
डुमना विमानतल के सर्व सुविधा युक्त होने के बाद भी निजी विमान कंपनियाँ विमान सेवा बढ़ाने नहीं ले रहीं रुचि
जबलपुर (जयलोक)। 412 करोड़ रुपए की लागत से सर्व सुविधायुक्त होकर बोइंग 737 जैसे विमान की लैंडिंग के साथ ही नाइट लैंडिंग के लिए भी तैयार डुमना एयरपोर्ट न जाने क्यों निजी विमान कंपनियोंं का ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रहा है। जबकि जबलपुर से संचालित होने वाली कोई भी उड़ान खाली नहीं जाती है। देश की चारों दिशाओं के लिए जबलपुर से यात्रियों की संख्या में कोई कमी नहीं है। फिर भी जबलपुर में विमान सेवा के बुरे हाल बने हुए हैं। इंडिगो एयरलाइंस का नया शेड्यूल इसी बात को दर्शा रहा है। पूर्व में हर सप्ताह 42 उड़ाने नियमित रूप से यहां से संचालित हो रही थी, लेकिन इन्हें अब कम कर 36 उड़ानें कर दी गई हैं। सोमवार से यह नया शेड्यूल लागू होना बताया जा रहा है। ऐसा क्यों किया गया है इस संबंध में कंपनी की ओर से किसी भी प्रकार का अधिकृत बयान सामने नहीं आया है।

जो नया शेड्यूल जारी हुआ है उसके अनुसार नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए उड़ाने सप्ताह के चुनिंदा दिनों में ही उपलब्ध रहेंगी। जबकि पहले यह उड़ानें नियमित थीं।
जबलपुर एयरपोर्ट के प्रभारी निर्देशक नीरज गुडवानी ने प्रेस को बताया कि इंडिगो एयरलाइंस का नया शेड्यूल आ चुका है जिसमें कुछ उड़ानों में कमी की गई है। उड़ानों के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यात्रियों से हमेशा अपील की जाती है कि वह अपनी नियमित उड़ानों से पहले उनका शेड्यूल जाँच लें ताकि उनको असुविधा न हो।
उड़ानों में कटौती के कारण जबलपुर के विमान यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक और औद्योगिक जगत में निराशा बनी हुई है। लोगों में चिंता है की तेजी से विकसित हो रहे जबलपुर में उड़ानों की संख्या और अधिक बढऩे के बजाय कम की जा रही है। इसका सीधा असर जबलपुर के औद्योगिक और व्यापारिक विकास पर भी पड़ेगा, आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ेगा। वर्तमान में जबलपुर डुमना एयरपोर्ट से दिल्ली, इंदौर, हैदराबाद, बेंगलुरु एवं नवी मुंबई के लिए सीधे विमान सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके पूर्व में कोलकाता, पुणे जैसे शहरों के लिए हमेशा मांग के बाद कुछ समय के लिए हवाई यात्रा की सुविधा मिली थी लेकिन वर्तमान में ये सेवाएं बंद हो चुकी हंै।

लगातार प्रयास फिर भी हाथ खाली
ऐसा नहीं है कि राजनीतिक परिदृश्य में इस दिशा में प्रयास नहीं हो रहे हैं। लेकिन पता नहीं क्या वजह है जो निजी विमान कंपनियां इतनी अधिक संभावनाएं होने के बावजूद भी जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट के प्रति अपना आकर्षण नहीं बना पा रही हैं। पिछले कई सर्वे की रिपोर्ट आ चुकी है कि यहां पर व्यापारिक प्रतिस्पर्धा भी नहीं है, फ्लायर्स की अच्छी संख्या है, उड़ानों के लिए नियमित रूप से आर्थिक स्थिति अच्छी आंकी जा चुकी है। लेकिन फिर भी इस अभाव को दूर करना काफी जरूरी है।


Author: Jai Lok






