
भोपाल/जबलपुर (जयलोक)। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में जबलपुर पूर्व के विधायक लखन घनघोरिया ने मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विभाजन संबंधी विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था तथा जबलपुर की ऐतिहासिक शैक्षणिक पहचान को कमजोर करने वाला निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि जिस विश्वविद्यालय की परिकल्पना वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर के कार्यकाल में की गई और जो वर्ष 2011 में अस्तित्व में आया, आज लगभग 15 वर्षों की संस्थागत यात्रा के बाद उसे बिना किसी ठोस शैक्षणिक या प्रशासनिक औचित्य के विभाजित किया जा रहा है।विधायक लखन घनघोरिया ने सदन में कहा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि यदि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में कोई कमी है तो उसका समाधान संस्थान का विभाजन है या प्रशासनिक सुधार।

उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी आज प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा की रीढ़ है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत 24 विभाग, 635 शिक्षक एवं कर्मचारी, 100 से अधिक मेडिकल एवं संबद्ध कॉलेज, लगभग 5200 एमबीबीएस सीटें तथा लगभग 3200 स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें संचालित हैं। ऐसे स्थापित संस्थान का विभाजन चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ नहीं, बल्कि जटिल बनाएगा।घनघोरिया ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास में लगभग 200 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि व्यय की जा चुकी है। अब सरकार परिसंपत्तियों, कर्मचारियों, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे का विभाजन करना चाहती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इस निर्णय पर किसी विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा है, क्या कोई विस्तृत प्रभाव अध्ययन कराया गया है और क्या विद्यार्थियों, शिक्षकों, चिकित्सा विशेषज्ञों अथवा विश्वविद्यालय प्रशासन से व्यापक परामर्श लिया गया है।

उन्होंने सदन को याद दिलाया कि प्रारंभ में सरकार मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी को तीन भागों में विभाजित करने का प्रस्ताव लेकर आई थी, जिसे बाद में बदलकर दो विश्वविद्यालयों का स्वरूप दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव बदल जाने से मूल प्रश्न समाप्त नहीं हो जाता। विश्वविद्यालय को विभाजित करने के बजाय उसकी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।पिछले कुछ वर्षों में जबलपुर की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं का महत्व लगातार कम करने का प्रयास किया गया है। पहले जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में परिवर्तन किया गया और अब प्रदेश की एकमात्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी का विभाजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल जबलपुर का विषय नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का प्रश्न है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी विभाजन संबंधी विधेयक को तत्काल वापस लिया जाए और विश्वविद्यालय को कमजोर करने के बजाय उसकी प्रशासनिक क्षमता को मजबूत किया जाए।


Author: Jai Lok






