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युवा पीढ़ी को वीरांगना दुर्गावती के शौर्य, त्याग और बलिदान से अवगत कराया जाना आवश्यक

वीरांगना ने जलप्रबंधन को सर्वाधिक प्राथमिकता दी-वीरांगना की जयंती पर वक्ताओं के उद्गार

जबलपुर (जय लोक)। गढ़ा मंडला राज्य की महान वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती का आयोजन आज मित्रसंघ द्वारा भंवरताल में स्थित वीरांगना की गजारूढ़ प्रतिमा के समक्ष किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने वीरांगना के शौर्य और बलिदान को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। इस बात की आवश्कता पर जोर दिया गया कि वीरांगना दुर्गावती के शौर्य त्याग, और बलिदान की प्रेरक गाथाओं से आज की युवा पीढ़ी को जानकारी से समृद्ध किया जाए। ताकि आज की युवा पीढ़ी यह जान सके कि एक वीरांगना ने किस प्रकार अपने प्राणों की आहुति देकर दुश्मन की सेना का पुरजोर मुकाबला किया।
वक्ताओं ने वीरांगना दुर्गावती की शासनकाल में जल प्रबंधन के लिए किए गए प्रयासों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वीरांगना ने सबसे अधिक प्राथमिकता जल प्रबंधन को ही दी। इसी का यह नतीजा है कि उनके शासनकाल में हमारे जबलपुर शहर में 52 तालाब और 82 ताल तलैया का निर्माण कराया गया। ये सभी संसाधन जलप्रबंधन के बड़े काम आए।
कार्यक्रम में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद श्रीमती सुमित्रा बालमिकी, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, विधायक अजय विश्नोई, अभिलाष पांडे, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, नगर भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, मेयर इन काउंसिल के सदस्य डॉ. शुभाष तिवारी, श्रीमती अंशुल राघवेन्द्र यादव, श्रीमती रजनी कैलाश साहू, भाजपा दिव्यांगजन कल्याण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक संदीप रजक, भाजपा के नगर महामंत्री रंजीत पटेल, प्रणीत वर्मा, पार्षद लवलीन आनंद, मप्र क्षत्रीय महासभा के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ठाकुर के साथ बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और पुष्पांजलि अर्पित की। मित्रसंघ के अध्यक्ष सच्चिदानंद शेकटकर, संयोजक परितोष वर्मा, डॉ. संजय मिश्रा, डॉ. शैलेन्द्र पांडे, सीएल मरावी, हरिओम हजारी, संजय गुप्ता, राहुल अग्रवाल, चंदन रैकवार, सौरभ यादव, विष्णु विनोदिया, हीरा मंगलानी, पिंटू सोनकर, ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।
मित्रसंघ के अध्यक्ष सच्चिदानंद शेकटकर ने रानी दुर्गावती के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि रानी का जन्म महोबा के निकट राठ परगने में 5 अक्टूबर 1524 को हुआ था। गढ़ा मंडला राज्य के महाराजा दलपति शाह के साथ रानी दुर्गावती का विवाह सिंगौरगढ़ में 1540-41 में हुआ था। सात वर्ष तक शासन करने के बाद दिवंगत हुए दलपतशाह के बाद रानी दुर्गावती ने ही शासन किया था। मित्र संघ के संस्थापक श्री अजित वर्मा द्वारा वीरांगना के बलिदान दिवस और जयंती के आयोजन की शुरूआत कराई गई जो आज भी निरंतर जारी है।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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