध खनन माफिया को अवैध खनन करने की छूट दी गई? पुलिस विभाग ने कैसे अवैध खनन कर निकाली गई अवैध रेत को रोजाना खुलेआम परिवहन को आसानी से होने दिया? ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर ट्राली से यहां की अवैध रूप से निकाली गई रेत को दूसरे स्थान पर बेचने के लिए ले जाया जाता था। तब पुलिस कहां थी खुद को सक्रिय और सजक बताने और हेलमेट चेकिंग में रिकॉर्ड बनाने वाली स्थानीय पुलिस को यह अवैध रेत का परिवहन नजर क्यों नहीं आया? क्यों आज तक आरोपी बनाए गए खनन माफिया के लोगों का कोई भी वाहन अवैध परिवहन के तहत नहीं पकड़ा गया ?
यह बहुत ही सीधे सवाल हैं जिनका जवाब तलाशते ही शासन प्रशासन सही आरोपियों तक पहुँच जाएगा। खनन माफिया का हिस्सा बताए जाने वाले तीन आरोपियों अंकित तिवारी, सोनू भदोरिया और चिंटू के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के तहत 304 एवं जोखिम भरे कार्य करने प्रेरित करने के लिए 308 का मामला दर्ज कर दिया है। यह तो वह हाथ हंै जो खनन कर रहे थे लेकिन उन्हें क्यों बचाया जा रहा है जो पैसे की लालच में आंख बंद कर इस अवैध खनन की स्वीकृति देते आ रहे थे। पुलिस खनिज और राजस्व के अधिकारियों की भी इन मौतों के लिए जिम्मेदारी तय होना चाहिए। अवैध उत्खनन से आया हराम का पैसा तो उन्होंने भी खाया और इसी हराम के पैसे की भूख में तीन लोगों की जान चली गई और तीन परिवार बर्बाद हो गए।
इन 3 मौतों के लिए उनके परिजन मुख्यमंत्री से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। यह माँग भी की जा रही है कि प्रशासनिक स्तर पर दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई कर अवैध उत्खनन में शामिल माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों के गठजोड़ को तोडऩे के लिए एक मजबूत सबक भी सबके सामने आना चाहिए। इस निष्पक्ष कार्यवाही का पैमाना प्रदेश में कानून की वास्तविक स्थिति को भी प्रदर्शित करेगा।

तहसीलदार के रीडर ने बयान से की छेड़छाड़
सिहोरा तहसीलदार शशांक दुबे के समक्ष बयान दर्ज करने के लिए पहुंचे घायलों और मृतक के रिश्तेदारों को तहसीलदार ने अपने रीडर अनिल श्रीवास्तव के पास बयान दर्ज करने के लिए भेजा। बयान दर्ज करते समय रीडर ने बड़ी चालाकी से अवैध रेत खदान की जगह भसुआ लिख दिया और मामले को पलटने की नीयत से आरोपियों को बचाने का प्रयास करने लगा। यह आरोपी बयान दर्ज करने पहुंचे गांववासियों ने लगाए हैं। इसके बाद पीडि़तों ने बयान दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि अब वह सीधे कलेक्टर के सामने ही अपने बयान दर्ज कराएंगे। सूत्रों के अनुसार अवैध खनन माफिया ने सरकारी दफ्तर में बैठे बाबुओं और छोटे कर्मचारियों को कुछ नोटों के बदले अपनी जेब में रखे हुए हैं। तीन लोगों की जान चली गई उसके बावजूद यह लोग अपनी वफादारी निभाकर खनन माफिया से जुड़े लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

जंगल राज…खनन माफिया के गुर्गे बयान बदलने के लिए दे रहे धमकी
एसडीओपी पारुल शर्मा को सौंपी ग्रामीणों ने शिकायत
जबलपुर (जय लोक)। खनन माफिया ने कानून के भय को बिल्कुल समाप्त कर जंगल राज मचा रखा है। दबंगई का आलम यह है कि शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जब अवैध रेत खनन से जुड़े भाजपा के नेता मंडल अध्यक्ष अंकित तिवारी, सोनू भदोरिया और अन्य पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया तो उनके गुर्गे गांव में जाकर अब पीडि़त पक्ष के लोगों को बयान बदलने के लिए धमकी दे रहे हैं। इंसाफ पाने के लिए दर-दर भटक रहे मृतकों के परिजन, घायल एक बार फिर अपनी गुहार लेकर सिहोरा एसडीओपी पारुल शर्मा से मिलने पहुंचे और फिर से लिखित शिकायत देकर यह बताया कि उन्हें जान का खतरा है, साथ ही दो युवक नारायण ठाकुर, मनीष सोनी के नाम भी पुलिस के समक्ष बताएं जो बयान बदलने के लिए घर जाकर धमकी दे रहे हैं। पीडि़त बंशकार समाज के लोगों ने आरोपियों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की माँग की है।

Author: Jai Lok







