
एक खबर आई है अखबारों में कि ‘मर्सिडीज़ बेंज’ ने अपनी कारों की कीमतों में दो फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है ये बढ़ोतरी कार के अलग-अलग वेरिएंट पर बढ़ाई गई है। अपन ने तो देखा नहीं है सिर्फ सुना है कि जो बड़े-बड़े लोग होते हैं वे मर्सिडीज़ पर चलते हैं इसलिए मर्सिडीज़ बनाने वाली कंपनी ने अपनी कारों के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। पता लगा है कि मर्सिडीज़ कार की कीमत एक करोड़ बत्तीस लाख से लेकर चार करोड़ तक जाती है इसी कंपनी की लग्जरी और स्पोट्र्स कार की कीमत छह करोड़ तक होती है। अपने को तो समझ में नहीं आता कि आखिर इसमें ऐसी क्या खासियत है?

जैसी दूसरी कारों में ड्राइवर को ड्राइविंग सीट में बैठना पड़ता है, वैसे ही मर्सिडीज़ के ड्राइवर या मालिक को बैठना पड़ता है, जैसे ब्रेक, क्लिच, एक्सीलेटर और गेयर दूसरी गाडिय़ों में होते हैं वैसे इसमें भी होते हैं, जैसा एसी दूसरी गाडिय़ों में होता है थोड़ा बहुत और महंगा वाला एसी इसमें भी लगा होता है, दूसरी गाडिय़ां भी सडक़ पर चलती हैं और मर्सिडीज़ को भी सडक़ पर ही चलना पड़ता है ऐसा तो है नहीं कि मर्सिडीज़ हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर जैसे आसमान में उड़ जाती हो, पेट्रोल आम गाडिय़ों में भी लगता है और इसमें भी लगता है, ये भी टायर के दम पर दौड़ती है और दूसरी गाडिय़ों में भी टायर उसे दौड़ते हैं, जैसे आम गाडिय़ों में तरह-तरह के कलर रहते हैं वो ही कलर इसमें भी रहते हैं, जब सब कुछ दूसरी गाडिय़ों और इसमें एकरूपता है तो ऐसी आखिर क्या खासियत है ये पता लगाने की अपन ने कोशिश की तो पता लगा है कि यह ‘स्टेटस सिंबल’ है जिसके पास मर्सिडीज़ है मतलब वो बहुत बड़ा आदमी है, वैसे भी जिसके पास इफरात पैसा हो तो वो खर्च करे तो कहां करे खाना तो दाल, चावल रोटी ही है ज्यादा होगा चिकन खा लेंगे, मछली खा लेंगे, सोना चांदी तो खा नहीं सकते सो गाडिय़ों में खर्च कर देते हैं, बताते हैं कि हम मर्सिडीज़ पर चलते हैं और जो मर्सिडीज़ पर चलते हैं उनकी शान अलग होती है इसी चक्कर में करोड़ों रुपए की ऐसी तैसी हो जाती है, लेकिन अपने को क्या? मर्सिडीज़ वाले अपनी कारों की कीमतों में दो फीसदी की बढ़ोतरी कर दें या दो सौ फीसदी की अपने ठेंगे से। अपने को तो लेना नहीं है अपनी तो भैया मारुति ही ठीक है कम से कम एवरेज तो सही मिलता है मर्सिडीज़ में क्या है एक लीटर में तीन-चार किलोमीटर चल गई तो बड़ी बात है और अपनी मारुति पंद्रह किलोमीटर, अब आप ही बताओ कि कौन सा सौदा बेहतर है?

