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कौन रोकेगा इस लूट को, दुग्ध माफिया की साजिश

गरीबों की पहुँच से दूर हुआ दूध
ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं बढे दाम, 50 रुपए लीटर भी मिल रहा अच्छा दूध

जबलपुर (जय लोक)। जिले में एक बार फिर सक्रिय दुग्ध माफिया ने त्यौहारों के ठीक पहले गरीबों और मरीजों के पेट पर लात मारते हुए मुनाफाखोरी के चक्कर में दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। जो आर्थिक रूप से सक्षम है वह लोग सरकार को, प्रशासन को कोस-कोस  कर चुपचाप महंगे दामों पर दूध खरीदना शुरू कर देते हैं। इसी का फायदा उठाकर दुग्ध माफिया आम गरीबों और सामान्य वर्ग के लोगों पर भी इस मुनाफाखोरी का हंटर चला देता है। वर्तमान में भी एक बार फिर दुग्ध माफिया ने अपनी चाल चल दी है। गो पालन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री चारा,भूसा और रखरखाव जितना महंगा हुआ नहीं है उससे अधिक का हल्ला मचा कर यह दबाव बनाने का खेल खेला जा रहा है। वहीं इसकी दूसरी और शहरी क्षेत्र से कुछ मात्र किलोमीटर की दूरी में स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में और कस्बों में आज भी अच्छी किस्म का गाय और भैंस का दूध 50 से 55 रुपए लीटर मिल रहा है। दुग्ध माफिया के लोग ग्रामीण क्षेत्र में दूध का उत्पादन करने वाले लोगों से यही दूध सस्ते दामों पर खरीद कर और उसमें मिलावट कर उसकी मात्रा बढ़ाकर शहर में सप्लाई कर रहे हैं।
शहर के कुछ एक डेरी वाले भी इस दूध की दामों में की जा रही अनर्गल वृद्धि को गलत बता रहे हैं।  लेकिन उन पर अन्य दूध व्यापारी और डेयरी वालों का दबाव है कि वह भी कम दाम पर दूध नहीं बचेंगे। ऐसी स्थिति निर्मित की जा रही है कि आम आदमी मजबूर होकर महंगे रेट पर दूध खरीदने को मजबूर हो जाए।

हजारों लीटर दूध रोज जाता है शहर के बाहर
पूर्व में भी जब दुग्ध माफिया की हरकतों को संज्ञान में लिया गया था तब भी इस बात का खुलासा हुआ था कि जबलपुर से रोजाना हजारों लीटर दूध नागपुर सहित अन्य जिलों में टैंकर के माध्यम से बड़ी-बड़ी फैक्ट्री को सप्लाई किया जाता है। जहां पर दुग्ध  उत्पादों का निर्माण होता है। जबलपुर में कृषिम आभाव पैदा कर दूध के दाम बढऩे का खेल खेला जा रहा है।

सिंडिकेट बनाकर कर रहे काम
कुछ बड़े डेयरी संचालक सिंडिकेट बनाकर दुग्ध माफिया के रूप में कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की इन पर नकेल नहीं होने के कारण यह खुलेआम मनमानी पर उतारू है। पहले भी यह इस प्रकार से जबरदस्ती दाम बढऩे का काम कर चुके है। इनकी साजिश का हिस्सा है कि पहले दूध के दाम ज्यादा बढ़ा दिए जाए फिर जब शासन दबाव बनाये तो एक दो रूपये कम कर सब को चुप करवा दिया जाए।

मरीज बुजुर्ग, बच्चे सर्वाधिक प्रभावित
बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से दुग्ध माफिया ने पहले कुछ एक क्षेत्र में दूध के दाम बढ़ाये। जब इसका विरोध प्रबलता से नहीं हुआ प्रशासन की भी कोई हरकत नजर नहीं आई तब जाकर पूरे शहर में दुग्ध माफिया ने अपनी हरकत दिखाई। अब इसका सीधा असर अस्पताल में, घरों में मौजूद मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के दैनिक आहार से दूध के गायब होने के रूप में नजर आ रहा है।

अभिमान सभी का शत्रु है  डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज

Jai Lok
Author: Jai Lok

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