
जबलपुर (जयलोक)। 72 वर्षीय बुजुर्ग, जो लंबे समय से दांतों की समस्या और हड्डी की कमी से जूझ रहे थे उन्होंने नई मुस्कान पाई। डेंटल सर्जन डॉ. रोमिल सिंघई और उनकी टीम ने ज़ाइगोमैटिक और टेरीगोइड इम्प्लांट तकनीक का उपयोग डेंटल हाउस जबलपुर में मात्र 48 घंटों में उन्हें फिक्स्ड बत्तीसी लगा दी। पहले जहां उन्हें बताया गया था कि स्थायी दांत लगाना संभव नहीं है, वहीं अब वे फिर से खुलकर मुस्कुरा सकते हैं और आराम से खा सकते हैं।

महज 48 से 72 घंटों में लग जाती है फिक्स्ड बत्तीसी
डेंटल इम्प्लांट के पारंपरिक तरीकों में जहाँ मरीज को कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब फ्लैपलेस सर्जरी, गाइडेड इम्प्लांट टेक्नोलॉजी, ज़ाइगोमैटिक इम्प्लांट, टेरीगोइड इम्प्लांट एवं बाइकोर्टिकल इम्प्लांट्स तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके जबड़े में हड्डी ना के बराबर होने पर भी अब संभव है। इस आधुनिक पद्धति के माध्यम से महज 48 से 72 घंटों में ही मरीज को फिक्स्ड बत्तीसी दी जा रही है।
डेंटल हाउस के संचालक डॉ. रोमिल सिंघई द्वारा यह पहल ना सिर्फ तकनीकी रूप से उल्लेखनीय है, बल्कि जबलपुर के लिए गर्व का विषय भी है। डॉ. सिंघई का उद्देश्य है कि हर मरीज को बिना किसी समझौते के अपने ही शहर में संपूर्ण और स्थायी समाधान मिले।

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Author: Jai Lok







