
नई दिल्ली (जयलोक)। देश के विभिन्न राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों और 2 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आगामी 18 जून को होने वाले इस चुनाव में संख्याबल अनुकूल होने के बावजूद विपक्षी दलों को अपने उम्मीदवारों की जीत का पूरा भरोसा नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण पूर्व में हुए चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस वोटिंग है, जिसने विपक्ष के समीकरणों को बिगाड़ा था।

इस बार भी मध्य प्रदेश, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को अपने विधायकों के पाला बदलने या क्रॉस वोटिंग करने की चिंता सता रही है। जिन 26 सीटों पर चुनाव और उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें वर्तमान में एनडीए के पास 18 सीटें हैं (जिसमें 12 भाजपा की हैं), जबकि चार सीटें कांग्रेस, तीन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और एक झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पास हैं।झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में सत्ताधारी झामुमो और कांग्रेस गठबंधन के पास संख्याबल के हिसाब से दोनों सीटें जीतने के पर्याप्त नंबर हैं। झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता है। सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटों के लिए पर्याप्त हैं।

वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक हैं। यदि भाजपा मैदान में उतरती है, तो उसे महज चार विधायकों की क्रॉस वोटिंग की जरूरत होगी। एक या दो वोट भी इधर-उधर होने पर मामला दूसरी वरीयता के मतों पर चला जाएगा, जिससे मुकाबला बेहद संवेदनशील हो गया है।


दूसरी तरफ, कर्नाटक की चार सीटों पर होने वाला चुनाव भी बेहद रोचक मोड़ पर है। कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के पास 135 विधायक हैं, जबकि भाजपा-जदएस गठबंधन के पास 85 विधायक हैं। यहाँ एक सीट के लिए 45 वोटों की जरूरत है। आंकड़ों के लिहाज से कांग्रेस आसानी से तीन और भाजपा एक सीट जीत सकती है। लेकिन, यदि भाजपा अपनी दूसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतारती है, तो उसे बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग पर निर्भर रहना होगा या फिर खेल दूसरी वरीयता के वोटों पर टिक जाएगा।मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में एक सीट की जीत के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास दो सीटें आसानी से जीतने के बाद भी 48 अतिरिक्त वोट बचते हैं। इसका मतलब है कि तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को केवल 10 और वोटों का प्रबंध करना होगा। कांग्रेस के पास 62 वोट हैं, जिससे वह एक सीट आसानी से जीत सकती है। लेकिन यदि भाजपा अतिरिक्त उम्मीदवार उतारती है, तो क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ जाएगा।
Author: Jai Lok






