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हर बड़ी दुर्घटना के बाद निकलता है जाँच का जिन्न!  फिर सेटिंग के मंत्रों से वापस चला जाता हैं नोटिस वाले लिफाफे में

ऐसी लापरवाहियाँ रही तो लखनऊ जैसा कांड जबलपुर में भी संभव है

जबलपुर (जय लोक)। लखनऊ के अलीगंज में स्थित कोचिंग सेंटर में लगी आग से 15 लोगों की मौत हुई जिनमें अधिकांश कोचिंग सेंटर के बच्चे थे। बड़ी घटना थी इसलिए पूरे देश में हल्ला मचना स्वाभाविक बात है। जबलपुर में भी इस बड़े घटनाक्रम की दस्तक हुई है। इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं घटित हुई थीं, उस समय भी जाँच का जिन्न बाहर निकाला था। लेकिन फिर सेटिंग के मन्त्रों से उसी लिफाफे में नोटिस बंद हो गए जिस लिफाफे में शासन के विभिन्न विभागों द्वारा उन्हें नोटिस भेजा गया था। एक बार फिर बड़ी घटना देश में हुई है मासूम बच्चों की जान गई है। लापरवाही उस भवन की थी जिसमें आपातकालीन निकासी का रास्ता नहीं था। यह भी प्रकाश में आया है कि उस भवन को रहवासी अनुमति प्राप्त हुई थी लेकिन इसका व्यावसायिक उपयोग कई वर्षों से किया जा रहा था। फायर सेफ्टी इंतजाम नहीं थे इसलिए घटना हुई। यहां तक की व्यापारिक प्रतिष्ठान चलाने वालों ने अपने स्तर पर भी ना तो फायर एक्सटिंग्विशर रखे थे और ना ही रेत या आपातकालीन स्थिति में आग बुझाने के लिए पानी को स्टोर करके रखा गया था।

शहर में मौजूद हैं 25 बड़े कोचिंग संस्थान
आज फिर सुबह से इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जबलपुर में भी लगभग 25 ऐसे बड़े कोचिंग संस्थान हैं जहां बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों से लेकर कॉलेज के बच्चे और विशेष कर ग्यारहवीं-बारहवीं की कक्षाओं में अपने शैक्षणिक जीवन की डगर चुनने वाले बच्चे बड़ी संख्या में जाते हैं। अब जबलपुर में संचालित हो रहे ऐसे नियम विरूद्ध कोचिंग संस्थान के प्रति भी खतरे की घंटी बजी है। एक बार फिर उनकी सूची बनेगी यह जांच के दायरे में आएंगे। लेकिन उसके बाद क्या पूर्व की तरह ही नोटिस का लिफाफा वापस

पलट कर इस पूरी जाँच की आँच को ठंडा कर देगा यह सवाल सभी के मन में उठ रहे हैं।
बहुत सारे बिंदु हैं जिन पर प्रशासन को सख्ती से संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी पड़ेगी। विजय नगर एमआर-4 रोड पर बहुत से ऐसे रहवासी भवन हैं जिन पर कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश लोगों के पास अनुमति नहीं है। भवन स्वामियों ने मोटे किराए की लालच में कोचिंग संस्थानों को भवन दे दिए हैं लेकिन इनमें ना तो आग बुझाने के इंतजाम हैं ना ही आपातकाल स्थिति के लिए निकासी द्वार हैं। बहुत से संस्थान ऐसे स्थान पर मौजूद हैं जहां पर किसी भी प्रकार की दुर्घटना के समय आसानी से दमकल के वाहन भी पहुंच नहीं सकते।

गुजरात हादसे के बाद भी नहीं लिया सबक
लखनऊ की तरह पहले भी गुजरात में कोचिंग संस्थान में आग लगने की एक बड़ी घटना हुई थी। उस वक्त भी गुजरात की घटना से सबक लेकर शहर के कोचिंग संस्थानों को नोटिस दिए गए थे। अलग अलग बिंदुओं पर सुधार करने के लिए निर्देश दिए गए थे। लेकिन समय के साथ प्राथमिकता बदलती है। पलट कर किसी ने भी नहीं देखा कि उन निर्देशन का पालन हुआ या नहीं।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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