खबरदार जो तवा रोटी मांगी
होटल वालों ने साफ -साफ कह दिया है कि खबरदार अगर आपने खाने में ‘तवा रोटी’ मांगी। देख नहीं रहे गैस की कैसी मारामारी है हजार वाला गैस सिलेंडर दो हजार और ढाई हजार में मिल रहा है एजेंसियों के सामने सिलेंडरों की लाइन लगी है लोग अपने-अपने सिलेंडर पर बैठकर अपने-अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं इधर सरकार और उसके नुमाइंदे कह रहे हैं कि गैस की कोई कमी नहीं है अरे भैया जब गैस की कमी नहीं है तो काहे की लाइन लगी है ये तो बता दो, किसको शौक पड़ा है कि भारी दोपहरिया में लाइन में लगे अब किसी भी होटल में चले जाओ वो साफ कह देता है खाना है तो तंदूरी खाओ वरना अपना रास्ता नापो अब जिसको तंदूरी नहीं पचती वो बेचारा रोटी मांगता है लेकिन तवा रोटी के लिए गैस की जरूरत है और गैस मिल नहीं रही ऐसी स्थिति में होटल वाला भी तवा रोटी कहां से बना कर दे। अपना तो इन तमाम लोगों से यही कहना है कि भैया काहे को तवा रोटी के चक्कर में पड़े जो मिल रहा है खा लो आज गैस नहीं है कल हो सकता है तंदूर की भट्टी भी ना मिले इसलिए जो मिल रहा है उसी में संतोष करो और सरकार के बयानों पर मत जाओ अपने को मालूम है कि हाल क्या है लेकिन सरकार माने तब न। जब भरपूर माल आपके पास है तो फिर कीमत काहे को बढ़ा दी, कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई क्यों खत्म क्यों बंद कर दी लेकिन सरकार का क्या है वो और उनके अफसर एक इशारा करेंगे तो दस सिलेंडर आ जाएंगे, पिसना तो आम आदमी को है लेकिन अपना भी यही कहना है कि जब तक स्थिति ठीक नहीं होती होटल वालों से तवा रोटी की मांग मत करो यार बेचारे लज्जित हो जाते हैं।


प्राचार्य जी कुत्ते भगाओ
अभी तक तो ये जानकारी अपने पास थी कि किसी भी कॉलेज में जो लेक्चरर, प्रोफेसर, और प्राचार्य हुआ करते थे उनका काम स्टूडेंट को पढ़ाने का हुआ करता था लेकिन अब पता लगा है कि जब से कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट चिंतित है तब से मध्य प्रदेश सरकार ने तमाम सरकारी कालेजों के प्राचार्यों पर यह जिम्मेदारी डाल दी है कि वे अपने कॉलेज में घुसने वाले आवारा कुत्तों को भगाने का काम करें, यानी अब प्राचार्य जी अपने कमरे में ना बैठकर दिनभर एक लठ्ठ लेकर कॉलेज के हर कमरे, बरामदे और मैदान में घूमते नजर आएंगे और जैसे ही कोई आवारा कुत्ता उनकी नजर में आएगा वे अपने लठ्ठ से डरा कर अपने कॉलेज के प्रांगण से बाहर कर देंगे। अच्छा काम है कम से कम सरकारी काम से तो फुर्सत मिलेगी जब भी कोई इंस्पेक्शन होगा और यह पूछा जाएगा कि आपने अमुक काम क्यों नहीं किया तो फट से उत्तर दे देंगे क्या करें साहब जब से ये आदेश आया है सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ एक ही चिंता रहती है कि कहीं कोई कुत्ता प्रांगण में ना घुस आए क्योंकि अगर कोई कुत्ता प्रांगण में दिख गया तो सरकार हम पर कार्यवाही कर देगी। क्या दिन आ गए में प्राचार्यों के, सचमुच ये आवारा कुत्ते जो ना करवा दें थोड़ा है अब तो कुत्ते भी कहेंगे देखा हमारा जलवा हमें खदेडऩे वाला कोई छोटा-मोटा आदमी नहीं बल्कि पीएचडी धारी प्राचार्य है।
सुपर हिट ऑफ द वीक
तुमने मेरे साथ धोखा किया है’ श्रीमती जी ने श्रीमान जी से कहा
‘ऐसा क्या हो गया’ श्रीमानजी ने पूछा
‘तुमने बताया ही नहीं कि तुम्हारी रानी नाम की पहले से ही एक बीबी है’
‘झूठ मैने तो ससुर जी को पहले ही बतला दिया था कि मैं तुम्हें बिल्कुल रानी की तरह रखूंगा’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।
कांग्रेस विधायकों को राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के लिए 5-5 करोड़ का ऑफर
Author: Jai Lok






