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कुंभ को नाटक नौटंकी का केंद्र ना बनाएं

ऐसे संतों के दुर्लभ दर्शन प्राप्त करें

डॉ नवीन जोशी
प्रयागराज। महाकुंभ चित्र में आप जिन महात्मा के आप दर्शन कर रहे हैं वह श्री अनंतानंत सरस्वती जी हे, पूर्णत: परिवार्जक हे वह अपने सन्यास जीवन के पश्चात किसी भी प्रकार का वाहन प्रयोग नहीं करते हमेशा पैदल भ्रमण करते हैं, साथ में केवल भिक्षा पात्र रखते हैं, प्रयाग कुंभ में आने के लिए बद्रीविशाल से पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं , वास्तव में कुंभ का वास्तविक आनंद यही लोग प्राप्त कर रहे हैं,
एक और हम लोग किन्नर अखाड़ा , हर्षा रिछारिया की सुन्दरता,मोनालिसा की आंखे और तरह-तरह की सिलेब्रिटियों पर चर्चा करके उनको कुंभ का मुख्य व्यक्ति मान केंद्र बिंदु बना देते हैं ,वास्तव में कुंभ के मुख्य इस प्रकार के संत हैं।
हमे कुंभ से ऐसे दिव्य सन्तो की महिमा समाज मे पहचानी चाहिए ताकि समाज में सनातन के अध्यात्म सनातन के त्याग सनातन की तपस्या की जानकारी लग सके।
कुंभ से फालतू के युटयुबरों द्वारा फालतू के ब्रेकिंग को छोडक़र हमें कुंभ से सनातन संतो सनातनी आध्यात्मिक को बाहर लाना चाहिए।
कुंभ में एक से एक दिव्य सन्त आए हैं समाज को उनसे परिचित कराए। सन्त भारत की आत्मा है। और कुंभ दिव्य संतों का महासागर है इस कुंभ रूपी महासागर से तपस्वी संत रूपी मोती निकाल कर लाएं तू की मोनालिसा की आंखों और फालतू के नाटक नौटंकियों को कुंभ का केंद्र ना बनाएं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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