
जबलपुर (जयलोक)
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि नगर पालिक अधिनियम के प्रावधानों के तहत लीज के तहत कंपनी को टैक्स में छूट नहीं दी जा सकती। इस मत के साथ जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने रिछाई इंडस्ट्रियल एरिया स्थित उदयपुरा बेवरेजेस की याचिका खारिज कर दी। आयुक्त नगरनिगम की आय बढ़ाने के लिये बकाया किरायेदारों से पूर्ण राशि वसूल करने के लिए सख्त लहजे काम कर रहे हैं। उन्होंने नगर निगम लीगल सेल को भी नगर निगम के आय के संबंधित विषयों पर सजगता के साथ माननीय न्यायालय में पक्ष प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है। इसी के परिणामस्वरूप आज एक महत्वपूर्ण फैसला नगर निगम के पक्ष में आया है।

पारित आदेश के अनुसार साफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनी ने नगर निगम के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन पर 97 लाख 75 हजार रुपए का टैक्स अधिरोपित किया था। याचिकाकर्ता कंपनी ने वर्ष 2015 से ननि को टैक्स नहीं चुकाया था। कंपनी की ओर से याचिका दायर कर बताया गया कि नगर निगम जबलपुर ने 25 सितंबर 2025 को उक्त टैक्स जमा कराने का डिमांड नोटिस भेजा था।

दलील दी गई कि कंपनी जिला औद्योगिक एवं व्यापार केंद्र के तहत एमएसएमई के अंतर्गत व्यापार करती है। ऐसे में उन्हें संपत्ति कर में छूट मिलनी चाहिए। डीआईटीसी और एमएसएमई के नियम कंपनी पर लागू होते हैं, इसलिए उन पर टैक्स नहीं लगाया जा सकता। वहीं नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता को प्रदान की गई लीज एक विशिष्ट शर्त है कि उक्त पट्टे पर दी गई संपत्ति पर लगाए जाने वाले संपत्ति कर का भुगतान लीजधारक को करना होगा।





