
जबलपुर (जय लोक)। बीती रात दिल्ली से महेंद्र गोयनका को कोलकाता पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया है। गोयनका पर कटनी जिले के विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों में 1000 करोड़ की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप है। रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका पूर्व में विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में एक प्रमुख प्रबंधकीय पद पर कार्यरत रहा है, आरोपों के अनुसार, यह मामला सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं और कंपनी के बिके हुए माल को छल-कपट करके बेचने से जुड़ा हुआ है।

महेन्द्र गोयनका ने फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से पाठक परिवार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इस संबंध में कोलकत्ता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120 बी 467/468/471 सहित अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके परिपालन में महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी की गई है। महेंद्र गोयंका की गिरफ्तारी से मध्यप्रदेश के कई अधिकारियों और व्यापारियों के राज खुलने की आशंका है। सूत्रों के अनुसार पूर्व में भी इन बातों की चर्चा रही है कि कई आईएएस अधिकारियों के काले धन को सफेद करना भी महेंद्र गोयनका का काम रहा है। बताया जा रहा है कि मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (हृष्टरुञ्ज) के 9 मई 2025 के आदेश में महेंद्र गोयनका एवं उनकी पत्नी मीनू गोयनका द्वारा वित्तीय गबन से संबंधित टिप्पणियां दर्ज की गई हैं। इन बातों को जाँच में शामिल किया जायेगा तो सच सामने आ जायेगा । इसके अतिरिक्त, उनकी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात में भी कथित रूप से वित्तीय अनियमितताओं और धन के हेरफेर की खबरें सामने आई हैं।

न्यायालय से राहत न मिलने पर हुई कार्रवाई
आरोपी के खिलाफ कटनी में भी 420, 120बी, 467, 468 और 471 धाराओं के तहत अलग-अलग मामले दर्ज हैं। आरोपी और उसके सहयोगियों की ओर से अग्रिम जमानत के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद से ही आरोपी करीब 2 साल से फरार चल रहा था। मामले में एक नया मोड़ तब आया जब मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने 9 मई 2025 को अपने आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका द्वारा किए गए वित्तीय गबन का उल्लेख किया था। इसके बाद से ही कानून का शिकंजा उन पर कसता गया और अंतत: पुलिस उसे पकडऩे में सफल रही। फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से कंपनी पर नियंत्रण करने के मामले में पुलिस ने उसे दबोचा है। इस मामले में कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी, 467, 468 और 471 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।


जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से कंपनी के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की। उसने फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल करके पाठक परिवार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों पर अपना मालिकाना हक और नियंत्रण जमा लिया था। यह पूरा मामला वित्तीय गबन और कंपनी की संपत्ति को अवैध तरीके से बेचने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार गोयनका ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी लाभ के लिए कंपनी के साथ बड़ा आर्थिक अपराध किया है। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले के अन्य पहलुओं की जाँच कर रही है ताकि धोखाधड़ी में शामिल अन्य सहयोगियों तक भी पहुँचा जा सके।
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Author: Jai Lok






