
जबलपुर (जयलोक)। वर्तमान देश की परिस्थितियों में युवाओं के बीच पनप रहा आक्रोश और विपक्षी दलों के द्वारा सत्ता पक्ष को राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रादेशिक स्तर तक घेरने के लिए चलाई जा रही मुहिम लगातार आक्रामक होती जा रही है। कांग्रेस के प्रदर्शनों में लगातार तीखापन आ रहा है और विपक्ष की भूमिका में लगातार बढ़ रही उनकी सक्रियता के कारण सत्ता पक्ष में अब इस बात को लेकर चिंता साफ नजर आ रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दिल्ली के प्रदर्शन में सक्रिय हुए और उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे दिया। देश के इतिहास की यह पहली घटना है जब प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी दल के नेताओं के द्वारा धरना दिया गया हो। घटनाक्रम आगे बढ़ा तो देर शाम राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं। इन गिरफ्तारियों का विरोध पूरे देश भर में कांग्रेसजनों ने शुरू किया।

कई स्थानों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए उनके पुतले जलाए गए। इसी क्रम में जबलपुर नगर कांग्रेस के अध्यक्ष सौरभ शर्मा के आव्हान पर शहर के मालवीय चौक पर बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता एकत्रित हुए। इस आंदोलन के दौरान कांग्रेस के पूर्व विधायक विनय सक्सेना, वरिष्ठ नेता आलोक मिश्रा, कैंट के विधानसभा प्रत्याशी रह चुके अभिषेक चौकसे चिंटू सहित युवक कांग्रेस के नेताओं ने पूरे आंदोलन को गर्म जोशी से भरे प्रदर्शन में तब्दील कर दिया। हाल ही में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य बनी युवा नेत्री देवकी पटेल और उनकी महिलाओं की टीम ने भी प्रदर्शन में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। इस आंदोलन के दौरान कांग्रेस के वह नेता और कार्यकर्ता भी नजर आए जो लंबे समय से शांत थे या कहें कि अवसाद ग्रस्त परिस्थितियों का शिकार थे। राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रादेशिक स्तर से होते हुए जिला स्तर तक कांग्रेस काफी सक्रिय भूमिका में विपक्ष का रोल अदा कर रही है। कांग्रेस की सक्रियता से अब पार्टी कार्यक्रमों से किनारा कर चुके लोग भी पुन: सक्रिय हो रहे हैं। प्रशासनिक स्तर से भी गोपनीय सूचनाएं सरकार को भेजी जा रही हैं उसमें भी इन तमाम बातों का उल्लेख किया जा रहा है।

शशांक पर 58 राजनीतिक मुक़दमें, 42 लाठीचार्ज , 52 जेल यात्रा
2007 से लेकर 2020 के कार्यकाल में जबलपुर युवा कांग्रेस की राजनीति में एक ऐसा नाम शशांक दुबे बहुत सक्रिय और बहुत ऊंचाइयों पर था, जिसने पार्टी के एजेंडों और निदेर्शों के परिपालन में आंदोलन प्रदर्शनों की रूपरेखा इस कदर तैयार की कि उनके नेतृत्व के आंदोलन प्रदर्शन में 42 बार लाठी चार्ज हुआ। जिसमें कई बार शशांक गंभीर रूप से घायल हुए। राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शनों में शशांक पर 58 प्रकरण दर्ज हुए जो शायद ही मध्य प्रदेश के किसी युवा नेता के ऊपर इतने प्रकरण दर्ज हुए हों। 52 बार अन्य राजनीतिक प्रदर्शनों के बाद हुई कार्रवाई में शशांक को जेल यात्रा करनी पड़ी। लेकिन 4 सालों से पार्टी ने अपने शशांक जैसे कई ऊर्जावान लड़ाकू और झुझारू लोगों को घर बैठा दिया है और पैर पडऩे वाले चापलूसों को पदों से नवाजा गया है। 2007 से 2009 तक शशांक दुबे शहर एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष रहे फिर 2012 तक प्रदेश यूथ में प्रवक्ता का दायित्व निभाया। इसके पश्चात 2018 तक शशांक को लोकसभा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष की जवाबदारी सौपी गई। 2018 से 2020 तक शशांक प्रदेश यूथ कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे हैं।


शशांक दुबे, रत्नेश अवस्थी जैसे लड़ाकू कार्यकर्ताओं की कमी की गई महसूस
कांग्रेस जिस प्रकार से अब जनता की बात उठाने के लिए सत्ता पक्ष पर आरोप लगाकर आक्रामक हमले कर रही है और प्रदर्शन हो रहे हैं ऐसे में कांग्रेस के उन जुझारू और लड़ाकू युवा नेता युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं की कमी महसूस की जा रही है जिनके आंदोलन पर बिना हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर के पुलिस के जवानों को तैनात नहीं किया जाता था। इसको कांग्रेस पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की ही कमी मानी जाएगी जो शशांक दुबे, रत्नेश अवस्थी और इस दौर के कई ऐसे युवा, झुझारू, मुद्दों को लेकर आक्रामक लड़ाकू जोशीले नेताओं को पार्टी ने घर बैठाकर रखा है। अपने सामर्थ के अनुरूप नगर कांग्रेस के संगठन को लगातार सक्रिय बनाए रखने में तत्पर नजर आने वाले अध्यक्ष सौरभ शर्मा भी अन्य निगम, मंडलों और कांग्रेस की इकाइयों की नियुक्ति पाकर बैठे लोगों की सुस्ती और निष्क्रियता से ऐसे आंदोलन में अलग-थलग पड़ते नजर आते हैं।अनुभवहीन ऐसे लोगों के हाथ में महत्वपूर्ण पदों की कमान दे दी गई है। जिस दल के वह नेता बने हैं उस दल के लोग अपने तथाकथित नेता के समर्थक नहीं नजर आते। कांगे्रसजनों का कहना है कि अभी भी समय है कि कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व नगर के नेताओं के साथ मिलकर अपने ऐसे लड़ाके कार्यकर्ताओं की सूची तैयार कर उनको मनाकर वापस पार्टी के लिए सक्रिय कर ले तो आने वाले आंदोलन में कांग्रेस और बेहतर तरीके से जनता तक अपनी आवाज पहुँचा सकती है। आज भी कुछ नाम ऐसे हैं जिन पर सत्ता पक्ष किसी भी स्थिति में दबाव बनाने में सफल नहीं हो पाता। ऐसे ही नाम का चयन कर उन्हें आगे करना होगा। केवल पदों पर बैठकर आर्थिक लाभ अर्जित करने वालों को दर किनार करने की आवश्यकता है।
Author: Jai Lok






