
1416 खंडपीठों में 1.78 लाख मामलों की हो रही सुनवाई
जबलपुर (जयलोक)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में शनिवार को प्रदेश स्तरीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसके लिए कुल 1416 खंडपीठों का गठन किया गया। हाई कोर्ट की तीनों बेंच में छह खंडपीठों के जरिए सुनवाई हो रही है। इस बार एक लाख 78 हजार से अधिक मामले सुनवाई के लिए नियत किए गए हैं। इसके साथ ही साढ़े तीन लाख प्रीलिटिगेशन प्रकरण भी रखे गए हैं।

उक्त जानकारी मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव समुन श्रीवास्तव ने प्रेस कांफ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण के संरक्षण हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व कार्यपालक अध्यक्ष हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश विवेक रूसिया के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय लोक अदालत को गति दी जा रही है। हाई कोर्ट स्तर से लेकर जिला, तहसील, श्रम, कुटुम्ब सहित अन्य न्यायालयों में लंबित दीवानी व आपराधिक शमनीय मामले, बैंक, विद्युत, श्रम जलकर, संपत्तिकर आदि प्री-लिटिगेशन प्रकरणों सहित सभी प्रकार के मामले निराकरण हेतु सुनवाई की जा रही है। विद्युत अधिनियम के लंबित एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों व मप्र नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत अधिरोपित संपत्ति कर व जलकर के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को नियमानुसार विभिन्न छूट प्रदान की जा रही है।

विभिन्न न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरण, सिविल प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा संबंधी प्रकरण, धारा 138 लिखित परक्राम्य अधिनियम के प्रकरण, हिन्दु विवाह अधिनियम एवं अन्य वैवाहिक मामलें, धारा 144 भा.ना.सू.सं. घरेलू हिंसा, विद्युत अधिनियम संबंधी मामलें, बैंक ऋण बकाया वसूली, दूरसंचार विभाग बकाया वसूली नगर पालिका निगम संपत्तिकर, जलकर, उपभोक्ता प्रभार आदि का उभयपक्षों के मध्य आपसी सहमति एवं समझौता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है।
उक्त नेशनल लोक अदालत में राजीनामा के आधार पर निराकरण हेतु समस्त प्रकार के लगभग 7267 लंबित प्रकरण रखे गए हैं, इसी प्रकार लगभग 25 हजार प्रीलिटिगेशन प्रकरण रखे गए हैं, जिनके निराकरण के लिए जिला न्यायालय-जबलपुर, तहसील व्यवहार न्यायालय-सिहोरा एंव पाटन सहित कुल 78 खंडपीठों का गठन किया गया है। उक्त नेशनल लोक अदालत में नगर पालिका निगम द्वारा संपत्तिकर, जलकर, उपभोक्ता प्रभार के मामलों में समझौता करने पर श्रेणीवार छूट दी जा रही हैं, इसी प्रकार विद्युत विभाग द्वारा भी विद्युत चोरी, अनाधिकृत उपयोग व अन्य विद्युत प्रकरणों में भी श्रेणीवार छूट दी जा रही हैं।

Author: Jai Lok







