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जबलपुर वित्त भी देता है और चित्त भी

शहर के कला जगत को नई पहचान दे गए आशुतोष राणा, कहा

परितोष वर्मा
जबलपुर (जयलोक)। अपने प्रेम प्रशंसा उपस्थिति और अपार समर्थन से हमारे मनोबल को हमारे विश्वास को बढ़ाया गया है। जबलपुर को वैसे ही संस्कारधानी कहा जाता है इसकी वजह है कि जबलपुर के लोग साहित्य के धर्म को ही नहीं साहित्य के मर्म को भी समझ पाने में समर्थ होते हैं। यह कहना है वरिष्ठ अभिनेता आशुतोष राणा का।
विगत दिनों 29 और 30 नवंबर को जबलपुर में हमारे राम का जीवंत मंचन हुआ। यह 19 महीने का 356वां मंचन था। विद्युत मंडल के तरंग प्रेक्षागृह में इसके चार शो आयोजित हुए और यह सभी के सभी शो हाउसफुल गए। यह बात बड़ी महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके प्रख्यात अभिनेता आशुतोष राणा ने खुले मन से अंतिम शो के बाद जो बात सार्वजनिक रूप से साझा की उससे जबलपुर शहर की पहचान कला जगत और कला प्रेमियों के बीच अब निश्चित रूप से बदलेगी। आशुतोष राणा ने कहा कि उनका भ्रम खत्म हुआ और संशय भी समाप्त हुआ अब जबलपुर वित्त भी देता है और चित्त भी देता है।
बहु प्रशंसित इस नाट्य मंचन का अंतिम शो देखने का अवसर मुझे सपत्नीक प्राप्त हुआ। लगभग 150 लोगों की कलाकारों और कॉस्ट एंड कू्र मेंबर की यह टीम जबलपुर के मानस पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ गई है। हमने बहुत अरसे पहले महाराष्ट्र समाज द्वारा आयोजित जाणता राजा का जीवंत मंचन देखा था। जिसमें घोड़े आदि का भी उपयोग किया गया था।  अरसे के बाद फिर एक अवसर आया जब आशुतोष राणा जैसे प्रतिष्ठित कलाकार के साथ ही मंजे हुई थिएटर आर्टिस्ट को और उनके अभिनय से रूबरू होने का अवसर मिला।
नाट्य समाप्ति के बाद कलाकारों का परिचय हुआ। अंत में हमारे राम नाट्य के प्रमुख अभिनेता आशुतोष राणा जिन्होंने इस नाटक में रावण की भूमिका निभाई है, वो मंच पर दर्शकों से बात करने आए और उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त की और अपने अनुभव साझा किये।

आशुतोष राणा के बारे में यह सब जानते हैं कि वह भी समीप स्थित नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के रहने वाले हैं साथ ही उनका जबलपुर से भी गहरा नाता रहा है। इन दोनों शहरों के बारे में उनके मन मस्तिष्क में जो भाव थे और सफल चार शो करने के बाद जो भाव आए उसके बारे में उन्होंने खुले मन से अपनी मन की बात सभी से साझा की।
श्री राणा ने कहा कि जबलपुर आने में उन्हें 356 शो का लंबा समय लग गया। इसके पीछे उनके मन में बड़ी शंका थी कि उनका अनुभव और उन्हें मिली प्रतिक्रिया जबलपुर के बारे में यही बात मन में उठा रही थी कि जबलपुर में टिकट खरीद कर नाट्य कार्यक्रम देखने का चलन नहीं है बल्कि इसके लिए पास का जुगाड़ कैसे हो सकता है इस पर अधिक जोर लगाया जाता है। क्योंकि यह नाट्य मंचन बड़े कलाकारों के साथ ही बड़ी संख्या में कलाकारों को लेकर और सभी व्यवस्थाओं को लेकर चलता है इसलिए इसके सफल संचालन के लिए वित्त तो आवश्यक है।
जबलपुर में हमारे राम के मंचन को लेकर जब लगातार माँग बढऩे लगी तो उन्होंने अपने परिचितों से अपने साथी कलाकारों से इस बात की चर्चा की। श्री राणा ने कहा कि हास्य कलाकार राजेश मिश्रा और उनके अन्य साथियों ने भी इस बात का संबल दिया कि अब वक्त बदला है और निश्चित रूप से जबलपुर एवं आसपास के लोग इस ऐतिहासिक नाट्य मंचन को देखने के लिए टिकट खरीद कर ही आएंगे। श्री राणा ने कहा कि अपनों के आश्वासन पर उन्होंने अपनी पूरी टीम से चर्चा की और इस बात की हिम्मत बांधकर वे जबलपुर आए की उनके चारों शो सफल होंगे।
लेकिन जबलपुरवासी कला प्रेमियों से मिले प्रेम के कारण उनके मन में जो यह छोटी सी आशंका थी वह पूरी तरीके से समाप्त हो गई है। मेरे राम के चारों शो हाउसफुल गए और यहां तक की अतिरिक्त कुर्सियां भी लगानी पड़ी। कला प्रेमियों ने मेरे राम के कलाकारों के प्रति जो प्रेम दिखाया इसका सकारात्मक प्रभाव अभिनेता आशुतोष राणा सहित सभी वरिष्ठ अभिनेताओं के मन में पड़ा। श्री राणा ने कहा कि मैं जबलपुर के कला प्रेमियों को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं जिनके कारण हमारा जबलपुर आना सफल रहा है और हम जल्द ही दोबारा आने का वादा भी करते हैं। उन्होंने कहा कि अब जबलपुर कला जगत के क्षेत्र में अलग पहचान रखेगा बड़े कलाकार बड़े नाट्य मंचन भी यहां हो सकेंगे।

3 घंटे का चित्त
श्री आशुतोष राणा ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा कि आज के युग में व्यक्ति 10 मिनट से ज्यादा अपने मोबाइल से दूर नहीं रह सकता और उतनी देर में भी वह पाँच बार अपना मोबाइल देख लेता है ऐसी स्थिति में दर्शक दीर्घा में बैठे हमारे गणमान्य जनों ने तीन साढ़े तीन घंटे के इस कार्यक्रम को अपना पूरा चित् दिया और मेरे पूरे नाट्य मंचन को गंभीरता के साथ देखा सुना और सराहा। यह हम सभी के लिए बहुत गौरवान्वित करने वाली बात भी है और यही प्रेम कलाकारों की असली कमाई है। अभिनेता आशुतोष राणा ने अपनी बात को विराम देने पूर्व जो शब्द कहे वह जबलपुर की कला जगत में ब्रांडिंग के साथ ही इसकी सकारात्मक छवि को भरने के लिए काफी सक्षम हैं। श्री राणा ने कहा कि हम लोग इस बात से प्रफुल्लित है कि अब जबलपुर बदल गया है अब जबलपुर वित्त भी देता है और चित्त भी देता है।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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