
गिनती के अनुसार 6 लापता, 4 का अधिकृत रिकॉर्ड, तलाश जारी, जल निगम और मैकल रिसोर्ट की दूसरी बोट ने बचाई 15 से अधिक जानें, 24 घंटे डटे रहे मंत्री, विधायक, कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर, एसपी और पूरी टीम
जबलपुर (जय लोक)। किसी भी हादसे के बाद पहले के कुछ घंटे बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं। शुरुआत के दौर में जो बचाव कार्य किया जाता है वहीं अधिकांश जिंदगी को बचा पाता है। बरगी बांध में कू्रज पलटने की घटना की खबर 6:15 शाम को सामने आई। सबसे पहले वहां काम कर रहे जल निगम के ठेकेदार के कर्मचारी और वहां के लोगों ने तत्काल बचाव कार्य में अपनी जान जोखिम में डालकर पानी में गिरे लोगों को निकलना शुरू किया। इस दौरान मैकल रिसोर्ट की दूसरी बोट भी तत्काल मौके पर पहुँची और पानी में गिरे लोगों को निकालने के कार्य में जुट गई। जो लोग सुरक्षित पानी से बाहर निकाले गए उन्हें तत्काल अस्पताल भिजवाया गया। 7:00 कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए थे। कुछ ही देर में जबलपुर कमिश्नर धनंजय सिंह भदोरिया, आईजी प्रमोद वर्मा, डीआईजी अतुल सिंह भी मौके पर पहुंच गए और बचाव कार्य के लिए हर जरूरी साधन संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने का कार्य शुरू हुआ।

बरगी बांध में क्रूज़ पलटने का जो दुखद हादसा हुआ है उसमें क्रूज़ के संचालन के जवाबदार लोगों की लापरवाही खुलकर सामने आई है। 3 लोगों को नौकरी से बर्खास्त किया गया है, एक निलंबित हुआ है, एक अधिकारी को मुख्यालय अटैच किया गया है। हादसे में हुई 9 मौतों के बाद 900 सवाल खड़े है। यह सवाल भी बरगी बांध की गहराई में आने वाले समय में डूब जाएंगे।

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने जय लोक को बताया कि शुरुआती दौर में क्रूज़ के पास पहुंच पाना बहुत ही कठिन हो रहा था। इसलिए तत्काल पहाड़ी को समतलीकरण कर वाहनों के आने जाने के लिए रात में ही रास्ता बनाने का कार्य प्रारंभ हुआ।
जो लोग क्रूज़ के डूबते समय पानी में कूद गए थे या निकल कर बाहर आ गए थे उन्हें लगभग जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रहे इंटेक वेल के ठेकेदार एवं निगम की मशीनरी, स्थानीय गोताखोर और एमपीटी की दूसरी बोट के माध्यम से किनारे पर लाया जा चुका था। अब सभी का ध्यान क्रूज़ में फंसे हुए लोगों पर था।


घाट तक वाहन आने के बाद यह समझ में आया क्रेन की पहुंच डूबे हुए क्रूज़ तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके बाद तत्काल पानी में मिट्टी पत्थर डालकर 50-60 फीट अंदर तक और रास्ता बनाया गया यह पूरा कार्य रात के अंधेरे में चलता रहा। जल जीवन मिशन के कार्य में लगे एक इंजीनियर आलोक तिवारी और पोकलेन मशीन के ड्राइवर ने इस पूरे कार्य के दौरान प्रसंसनीय भूमिका निभाई।
एनडीआरएफ की टीमों को मिला फायदा
इसका फायदा यह हुआ कि सुबह जब एनडीआरएफ एसडीआरएफ के गोताखोर और उनकी टीम घटनास्थल पर पहुंची तो उन्हें तत्काल पानी के निकट तक पहुंचाने का रास्ता बना हुआ मिला। जिसके कारण वे बिना समय गंवाए उजाला होते ही छोटी मोटर बोट और गोताखोरों के दलों के साथ पानी में उतरकर क्रूज़ तक पहुंच गए।
रात में ही खींचना प्रारंभ कर दिया गया था कू्रज को
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि बिना देरी किए उपलब्ध साधन संसाधनों के अनुसार क्रेन, पोकलेन मशीन की मजबूत तारों से डूबे हुए क्रूज़ को बाँधकर किनारे तक लाया जाए। तत्काल इसके प्रयास शुरू किए गए। कुछ दूर तक क्रूज़ खिसक कर आया भी, लेकिन फिर चट्टान में फंस जाने के कारण पोकलेन मशीन के तार टूट गए। फिर प्रयास किया गया लेकिन फिर तार टूटे। इसके बाद वहां उपस्थिति मानवीय संसाधनों का उपयोग करते हुए रस्सी के सहारे भी क्रूज़ को और खींचने का प्रयास किया गया लेकिन चट्टानों में फंसने के कारण वह ठहर गया।
घरों से बुलाया गया ड्राइवर को
हादसे के तत्काल बात पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने संबंधित थाना प्रभारी को सक्रिय किया और कहां से जल्द से जल्द बड़ी मशीनें मिल सकती है यह देखा गया। कुछ जगह मशीन उपलब्ध थी लेकिन ड्राइवर नहीं थे तत्काल पुलिस टीम को सक्रिय कर कुछ ही देर में ड्राइवरों को मामले की गंभीरता बताते हुए तत्काल मौके पर लाया गया।
2023 में डीजल से मोटर वोट और क्रूज़ चलाना अवैध था
जानकार यह भी बता रहे हैं कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2023 में ही बरगी बाँध में मोटर वोट और क्रूज़ का संचालन डीजल से करने पर रोक लगा दी थी। लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रोक को पर्यटन विभाग ने ठेंगा दिखाते हुए बरगी बाँध में कू्रज और मोटर वोट को डीजल से चलाना जारी रखा।
विमान से भेजे गृह नगर भेजे जा रहे शव
बरगी क्रूज़ हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के पार्थिव शरीर उनके गृह नगर भेजे जाने की व्यवस्था कर ली गई है। खमरिया फैक्ट्री में कार्यरत कामराज के परिवार के दो मृतकों के पार्थिव शरीर आज शाम चार्टर विमान के माध्यम से तमिलनाडु भेजे जा रहे हैं। वहां उनके गृह नगर में शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहीं दिल्ली से जबलपुर आए एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर को सुबह विमान के कार्गो के जरिए दिल्ली रवाना कर दिया गया।
Author: Jai Lok






