
नाली, सडक़ से कचरा निकालने की संतुष्टि लेकिन उठाने की नहीं, जबकि पूरा काम कर रही है एक ही कंपनी, फिर क्यों दिया संतुष्टि पत्र?
79 वार्डों में सबसे अधिक 62 सफाई कर्मचारी और 8 कचरा उठाने वाले वाहन नेता प्रतिपक्ष के सुभद्रा कुमारी चौहान वार्ड में, फिर भी गंदगी का रोना
जबलपुर (जयलोक)। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम के जनप्रतिनिधि बेहतर से बेहतर व्यवस्था चाहते हैं। महापौर हों, अध्यक्ष हों, नेता प्रतिपक्ष हों, पार्षद हों, या आयुक्त नगर निगम हों लेकिन जब राजनीतिक बयानबाजी का हल्ला वस्तु स्थिति से अलग हो जाता है और अपनी राजनीतिक दुकान सजाने का काम शुरू हो जाता है तो जनता खुद ही सवाल उठाने लगती है। सुभद्रा कुमारी चौहान वार्ड के एक जागरूक नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर नेता प्रतिपक्ष द्वारा पिछले महीने अक्टूबर में अल्ट्रा क्लीन कंपनी के पक्ष में सफाई कार्य की संतुष्टि का दिया गया लेटर पैड पर पत्र सार्वजनिक किया है। इस पत्र ने नेता प्रतिपक्ष के दावे की पूरी पोल खोल दी है और उनके इस्तीफा देने के रास्ते को प्रशस्त कर दिया है। इतने बड़े खुलासे के बाद भी अगर नेता प्रतिपक्ष इस्तीफा नहीं देते तो वह अपनी कथनी और करनी में खुद ही अंतर कर रहे हैं।
विगत दिनों जय लोक ने यह विषय उठाया था कि अगर किसी वार्ड में सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है तो फिर वहां के संबंधित पार्षद चाहे वह कांग्रेस के हों या चाहे बीजेपी के संबंधित पार्षद हों वे ठेकेदार के पक्ष में संतुष्टि प्रमाण पत्र क्यों जारी करते हैं? क्योंकि बिना पार्षद के संतुष्टि प्रमाण पत्र के संबंधित ठेकेदार को भुगतान नहीं किए जाते हैं। मामला पैसे का है इसलिए उठाए जा रहे सवाल अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

नेता प्रतिपक्ष आए दिन सडक़ पर खड़े हो कर गंदगी का वीडियो बनाते हैं नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारियों पर महापौर और आयुक्त पर बड़े-बड़े आरोप लगाते हैं तो फिर वह अपने ही वार्ड में नाली साफ करने का, सडक़ों पर झाड़ू लगाने का, कचरा एकत्रित करने का और कचरे को उठाकर प्लांट तक ले जाने का कार्य करने वाली एकमात्र कंपनी अल्ट्रा क्लीन और केयर सर्विसेज के पक्ष में उसके कार्यों के प्रति संतुष्टि प्रमाण पत्र क्यों जारी कर रहे हैं। अगर यह कंपनी आधा अधूरा काम कर रही है तो इनको पूर्ण संतुष्टि प्रमाण पत्र देने के पीछे नेता प्रतिपक्ष का आशय क्या है?
जय लोक में प्रकाशित खबरों पर नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने अपनी सोशल मीडिया आईडी से यह प्रतिक्रिया दी थी कि प्राप्त जानकारी सही नहीं है और कोई भी पार्षद प्रमाणीकरण नहीं देता है, प्रमाणीकरण सफाई व्यवस्था जो झाड़ू लगती है, नाली सफाई होती है उसका दिया जाता है और डोर टू डोर और कचरा उठाने के लिए किसी भी प्रकार का प्रमाणीकरण किसी पार्षद ने नहीं दिया है, अगर कचरा उठाने का कोई भी प्रमाणीकरण या प्रमाण समक्ष आता है कि कचरा उठने और डोर टू डोर कचरा की व्यवस्था से पार्षद संतुष्ट है तो वह तुरंत इस्तीफा दे देंगे।
सक्रिय और सजग नेता प्रतिपक्ष बनने की भरसक कोशिश कर रहे अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रहे अमरीश मिश्रा यह भूल गए कि पिछले महीने की 7 अक्टूबर 2025 को ही उन्होंने अपने नेता प्रतिपक्ष के लेटर पैड पर संतुष्टि पत्र अल्ट्रा क्लीन और केयर सविज़्सेज के पक्ष में जारी किया है। यह वही कंपनी है जो नाली साफ करने, सडक़ पर झाड़ू लगाने, कचरा उठाने और परिवहन तक की जिम्मेदारी उठाती है यहां तक की इसी कंपनी के हेल्पर डोर टू डोर कचरा संग्रहित करने की व्यवस्था में लगे हुए। अगर यह कंपनी पूरा कार्य नहीं कर रही है और सिर्फ नाली और सडक़ साफ कर रही है तो फिर नेता प्रतिपक्ष ने इन्हें उपकृत करने के लिए या खुद उपकृत होने के लिए इन्हें प्रमाण पत्र क्यों जारी किया।

