
थाने से अपने पैरों पर चल कर गया था आरोपी,पुलिस ने जारी की तस्वीर
जबलपुर (जय लोक)। गोरखपुर पुलिस पर एक बदमाश के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप रामपुर निवासी सतीश सोनकर ने लगाए हैं। उसका कहना है कि पुलिस ने उसे बेरहमी से पीटा, थाने में बंद कर करीब 70 डंडे मारे। जिससे वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है।

वहीं गोरखपुर थाना प्रभारी का कहना है कि युवक द्वारा लगाया गया आरोप झूंठा है उसे शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ही उसने यह आरोप लगाया है। पीडि़ता का नाम सतीश सोनकर बताया जा रहा है जो रामपुर का रहने वाला है। सतीश का कहना है कि आबकारी अधिनियम के एक जमानती मामले में वह खुद थाने पहुँचा था लेकिन यहां पुलिस ने उसे पकडक़र जमकर पिटाई कर दी और एक के बाद एक 70 डंडे बरसाए। जिससे उसके दोनों पैरों में गंभीर सूजन आ गई और अब वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है। वहीं इस मामले में गोरखपुर थाना प्रभारी नितिन कमल का कहना है कि सतीश कई मामलों में अपराधी है। उसके खिलाफ कई थानों में अपराधिक मामले दर्ज हैं।

इन मामलों से बचने के लिए ही सतीश पुलिस पर दबाव बनाने झूठा आरोप लगा रहा है। थाना प्रभारी का कहना है कि सतीश का चिकित्सीय परीक्षण भी कराया गया है और वह चल-फिर सकता है। जब उसे थाने से छोड़ा गया था तब भी वह चलकर वापस गया।


थाने से अपने पैरों पर चल कर गया था आरोपी,पुलिस ने जारी की तस्वीर
जबलपुर (जय लोक)। गोरखपुर थाना क्षेत्र में कथित तौर पर पुलिस द्वारा एक व्यक्ति के साथ मारपीट किए जाने के सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आरोपों पर पुलिस ने अपना कड़ा पक्ष सार्वजनिक किया है।आरोपी सतीश सोनकर के कब्जे से 21 पाव मूनलाइट/देशी शराब बरामद की। शराब को विधिवत जब्त करते हुए आरोपी को थाने लाया गया और उसके खिलाफ म.प्र. आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) के तहत प्राथमिकी (स्नढ्ढक्र) दर्ज की गई। थाना प्रभारी और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ दर्ज धारा जमानती और नोटिस के दायरे में आने वाली थी, इसलिए वैधानिक कार्रवाई और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे थाने से रिहा कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ या कार्रवाई के दौरान उसके साथ किसी भी तरह की मारपीट नहीं की गई। वह अपने पैरों पर चलकर बिल्कुल सुरक्षित और सही-सलामत थाने से बाहर गया था, जिसके समर्थन में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरें भी जारी की हैं।
आरोप लगाने वापस आया थाने -थाने से छूटने के कुछ देर बाद वह वापस आया और मारपीट के झूठे आरोप लगाने लगा। पुलिस ने निष्पक्षता बरतते हुए उसका मुलाहजा (मेडिकल परीक्षण) भी कराया, जिसकी रिपोर्ट में मारपीट या चोट की पुष्टि जैसा कुछ भी सामने नहीं आया है।आरोपी सतीश सोनकर के खिलाफ वर्ष 2006 से कई अपराध दर्ज हैं। गोरखपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो भी भ्रामक खबरें या वीडियो वायरल हो रहे हैं,उसकी जाँच की जायेगी। किसी भी आदतन अपराधी को कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने या पुलिस की छवि धूमिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
Author: Jai Lok






