Download Our App

Home » जबलपुर » ये छूआछूत का रोग तो अमरीका तक पहुँच गया भैया…….

ये छूआछूत का रोग तो अमरीका तक पहुँच गया भैया…….

चैतन्य भट्ट
(जय लोक)। अपने को तो ये पता था और डॉक्टरों से भी सुना था कि बहुत से रोग छुआछूत वाले होते हैं जो एक से दूसरे को लग जाते हैं। मसलन ‘सर्दी-जुकाम’ ये हवा में मौजूद बूंदों के जरिए बहुत जल्दी फैलता है। ‘खसरा और चिकनपॉक्स’ ये वायरस से होने वाले त्वचा संबंधी रोग हैं जो मरीज के संपर्क में आने से फैलते हैं। ‘तपेदिक या टीबी’ ये खांसने या छींकने पर हवा के माध्यम से फैलता है। ‘दाद, खाज खुजली’ ये त्वचा के सीधे संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के तौलिए-कपड़े इस्तेमाल करने से फैलता है। कंजंक्टिवाइटिस ये संक्रमित व्यक्ति की आंखों के संपर्क में आने या उसकी चीजें छूने से फैलता है। लेकिन अब एक सबसे बड़ा छुआछूत का रोग न केवल अपने देश के हर प्रदेश में बल्कि हजारों किलोमीटर दूर  ‘अमेरिका’ तक में पहुंच चुका है और ये छुआछूत का रोग है ‘नोट दो और वोट लो’ यानी मुफ़्त खोरी को बढ़ावा दो। अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं और वहां के राष्ट्रपति ट्रंप जी ने घोषणा कर दी है कि हर व्यक्ति को भारतीय मुद्रा में लगभग पांच लाख रुपए दिए जाएंगे, अमेरिका में रहने वाले लोगों को अपने पूर्व मुख्यमंत्री ‘शिवराज सिंह चौहान’ का धन्यवाद अदा करना चाहिए कि उन्होंने जो स्कीम शुरू की थी वो विदेश तक जा पहुंची है। अपने देश के तो हर प्रदेश में चुनाव के पहले कोई दो हजार की बात कर रहा, तो कोई पांच हजार की, तो कहीं चालीस हजार तक देने का वायदा किया जा रहा है लेकिन ये महिलाओं को दिए जाएंगे। पर अमेरिका में कोई भेदभाव नहीं है, डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा कि वोट अकेली महिलाएं तो देती नहीं है सबको पांच पांच लाख दो, फिर दूसरी बात ये है कि पैसा अपनी जेब से तो जाना नहीं है सरकारी खजाना है, लुटाते चलो अपन पावर में जो हैं और समर्थ हैं। सचमुच बड़ा खतरनाक रोग है ये अभी अमेरिका तक पहुंचा है और अगर  इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीत गए तो समझ लो कि पूरे विश्व में यह बीमारी फैलने वाली है। जहां-जहां चुनाव होंगे वहां वहां ये स्कीम लागू होगी और जो लोग सत्ता में हं वे सत्ता में बने रहेंगे ,वैसे भी छुआछूत वाली बीमारियों का कोई खास इलाज होता नहीं है इसलिए इसका भी कोई इलाज समझ में आता नहीं, सबसे बड़ी बात तो ये है कि ‘हर लगे ना फिटकरी रंग चोखा हो’ यानी अपनी जेब से पंजी  देना नहीं है फ्री फोकट में सरकारी खजाने से दिए गए पैसे से वोट पाना है, इससे ज्यादा आसान काम क्या हो सकता है तो वही सारे नेता कर रहे हैं। भले ही हम और किसी चीज में विश्व गुरु ना बन पाएं कम से कम इस योजना में हम जरूर विश्व गुरु बन जायेंगे।

