
भोपाल (जयलोक) राज्य सरकार ने 58 साल पुराने मप्र जेल नियम 1968 में बदलाव कर दिया है। अब मेहतर के रुप में नियोजित कैदियों को उनके कर्तव्य पालन पर कोई पुरुस्कार नहीं दिया जायेगा। पहले उन्हें प्रति माह निश्चित राशि उपादान के रुप में देने का प्रावधान था। नये बदलाव के अनुसार, अब 5 बंदियों के लिये जेल में एक शौचालय सीट होगी जबकि दिव्यांग बंदियों के लिये हर वार्ड में एक पश्चिमी शैली का शौचालय होगा।
इसी प्रकार, पृथक सेल में एक शौचालय होगा और प्रत्येक शौचालय में बंदियों के लिये प्लास्टिक बाल्टी और बड़ा मग रखा जायेगा एवं बैरक में और बैरक के बाहर शौचालय और मूत्रालय होंगे। शौच के बाद हाथ धोने के लिये शौचालय के बाहर एक पानी की टंकी का निर्माण किया जायेगा तथा बंदियों को हाथ धोने के लिये प्रति माह एक अतिरिक्त 75 ग्राम का साबुन दिया जायेगा।
जेल के पदधारियों के लिये जेल परिसर के बाहर कार्यालय में शौचालय बनाना होगा जिसमें महिलाओं के लिये सुरक्षित स्थान पर पृथक शौचालय होगा। इसके अलावा, अब बंदियों के लिये बनाये जाने वाली रोटी को स्वचालित उपकरण से बनाया जायेगा जोकि न ही कच्ची होगी और न ही जली हुई होगी। बंदियों को जेल अधीक्षक की साप्ताहिक परेड से पूर्ववर्ती दिन स्नान परेड के समय अपने कपड़े धोने होंगे तथा कंबल, कोट तथा बिस्तर प्रत्येक तिमाही में एक बार उबाले जायेंगे। जिन केंद्रीय एवं जिला जेल में बंदियों की संख्या अधिक होगी वहां स्वचालित मशीनों से वस्त्रों की धुलाई होगी एवं बंदियों के गीले वस्त्र सुखाने के लिये आवश्यक व्यवस्था की जायेगी।
Author: Jai Lok






