
नई दिल्ली (एजेंसी/जयलोक)। यदि आप ड्रीम 11 पर टीम बनाने, ऑनलाइन पोकर या रम्मी खेलने के शौकीन हैं, तब आपकी जेब से मोटी रकम जाने वाली है। दरअसल मोदी सरकार जीएसटी ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। इसके अनुसार ऑनलाइन गेमिंग, सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू जैसी सिन और डीमेरिट गुड्स की श्रेणी में रखा जा सकता है। इस श्रेणी में 40 प्रतिशत तक टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस तरह की सेवाओं का समाज पर नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए इन पर अधिक कर वसूलन बहुत जरूरी है। अभी तक देश में ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाता है, इस 28 प्रतिशत कर से कंपनियां पहले ही परेशान हैं और लगातार राहत की मांग कर रही हैं। लेकिन यदि टैक्स 40 प्रतिशत तक पहुंचाता है, तब गेंमिग इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 2023 में जब 28 प्रतिशत जीएसटी लागू किया गया, तब भी यूजर्स की संख्या या उनके खर्च पर खास असर नहीं पड़ा, बल्कि टैक्स वसूली तेजी से बढ़ गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि छह महीनों में टैक्स कलेक्शन 1,349 करोड़ से बढक़र 6,909 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, यानी करीब 412 प्रतिशत की वृद्धि।नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में लोग हर महीने औसतन 10,000 करोड़ रुपये ऑनलाइन गेमिंग पर खर्च कर रहे हैं। सालाना यह खर्च करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचता है। यदि मौजूदा दर पर जीएसटी कर लगाने पर मोदी सरकार को करीब 33,600 करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं, जबकि 40 प्रतिशत की दर पर यह आंकड़ा बढक़र 48,000 करोड़ रुपये हो सकता है। यानी सरकार की कमाई में सालाना करीब 14,400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, यह इस शर्त पर निर्भर करता है कि यूजर का खर्च कम न हो।विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स बढऩे से यूजर्स और कंपनियों, दोनों पर असर पड़ सकता है। यदि कोई यूजर 1,000 रुपये जमा करता है, तब फिलहाल उसे 720 रुपये गेमिंग के लिए मिलते हैं और 280 रुपये टैक्स के रूप में कट जाते हैं। लेकिन 40 प्रतिशत की दर लागू होने पर टैक्स 400 रुपये होगा और केवल 600 रुपये ही खेलने के लिए बचने वाले है। इसका सीधा असर कंपनियों की कमाई और यूजर्स की जीत की राशि पर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री से 15.5 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं और औसतन 11 करोड़ लोग रोजाना इसमें हिस्सा लेते हैं। करीब 400 से ज्यादा कंपनियां इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और शीर्ष 10 कंपनियां ही 90 प्रतिशत टैक्स अदा करती हैं। ऐसे में प्रस्तावित टैक्स वृद्धि से यह सेक्टर और कंपनियां दोनों बड़े दबाव में आ सकती हैं।

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Author: Jai Lok