यह लिखा है पत्र में
नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा के लेटर पैड पर उनके द्वारा जारी किए गए पत्र में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि सुभद्रा कुमारी चौहान वार्ड में अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस द्वारा सफाई कर्मचारी लगाकर कराया गया सफाई कार्य संतोषजनक रहा है। जबकि यही कंपनी नाली सडक़ सफाई से लेकर कचरा उठाने ले जाने और घर-घर से कचरा एकत्रित करने का काम कर रही है तो फिर इस संतोषजनक प्रमाण पत्र के मायने स्वयं ही वे समझ जा सकते हैं।

झूठ पकड़ा गया तो, अब क्या इस्तीफा देंगे नेता प्रतिपक्ष?
नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने जयलोक की ख़बर पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट से इस बात का दावा किया था कि किसी भी प्रकार का प्रमाण पत्र जो की डोर टू डोर और कचरा उठाने से संबंधित हो और वह सामने आएगा तो वो तत्काल तुरंत इस्तीफा दे देंगे। अब सा प्रमाण यह बात पूरे शहर की जनता के समक्ष है कि नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने खुद अपने ही सुभद्रा कुमारी चौहान वार्ड में कचरा उठाने, नाली साफ करने, सडक़ पर झाड़ू लगाने, कचरा का परिवहन करने और डोर टू डोर कार्य में लगे अल्ट्रा क्लीन कंपनी के ही कचरा उठाने वाले हेल्पर होने के बावजूद भी खुद अपने लेटर पैड पर इन्हें संतोष जनक कार्य करने का प्रमाण पत्र दिया है। जिसके बाद ही उक्त कंपनी को नगर निगम के द्वारा भुगतान किया जाएगा। अब चर्चा इस बात की भी है कि भुगतान किसका होगा और फायदा किसको मिलेगा। प्रमाण अब सबके समक्ष है तो क्या तुरंत इस्तीफा देने के अपने दावे और नैतिकता के आधार पर जनता के समक्ष सच उजागर हो जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा अपनी बात पर खड़े रहते हुए इस्तीफा देंगे।
दूसरे वार्डों में जाकर बनाते हैं कचरे के वीडियो
विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस पार्षद दल का नेतृत्व कर रहे नेता प्रतिपक्ष के पक्ष में 29 में से आधे पार्षद भी नहीं है इस बात के अलग प्रमाण हैं। आए दिन यह दूसरे वार्ड में जाकर हल्ला मचाते हैं,सडक़ों पर खड़े होकर वीडियो बनाते हैं की कचरा उठाने का और उसे परिवहन करने का कार्य सही तरीके से नहीं हो रहा है। बहुत से इलाकों में यह बात सही भी है जहां कचरे के परिवहन मैं लगे वाहन नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं वहां कचरा 2-3 दिन तक पड़ा रहता है।
नेता प्रतिपक्ष कहते हैं सिर्फ झाड़ू लगने और नाली की सफाई का पार्षद प्रमाण पत्र देते हैं घर घर से कचरा कलेक्शन का नहीं। अब यह दोहरी मानसिकता की बात है जब सफाई कर्मचारी किसी भी वार्ड में जाकर नाली का कचरा निकाल रहा है और सडक़ों पर झाड़ू लग रही है तो या जो सडक़ों पर एकत्रित होने वाला कचरा है यह जा कहां रहा है। अगर कचरा उठ रहा है और इस बात की संतुष्टि हो रही है तभी तो संतुष्टि प्रमाण पत्र दिया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष के वार्ड में सबसे अधिक सफाईकर्मी और वाहन
सूत्रों के अनुसार वर्तंमान में 79 वार्डों में सर्वाधिक 62 सफाई कर्मचारी और 8 कचरा कलेक्शन वाले वाहन नेता प्रतिपक्ष बने पार्षद अमरीश मिश्रा के वार्ड सुभद्रा कुमारी चौहान में तैनात है। लेकिन इसके बावजूद भी अगर नेता प्रतिपक्ष सफाई कार्य से संतुष्ट नहीं है तो यह जनता के उन आरोपों को हवा देते हैं जो यह कहते हैं कि हमारे वार्ड में केवल हाजिरी का खेल हो रहा है ना सफाई कर्मचारी पूरी संख्या में आते हैं और ना ही घर घर कचरा का संग्रहण होता है। सामान्यत: अन्य सभी वार्डों में 40 या उससे कम सफाई कर्मचारियों की तैनाती है इतने कचरा कलेक्शन करने वाले वाहन भी अन्य किसी वार्ड में नहीं है।
खुद कांग्रेस पार्षद दल के अन्य सदस्य भी इन सभी बातों को मान रहे हैं। नाम उजागर न किए जाने की बात पर कांग्रेस के पार्षदों ने ही यह बताया कि नेता प्रतिपक्ष के समर्थन में चार पांच पार्षद से अधिक नहीं है वे अपने 1 साल के आंदोलन प्रदर्शन के वीडियो और फोटो खुद ही देख सकते हैं कि उनके साथ कितने पार्षद रहे हैं और कितने नहीं। कौन किसके पक्ष में काम कर रहा है और किस लाभ से काम कर रहा है यह अब जनता भी समझ रही है और कांग्रेस के अन्य पार्षद भी मूल विषय यह है कि सारे प्रमाण सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष अपनी चुनौती के अनुसार त्यागपत्र देंगे या नहीं।
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Author: Jai Lok







