
जबलपुर (जयलोक)। भारतीय जनता पार्टी जबलपुर नगर की संगठन सूची बहु प्रतिक्षित है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार लोग अपने-अपने गुणा भाग के तर्क देकर बातें कर रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहले मीडिया में इस बात को फैलाया गया कि संगठन के विस्तार के लिए संभावित सूची लीक हो गई है और इसमें किस-किस के नाम है यह सब भी प्रचारित-प्रसारित करवाया गया।
अब इस सूची लीक होने की पूरी घटना को राजनीतिक खेल का हिस्सा और षड्यंत्र के तहत रची गई साजिश होने की चर्चा जबलपुर से लेकर भोपाल तक चल रही है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसने अपने लाभ के लिए या दूसरे के नुकसान के लिए प्रस्तावित संगठन विस्तार की सूची लीक होने का हल्ला मचवाया।
जबलपुर में जनप्रतिनिधियों के बीच की खींचतान किसी से छिपी नहीं है। प्रतिद्वंद्विता ऐसी है कि मटके में बंद सारे मेंढक एक दूसरे के ऊपर कूद रहे हैं एक-दूसरे को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बाहर से देखने वाले को यही लग रहा है कि मटके में सभी साथ में रह रहे हैं। सूची लीक होने का हल्ला मचाने वाले ने भी किसी को लाभ पहुँचाने और किसी के नुकसान पहुँचने के नियत से ही यह राजनीतिक षड्यंत्र रचा।
हालांकि वर्तमान में भाजपा के नगर अध्यक्ष का पद संभाल रहे रत्नेश सोनकर पूर्व में महामंत्री भी रह चुके हैं और उन्होंने संगठन के कार्यों को बारीकी से देखा समझा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के कारण उन्हें व्यक्तियों के चयन और प्रतिभाओं को आगे लाने का अच्छा प्रशिक्षण पहले से ही प्राप्त है।
महामंत्री से अध्यक्ष बने रत्नेश सोनकर सभी दावेदारों की और संगठन में प्रवेश पाने के लिए गुणा भाग कर रहे हैं लोगों की भली-भांति नब्ज भी जानते हैं।
वो भी किसी प्रकार के हल्के राजनीतिक षड्यंत्र, दबाव में आकर संगठन में ऐरे-गैरे नाम को शामिल नहीं करेंगे।
यह बात तो तय है कि संगठन के प्रति समर्पण रखने वाले कुछ एक नाम तय माने जा रहे हैं। उनका विरोध भी ऐसे लोग कर रहे हैं जो उन्हें अपना राजनीतिक प्रतिद्वंदी मानते हैं। लेकिन यह भी राजनीति का एक नियम है की प्रतिद्वंद्विता से साफ-सुथरी और अधिक समर्पण की राजनीति को बल मिलता है।
पश्चिम के विधायक एवं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह पहले ही कह चुके हैं कि संगठन विस्तार के मामले में अध्यक्ष अपने आंकलन समझदारी से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। वे किसी के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करते और उनके समर्थकों का कहना है कि वह ऐसी गुटबाजी की राजनीति से दूर रहना ही पसंद करते हैं। संपूर्ण जिले के भाजपा के पदाधिकारी से उनका जुड़ाव है और वह इनकार और रजामंदी के इस पचड़े में पडऩा ही नहीं चाहते है।
बाकी के कुछ विधायक है जो अपने लोगों को हर हाल में संगठन में शामिल करने की बात को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बन चुके हैं। उनकी ओर से इसको लेकर दबाव और प्रयास किया जा रहे हैं।
कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे भी हैं जो योग्य नाम को केवल इसलिए संगठन में पदाधिकारी के रूप में नहीं देखना चाहते क्योंकि वह भविष्य में उनके क्षेत्र से आने वाले समय में उनके प्रतिद्वंदी बन सकते हैं या फिर उनके प्रभाव को कम कर सकते हैं।
नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर के पास जितनी सिफारिशें पहुंच रही है उससे अधिक संख्या में उन नाम के अच्छे बुरे हर प्रकार के पहलू भी पहुँच रहे हैं। संघ और संगठन के तालमेल के अनुसार ही अंतिम सूची घोषित करने की तैयारी की जा रही है। संगठन में ऐसे ही व्यक्तियों को स्थान दिया जाएगा जो भाजपा को मजबूत करने की दिशा में और पद की गरिमा के अनुरूप कार्य कर सके। ना की पद का अपने व्यापार के लिए उपयोग करें।
पूर्व के संगठन पदाधिकारी की जेल यात्रा और कु-कृत्यों को नहीं बुलाया जा रहा
दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है। उसी तर्ज पर इस वर्ष जो नगर भाजपा संगठन के पदाधिकारी का चयन होना है वह इस बात को ध्यान में रखकर होगा कि जिनके नाम सामने आ रहे हैं उनका चरित्र और उनके कृत्य किस पृष्ठभूमि का है। व्यापारी किस्म के लोग तो लगातार जोर आजमाइश कर साम-दाम- दंड-भेद के माध्यम से संगठन में घुसपैठ कर पद पाना चाहते हैं। लेकिन पुराने संगठन के जो पदाधिकारी थे जो विभिन्न मामलों में जेल गए और भाजपा की छवि को खराब किया उनको लेकर इस बार हर नाम पर अच्छे से विचार किया जा रहा है।

प्रणीत का नाम मंत्री पद के लिए आगे
भाजपा के युवा नेता एवं वर्तमान नगर संगठन में भी मंत्री पद प्राप्त युवा नेता प्रणीत वर्मा का नाम इस बार भी मंत्री पद की दावेदारी में सबसे आगे बताया जा रहा है। कांग्रेस की राजनीति छोड़ भाजपा में आए प्रणीत वर्मा ने बहुत कम समय में भाजपा में बड़े पद पाने में सफलता प्राप्त की है। पूर्व में वो युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष युवा मोर्चा के महामंत्री और बाद में सीधे जिला संगठन में मंत्री के पद पर नियुक्त हुए। वर्तमान संगठन विस्तार में भी प्रणीत का नाम आगे चल रहा है।

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