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पश्चिम एशिया युद्ध का असर चुनावों पर पड़ सकता है

विपक्ष महँगाई को बना सकता है मुद्दा, एनडीए की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
नई दिल्ली (जयलोक)। देश में पांच राज्यों विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। इन चुनावों में यूं तो राज्यों के मुद्दे हावी रहने चाहिए या राष्ट्रीय स्तर के कुछ मुद्दों को हवा देने की कोशिश हो सकती है, लेकिन एक अंतरराष्ट्रीय पहलू भी इसमें जुड़ गया है। इस किस्से का सिरा जुड़ा है ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले से। इससे पैदा होने वाली चुनौती एनडीए को भी तकलीफ दे सकती है और राज्यों में सत्तारूढ़ दलों को भी।
पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच क्रूड ऑयल और नैचरल गैस की कीमतें बढ़ी हैं और भारत में इनकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। जनवरी में 65-66 डॉलर प्रति बैरल पर रहा कच्चा तेल अब 100 डॉलर के पार है। भारत अपनी जरूरत का 88फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसका करीब आधा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से आता है। भारत के एलएनजी इंपोर्ट का करीब 60फीसदी हिस्सा कतर और यूएई जैसे देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता रहा है। एलपीजी में चुनौती इसलिए बड़ी हो गई है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 60फीसदी हिस्सा आयात करता है, लेकिन इसका 90फीसदी तक होर्मुज स्ट्रेट से आता है। समीकरण यह है कि क्रूड ऑयल अगर अगले 10-12 महीनों में 110-115 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, तो इसके आयात का सालाना बिल 65 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाएगा। इससे भारत को और ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे। इससे रुपया और नीचे आएगा। तमाम चीजों का आयात महंगा होता जाएगा। वे चीजें तो महंगी होंगी ही, उनसे देश में बनने वाला माल भी महंगा हो जाएगा यानी कुल मिलाकर महंगाई बढऩे का रिस्क है।
यह महंगाई इन विधानसभा चुनावों के चार-पांच महीने पहले से बढऩे लगी थी। मार्च में ईरान संकट के असर से यह और उछलेगी। इसके बाद अप्रैल में मतदान होना है। बंगाल में तो अप्रैल के आखिरी दिनों में वोटिंग है। बीजेपी कहती रही है कि यूपीए शासन काल में महंगाई दर बहुत ज्यादा हुआ करती थी और मोदी शासन में इस पर काबू पाया गया है। लेकिन एलपीजी के मसले पर निशाना साध रहे विरोधी दल महंगाई को भी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
पश्चिम एशिया में युद्ध से ही जुड़ा दूसरा बड़ा मसला उर्वरकों का है। भारत जितना फर्टिलाइजर आयात करता है, उसका 26.2फीसदी हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। खुद वित्त मंत्रालय चिंता जता रहा है कि युद्ध लंबा चलने पर एलएनजी और क्रूड पर निर्भर फर्टिलाइजर और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों पर बुरा असर पड़ सकता है। खरीफ सीजन से पहले केरल, पश्चिम बंगाल और असम के लिए यह संवेदनशील मामला है। सरकार एलपीजी सिलिंडरों के दाम बढ़ा चुकी है। विपक्ष इसका हवाला देते हुए वोटरों से कह सकता है कि चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जा सकते हैं।
विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के 10 दिन बाद हरकत में आई। दूसरी ओर बीजेपी वोटरों को यह समझा सकती है कि अंतरराष्ट्रीय स्थितियों से बड़ा असर पड़ा है। बीजेपी यह सवाल भी उछाल सकती है कि असम में महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से नीचे है, तो तमिलनाडु, बंगाल और केरल में ज्यादा क्यों है। ऐसे सवालों के जवाब वोटरों के गले में जो ठीक से उतार पाएगा, उसके लिए चुनावी लड़ाई आसान हो जाएगी।

 

समग्र कायस्थ समाज देगा डेड बॉडी फ्रीजर

Jai Lok
Author: Jai Lok

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