
विधानसभा में होगा पेश
भोपाल (जय लोक)। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने आज 19 जुलाई 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी, अब यह विधानसभा में पेश होगा। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 19 जुलाई 2026 को भोपाल के जगदीशपुर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के ड्राफ्ट बिल को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। यह राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विवाह, तलाक और उत्तराधिकार संबंधी मामलों में समान कानून लागू होंगे; महिलाओं व बच्चों के अधिकारों को मजबूती मिलेगी, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। मध्य प्रदेश के सभी नागरिक, विशेषकर महिलाएं, बच्चे और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 19 जुलाई 2026 को भोपाल के जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट बिल को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली है। अब इस प्रस्तावित विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी है। इस कदम को राज्य में कानून व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।

यूसीसी का लक्ष्य-समान अधिकार और सशक्तिकरण
सरकार का दावा है कि प्रस्तावित (यूसीसी) का मुख्य उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। इसका लक्ष्य किसी भी व्यक्तिगत कानून के कारण उत्पन्न होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। ड्राफ्ट बिल में विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करने वाले प्रावधान शामिल किए गए हैं। इससे समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी सुरक्षा और समानता मिलने की उम्मीद है, जिससे उनका सशक्तिकरण होगा।

लिव-इन रिलेशनशिप पर नए नियम
प्रस्तावित कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत ऐसे संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा, जिससे इन रिश्तों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान भी रखा गया है। वहीं, संबंध समाप्त होने की स्थिति में महिला साथी से जुड़े प्रावधान भी इस ड्राफ्ट बिल में शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य इन रिश्तों में रहने वाली महिलाओं के हितों की सुरक्षा करना है। विधानसभा के मानसून सत्र में इस बिल की पेशी के बाद इस पर विस्तृत चर्चा और संभावित बहस देखने को मिल सकती है। इसके कानून बनने की प्रक्रिया और मध्य प्रदेश के समाज पर इसके दूरगामी प्रभावों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।


मुख्यमंत्री सहित बैठक में मंत्री और अफसर इलेक्ट्रिक बस से पहुँचें
मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासन में रविवार को एक अलग तस्वीर देखने को मिली। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल जिले के ऐतिहासिक जगदीशपुर में होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी वीआईपी काफिलों की बजाय इलेक्ट्रिक बसों से सामूहिक रूप से पहुंचे। सरकार ने इसे सादगी, मितव्ययिता और शासकीय संसाधनों के बेहतर उपयोग की पहल बताया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और उनका स्टाफ मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। यहां से तीन इलेक्ट्रिक बसों के जरिए सभी एक साथ जगदीशपुर के लिए रवाना हुए। इस दौरान मंत्रियों के शासकीय वाहन, व्यक्तिगत वाहन, पायलट और फॉलो वाहन मुख्यमंत्री निवास पर ही रहे। वहीं, कैबिनेट बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ अधिकारी भी अपने वाहन कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पार्क कर इलेक्ट्रिक बसों से बैठक स्थल पहुंचे। इलेक्ट्रिक बसों से सामूहिक यात्रा करने से ईंधन की बचत हुई, वीआईपी काफिलों की संख्या कम हुई, यातायात पर दबाव घटा और शासकीय संसाधनों का अधिक मितव्ययी उपयोग सुनिश्चित हुआ।
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Author: Jai Lok






