
नीलगाय और दूसरे जंगली जानवरों को पकडऩे 3 बार बुला चुके टेंडर
भोपाल (जयलोक)। मप्र में नीलगाय और काले हिरण को पकडऩे के लिए सरकार को रॉबिन्सन 44 हेलीकॉप्टर नहीं मिल पा रहा। राज्य सरकार इसके लिए 3 बार टेंडर बुला चुकी है लेकिन अभी तक किसी भी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। अब राज्य सरकार ने इसके लिए उपयुक्त हेलीकॉप्टर उपलब्ध करने के लिए प्रमुख सचिव विमानन मंत्रालय से अनुरोध किया है। राज्य सरकार की कोशिश है की फसल को नुकसान पहुंचा रही नीलगाय और काले हिरण को हेलीकॉप्टर से पकड़ कर दूसरे स्थान पर छोड़ा जाए। मुख्यमंत्री आवास पर हुई मप्र टाइगर फाउंडेशन समिति की 15वीं आमसभा की बैठक सीएम डॉ मोहन यादव ने प्रदेश में रेस्क्यू सेंटर कम जू स्थापित करने के प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि मप्र के जंगलों में बाघ, चीता, सांभर, हाथी सभी मौजूद हैं। वनों में रह रहे हाथियों की भी चिंता करें। इनके भोजन की व्यवस्था करें। इसके लिए घास के मैदान बनाएं ताकि वे भोजन की तलाश में आबादी क्षेत्रों में यहां-वहां न भटकें। इससे किसानों की फसल हानि रूकेगी।
वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर कम जू होगा स्थापित
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए जहां बेहतर सुविधा उपलब्ध हो वहां वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर कम जू स्थापित करने के लिए केन्द्र सरकार, सेंट्रल जू अथॉरिटी और अन्य वन्य जीव संस्थानों से मार्गदर्शन लेकर इस दिशा में आगे बढ़ें। वन्य जीवों को खुले में देखना पर्यटकों के लिए हमेशा आकर्षक होता है। इससे मप्र में वन्य जीव पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में किसानों को जंगली पशुओं से होने वाली फसल हानि को रोकने के लिए कार्य योजना बनाई गई है। इन्हें पकडकऱ दूसरे स्थान पर छोडऩे के लिए रॉबिन्सन 44 हेलीकॉप्टर किराये पर लिया जाना है। इसके लिए ई-टेंडर के जरिए निविदाएं भी बुलाई गईं। बैठक में बताया गया? कि समिति द्वारा पेंच, सतपुड़ा, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रालामण्डल, कूनो, गांधीसागर, वन्य जीव अभयारण्य और माधव राष्ट्रीय उद्यान में अब तक 180 जागरूकता कैंप लगाए जा चुके हैं। मप्र टाइगर फाउंडेशन समिति द्वारा वन भवन में एक स्मारिका दुकान स्थापित की जाएगी। यह समिति द्वारा ही संचालित की जाएगी।
वनकर्मियों को मिलेगी 5 लाख रुपये की मदद
प्रदेश के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्रों में काम करने वाले वनकर्मियों की वन्य जीव संरक्षण और रेस्क्यू कार्यों में आकस्मिक दुर्घटनाओं के दौरान गंभीर रूप से घायल होने पर वनकर्मियों को उपचार के लिए तत्काल राशि की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में उपचार के लिए तात्कालिक आर्थिक मदद के रूप में 5 लाख रुपये की राशि की मदद की जाएगी। जरूरत होने पर एयर एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक राशि का भुगतान मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति के अंतर्गत वन्यजीव संरक्षण योजनाओं अंतर्गत स्वीकृत कॉपर्स फंड से किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया।
Author: Jai Lok