दोस्ती में दगा

कहा जाता है कि सबको दगा दे दो, लेकिन दोस्ती में दगा देना ठीक बात नहीं होती, दोस्ती विश्वास पर चलती है लेकिन जब दोस्त को दगा दी जाती है तब दगा देने वाले दोस्त की लाई कैसे लुटती है ये अभी हाल ही में एक खबर में पता लगा है। हुआ यूं कि एक व्यक्ति ने अपने दोस्त को अपने बर्थडे पार्टी में बुलाने का वादा किया था, जिस दिन बर्थडे था उस दिन उस दोस्त ने सुबह से खाना नहीं खाया कि आज तो मित्र की बर्थडे पार्टी में जाना है। लेकिन मित्र ने दोस्त को दगा दे दिया और पार्टी में नहीं बुलाया, इंतजार करते करते काफी रात हो गई तो भूखे प्यासे दोस्त ने जाकर होटल में खाना खाया और उस खाने से वो बीमार भी हो गया। बीमारी से निजात पाने के बाद उसने अपने उस मित्र को वकील के माध्यम से एक  कानूनी नोटिस भेजा जिसमें कहा गया था कि ‘तुमने मेरे साथ दगाबाजी की, बर्थडे में बुलाया नहीं, भूख के मारे मैंने होटल में खाना खाया जिसका 1750 रुपए बिल बना और उसके बाद मैं बीमार पड़ गया इसके इलाज में 39500 रुपए मेरे खर्च हो गए इसलिए अब यह पूरा पैसा तुम मुझे अदा करो वरना कानूनी कार्यवाही के लिए तैयार रहो’। इस घटना से अब ये सबक लेना चाहिए कि दोस्ती में दगा बहुत महंगा पड़ सकता है। बर्थडे वाले मित्र अब अपने वकीलों से सलाह ले रहे हैं कि हमारे दोस्त ने जो हमें नोटिस दिया है उसका हम क्या जवाब दें वकील भी पैसा मांग रहे हैं जवाब देने का, इससे अच्छा होता कि दोस्त को खाने पर बुला लेता तो ये दिन न देखने पड़ते।

सत्ता का साथ

हर नेता सत्ता के साथ रहना चाहता है क्योंकि उसको मालूम कि सत्ता के साथ रहेंगे तो फायदा ही फायदा है, विरोध में रहने से कोई लाभ नहीं, चिल्लाते रहो कोई सुनने वाला नहीं, यही काम आम आदमी पार्टी के नेता ‘राघव चड्ढा’ ने किया, कल तक संसद में भारतीय जनता पार्टी को पानी पी पी कर कोसने वाले राघव चड्ढा जैसे ही भाजपा में आए उनकी पूरी वाणी बदल गई उनके मुखारविंद से बीजेपी की तारीफ  के ऐसे ऐसे वाक्य निकलने लगे जो कभी उन्होंने अपने भीतर सोचे भी नहीं होंगे, वैसे भी सत्ता में रहने का फायदा क्या होता है ये सबके सामने है। पंजाब से उनका नाम वोटर लिस्ट से कट गया पर क्या था सात दिन के भीतर वे दिल्ली के वोटर बन गए, सारी औपचारिकताएं पूरी हो गई और एक हफ्ते में दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल हो गए, अब विरोधी चिल्ला रहे हैं कि लाखों लोग अपनी एप्लीकेशन लिए भटक रहे हैं कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है जबकि वे वोट देने के अधिकारी हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। आप चिल्लाते रहो आपके चिल्लाने से क्या फर्क पड़ता है हां अगर सत्ता धारी दल से जुड़े होते तो आपका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाता आप सत्ता में नहीं हो तो बिना वोट दिए अपना काम चलाते रहो और फिर दूसरी बात ये है कि हर कोई राघव चड्ढा तो है नहीं आप आम आदमी हो और आम आदमी की क्या हैसियत है ये हर कोई जानता है।

सुपर हिट ऑफ  द वीक

‘शादी के वक्त सात फेरे लेते हुए तुमने वचन दिया था और ये भी स्वीकार किया था कि तुम मेरी इज्जत करोगी मेरी सब बातें मानोगी’ श्रीमान जी ने श्रीमती जी से कहा
‘तो क्या इतने लोगों और रिश्तेदारों के सामने तुमसे बहस करती इसलिए कह दिया था’ श्रीमती जी ने उत्तर दिया।

 

 

जोधपुर में उलटफेर: गहलोत के गढ़ में भाजपा जीती, शेखावत के वार्ड में कांग्रेस का दबदबा, फुटबाल खिलाड़ी भी जीता

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » जबलपुर » ये छूआछूत का रोग तो अमरीका तक पहुँच गया भैया…….

Top Headlines

राम मंदिर के चंदे को लेकर जयराम ने भाजपा को घेरा पूछा-कितने करोड़ लोगों ने कितना दान दिया?

कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी, शाह और योगी से कहा- व्यापक जाँच क्यों नहीं कराई जा रही नई दिल्ली। अयोध्या

Live Cricket

error: Content is protected !!